Leh: ऑफ-रोडिंग और प्रदूषण पर लगेगी लगाम, लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा की जिम्मेदारी अब 100 पूर्व सैनिकों के हाथ
लद्दाख प्रशासन ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए 100 पूर्व सैनिकों को पर्यावरण सुरक्षाबल (ईपीएफ) में तैनात किया है।
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लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने एक अनूठी पहल करते हुए 100 पूर्व सैनिकों को पर्यावरण सुरक्षा बल (ईपीएफ) में तैनात किया है। इस पहल का उद्देश्य बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
शनिवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पूर्व सैनिकों को उनके तैनाती स्थलों के लिए रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे संवेदनशील उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है, जहां कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उपराज्यपाल ने पर्यावरण सुरक्षा बल के सदस्यों को शपथ भी दिलाई। सभी पूर्व सैनिकों ने पर्यावरण, जंगलों, वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा के साथ-साथ अपने जीवन में सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
पर्यावरण सुरक्षा बल में सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स से सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक शामिल हैं। इन्हें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा, जहां वे अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत कैंपिंग, वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने और प्रदूषण जैसी गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
इन पूर्व सैनिकों को अपने निर्धारित क्षेत्रों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के उल्लंघन पर मौके पर ही चालान काटने का अधिकार भी दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और समाज सेवा का भी एक प्रभावी माध्यम बनेगी।
प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा और उन्हें उनके गृह क्षेत्र या आसपास के इलाकों में तैनात किया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी का बेहतर उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को और प्रभावी बनाया जा सके।