जम्मू-कश्मीर: खबरें पढ़ीं, समझीं और खुद बनाया अपना अखबार, अमर उजाला ने प्रतिभाओं को किया सम्मानित
अमर उजाला के स्कूल कनेक्ट के तहत आयोजित 'अपना अखबार खुद बनाएं' प्रतियोगिता में जम्मू के 70 स्कूलों के करीब 10 हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विजेता विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया वहीं जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय ने बच्चों को पढ़ाई के साथ अनुभव से सीखने और अखबार पढ़ने की आदत विकसित करने का संदेश दिया।
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खबरों को पढ़कर अपनी पसंद की खबरें चुनना, उन्हें समझना और फिर अपने तरीके से अखबार में सजाना... प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने यह काम पूरे उत्साह से किया। वीरवार को उनकी इसी मेहनत का फल मिला। अमर उजाला के स्कूल कनेक्ट के तहत आयोजित समारोह में ‘अपना अखबार खुद बनाएं’ प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मंच पर अपना नाम सुनते ही बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्य अतिथि जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबों की पढ़ाई के साथ काम और अनुभव से भी सीखना जरूरी है। बच्चों को कक्षा तक सीमित रखने के बजाय बाहर की दुनिया देखने व उससे सीखने का मौका देना चाहिए।
जम्मू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष दुष्यंत राय विशिष्ट अतिथि रहे। विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक भी समारोह में शामिल हुए। इस प्रतियोगिता में जम्मू शहर के 70 सरकारी और निजी स्कूलों के करीब 10 हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। चयनित विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रदेश स्तर पर पहले तीन स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार भी दिए गए।
सत्यकाम की कहानी से समझाई बात
कुलपति ने छांदोग्य उपनिषद के सत्यकाम का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि गुरु ने सत्यकाम को 400 पशुओं के साथ जंगल मंे भेजा और उनकी संख्या एक हजार होने पर लौटने को कहा। लंबे समय तक प्रकृति के बीच रहकर पशुओं की देखभाल करते हुए सत्यकाम ने बहुत कुछ सीखा। सत्यकाम की सीख किसी कक्षा में बैठकर नहीं हुई थी। उसने प्रकृति, पशुओं और अपने काम से बहुत कुछ सीखा। आज बच्चों को भी ऐसे अनुभव देने की जरूरत है। उन्होंने माता-पिता और स्कूलों से कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ आसपास की दुनिया को समझने का मौका भी दें।
अमर उजाला की पहल की सराहना
कुलपति ने अमर उजाला की इस पहल की सराहना करते हुए इसे आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने तक सीमित न रखा जाए। उन्हें अखबार के दफ्तर में बुलाकर समाचार लिखने, पन्ना तैयार करने और कॉलम बनाने की जानकारी दी जा सकती है। बच्चों को यह भी सिखाया जा सकता है कि कंपनी कैसे शुरू होती है और मार्केटिंग कैसे की जाती है।
सीख: ज्ञान व काम को साथ लेकर चलें छात्र
प्रो. उमेश राय ने कहा, बच्चों को सिर्फ किताबों में पढ़ी बातें याद कराने से बात पूरी नहीं होती। उन्हें अपने हाथ से काम करने और उसका अनुभव लेने का मौका भी मिलना चाहिए।
उन्होंने आचार्य विनोबा भावे की शिक्षा पर लिखी पुस्तक ‘थॉट्स ऑन एजुकेशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञान और काम को साथ लेकर चलना जरूरी है।
अमर उजाला का अपना अखबार खुद बनाएं कार्यक्रम भी बच्चों को पढ़ी हुई बात को खुद करके देखने का मौका देता है।
वंशिका प्रथम, साक्षी दूसरे उपासना तीसरे स्थान परप्रदेश स्तर पर केसी इंटरनेशनल स्कूल की वंशिका वाणी ने पहला स्थान हासिल किया। शिक्षा निकेतन, जीवन नगर की साक्षी डोगरा दूसरे और श्री महावीर जैन हायर सेकेंडरी स्कूल की उपासना जम्वाल तीसरे स्थान पर रहीं। वंशिका को 11000, साक्षी को 7100 और उपासना को 5100 रुपये का पुरस्कार दिया गया। अन्य चयनित विद्यार्थियों को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
इन्हें भी मिले विशेष पुरस्कार...
- हरमनजीत कौर - जम्मू संस्कृति स्कूल
- सरहान्या भट - स्प्रिंग डेल्स स्कूल, जम्मू
- आदित्य महाजन - सेंट पीटर स्कूल, बीसी रोड
- आलिया- मेयफेयर इंटरनेशनल स्कूल, बनतालाब
- माही राजपूत - शिक्षा निकेतन, गांधी नगर जम्मू
हर दिन कुछ नया सीखें और नया करें विद्यार्थी : प्रो. दुष्यंत
जम्मू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और मीडिया स्टडीज के विभागाध्यक्ष प्रो. दुष्यंत कुमार राय ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपना अखबार खुद बनाएं की पहल शुरू कर अमर उजाला ने स्कूलों के बच्चों को नवाचार और रचनात्मकता दिखाने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप किसी भी कार्यक्रम में भाग लेते हैं तो उससे कुछ नया सीखने को मिलता है। हमारे जीवन का लक्ष्य सीखना ही है। आपको हर दिन कुछ नया सीखना और नया करना चाहिए, ताकि जिंदगी आसानी से चलती रहे। नयापन बहुत ही आवश्यक है। छात्रों को यह देखना होगा कि प्रतिदिन क्या नया कर रहे हैं। यह नयापन ही जीवन के साइकिल की ग्रीस है जिससे पहिया आगे बढ़ता रहता है।