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झेलम पर बाढ़ नियंत्रण को खर्च होंगे 1500 करोड़
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 10 Jun 2016 12:34 AM IST
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मुख्यमंत्री से मुलाकात करते जल संसाधन मंत्रालय के सचिव
- फोटो : Amar Ujala
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रियासत में बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम को शीघ्र ही शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से तकनीकी और आर्थिक सहयोग की अपेक्षा की है। गुरुवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर के साथ यहां मुलाकात करते हुए सीएम ने बताया कि झेलम नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 1500 करोड़ रुपए की लागत की रूपरेखा है।
जिसके पहले चररण में 399 करोड़ और दूसरे चरण के लिए 1178 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह राशि प्रधानमंत्री के जेएंडके के विकास के लिए 80 हजार करोड़ रुपये के प्लान के अंतर्गत है। राजौरी में नहर प्रोजेक्ट और झेलम में इनलैंड ट्रांसपोर्ट शुरू किए जाने के लिए भी केंद्र से फंड की उम्मीद जताई है।
बढ़ेगी झेलम की जलसंधारण क्षमता
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय अफसर को बताया कि पहले चरण के काम के लिए 20 करोड़ रुपये जारी हो गए हैं शेष फंड शीघ्र ही जारी किए जाने के लिए मंत्रालय को कार्ययोजना के कागजात भेजे गए हैं।
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राज्य सरकार बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए जहाजरानी मंत्रालय और ड्रेजिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया का सहयोग भी लेना चाहती है। ताकि नदियों और झीलों की सफाई की जा सके। बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के पूर्ण होने पर झेलम नदी की जलसंधारण क्षमता 4000 क्यूसेक से 6000 क्यूसेक हो सकेगी, जोकि कश्मीर को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
इनके लिए भी मांगे 606 करोड़
सीएम ने तवी नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय जल आयोग को भेजे गए 290 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की राशि भी शीघ्र स्वीकृति किए जाने की उम्मीद सचिव के समक्ष जताई।
इसके अतिरिक्त उझ नदी बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 75 करोड़, कठुआ में सहर खड्ड पर बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 76 करोड़, पुंछ में शाही खुल सूरांकोट से कलाई पुल तक बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 51 करोड़, पुंछ में ही कलाई पुल से शेर-ए-कश्मीर पुल तक कार्य के लिए 64 करोड़ तथा सांबा में बसंतार नदी पर बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 50 करोड़ की रकम जल संसाधन मंत्रालय से मिलने की उम्मीद की है।
सचिव ने कहा कि जल्द ही जल संसाधन मंत्रालय की ओर से विशेषज्ञों की टीम जम्मू और कश्मीर में बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम को मूर्तरूप दिए जाने के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में राज्य सरकार की सहायता करने आएगी।
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जिसके पहले चररण में 399 करोड़ और दूसरे चरण के लिए 1178 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह राशि प्रधानमंत्री के जेएंडके के विकास के लिए 80 हजार करोड़ रुपये के प्लान के अंतर्गत है। राजौरी में नहर प्रोजेक्ट और झेलम में इनलैंड ट्रांसपोर्ट शुरू किए जाने के लिए भी केंद्र से फंड की उम्मीद जताई है।
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बढ़ेगी झेलम की जलसंधारण क्षमता
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय अफसर को बताया कि पहले चरण के काम के लिए 20 करोड़ रुपये जारी हो गए हैं शेष फंड शीघ्र ही जारी किए जाने के लिए मंत्रालय को कार्ययोजना के कागजात भेजे गए हैं।
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राज्य सरकार बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए जहाजरानी मंत्रालय और ड्रेजिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया का सहयोग भी लेना चाहती है। ताकि नदियों और झीलों की सफाई की जा सके। बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के पूर्ण होने पर झेलम नदी की जलसंधारण क्षमता 4000 क्यूसेक से 6000 क्यूसेक हो सकेगी, जोकि कश्मीर को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
इनके लिए भी मांगे 606 करोड़
सीएम ने तवी नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय जल आयोग को भेजे गए 290 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की राशि भी शीघ्र स्वीकृति किए जाने की उम्मीद सचिव के समक्ष जताई।
इसके अतिरिक्त उझ नदी बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 75 करोड़, कठुआ में सहर खड्ड पर बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 76 करोड़, पुंछ में शाही खुल सूरांकोट से कलाई पुल तक बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 51 करोड़, पुंछ में ही कलाई पुल से शेर-ए-कश्मीर पुल तक कार्य के लिए 64 करोड़ तथा सांबा में बसंतार नदी पर बाढ़ संरक्षण कार्य के लिए 50 करोड़ की रकम जल संसाधन मंत्रालय से मिलने की उम्मीद की है।
सचिव ने कहा कि जल्द ही जल संसाधन मंत्रालय की ओर से विशेषज्ञों की टीम जम्मू और कश्मीर में बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम को मूर्तरूप दिए जाने के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में राज्य सरकार की सहायता करने आएगी।