{"_id":"6673757418801ed50e0e2998","slug":"udhampur-protest-sallery-probem-udhampur-news-c-202-1-sjam1011-112078-2024-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: चार माह से वेतन नहीं मिलने पर आक्रोश, घासलेट लेकर नप कार्यालय पहुंचे सेवा कर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: चार माह से वेतन नहीं मिलने पर आक्रोश, घासलेट लेकर नप कार्यालय पहुंचे सेवा कर्मी
Thu, 20 Jun 2024 05:49 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Thu, 20 Jun 2024 05:49 AM IST
विज्ञापन
प्रदर्शन कर हक के लिए बुलंद की आवाज, कहा-परिवार का गुजारा नहीं चला पाने के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर
शहर में घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा बंद, कई जगह लगे ढेर
मंगलवार को भी एक कर्मी कर चुका है आत्महत्या का प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। चार माह से वेतन नहीं मिलने पर शहर में घर-घर से कचरा उठाने वाले सेवा कर्मियों में आक्रोश है। बुधवार को मिट्टी का तेल (केरोसिन या घासलेट) लेकर नगर परिषद के कार्यालय पहुंचे और हक के लिए आवाज बुलंद की। साथ ही बताया कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का गुजारा नहीं चला पा रहे हैं, जिस कारण हत्या के लिए मजबूर हैं। मंगलवार को भी एक कर्मी ने केरोसिन छिड़क कर आत्महत्या का प्रयास किया था। उधर, शहर में घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा बंद होने से कई जगह कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं।
बुधवार को नगर परिषद कार्यालय के बाहर घर-घर से कचरा संग्रहण करने वाले कर्मचारियों ने वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इनमें से कुछ कर्मी केरोसिन लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि अगर उनको वेतन नहीं मिला तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। प्रदर्शनकारी बोध राज ने बताया कि चार माह से वेतन नहीं मिला है। अब अपने परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक ने मकान खाली करने के लिए कह दिया है। अधिक उधारी होने पर दुकान भी राशन नहीं दे रहे हैं। ऐसे में आत्महत्या के अलावा ओर कोई विकल्प नहीं है। हामिर हुसैन ने बताया कि घर में खाने तक के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं। ठेकेदार से संपर्क करने पर कोई उचित जवाब नहीं मिलता है। जिला प्रशासन एक-दो दिन में मसला हल करने का आश्वासन देकर टाल देते हैं। एक साथी ने आत्महत्या करने का भी प्रयास किया उसे जैसे-तैसे बचा लिया गया। हालात काफी बिगड़ चुके हैं।
गौरतलब रहे कि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद और व्यापारी वर्ग काफी समय से आमने-सामने है। व्यापारियों का आरोप है कि नगर परिषद शहर में सफाई व्यवस्था सुचारू ढंग से नहीं चला पा रही है। इसके बावजूद उनसे घर-घर से कचरा संग्रहण का शुल्क वसूला जा रहा है। कई शहरवासी एवं व्यापारी मासिक शुल्क देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में मासिक शुल्क नहीं मिलने से कंपनी अपने मुलाजिमों को मासिक वेतन नहीं दे पा रही है। वहीं, नगर परिषद भी कंपनी के साथ हुए 11.77 लाख रुपये के करार के तहत पैसा देने में असमर्थ है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था और सफाई कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
ज्यादातर शहरवासी और दुकानदार सफाई शुल्क नहीं दे रहे हैं। जब सफाई शुल्क ही नहीं मिलेगा तो कंपनी को पैसे कहां से दिए जाएंगे। सफाई शुल्क जमा करना कंपनी की जिम्मेदारी है। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
- नितिन गुप्ता, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
बिना सहयोग से शहर को व्यवस्थित रखना संभव नहीं है। हर वर्ग को सफाई अभियान में सहयोग देना चाहिए और सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही सेवाओं का शुल्क समय पर अदा करना चाहिए। शहर में बंद हुई सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों को वेतन मुहैया कराने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
- सलोनी राय, डीसी, उधमपुर
विज्ञापन
शहर में घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा बंद, कई जगह लगे ढेर
मंगलवार को भी एक कर्मी कर चुका है आत्महत्या का प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। चार माह से वेतन नहीं मिलने पर शहर में घर-घर से कचरा उठाने वाले सेवा कर्मियों में आक्रोश है। बुधवार को मिट्टी का तेल (केरोसिन या घासलेट) लेकर नगर परिषद के कार्यालय पहुंचे और हक के लिए आवाज बुलंद की। साथ ही बताया कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का गुजारा नहीं चला पा रहे हैं, जिस कारण हत्या के लिए मजबूर हैं। मंगलवार को भी एक कर्मी ने केरोसिन छिड़क कर आत्महत्या का प्रयास किया था। उधर, शहर में घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा बंद होने से कई जगह कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं।
बुधवार को नगर परिषद कार्यालय के बाहर घर-घर से कचरा संग्रहण करने वाले कर्मचारियों ने वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इनमें से कुछ कर्मी केरोसिन लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि अगर उनको वेतन नहीं मिला तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। प्रदर्शनकारी बोध राज ने बताया कि चार माह से वेतन नहीं मिला है। अब अपने परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक ने मकान खाली करने के लिए कह दिया है। अधिक उधारी होने पर दुकान भी राशन नहीं दे रहे हैं। ऐसे में आत्महत्या के अलावा ओर कोई विकल्प नहीं है। हामिर हुसैन ने बताया कि घर में खाने तक के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं। ठेकेदार से संपर्क करने पर कोई उचित जवाब नहीं मिलता है। जिला प्रशासन एक-दो दिन में मसला हल करने का आश्वासन देकर टाल देते हैं। एक साथी ने आत्महत्या करने का भी प्रयास किया उसे जैसे-तैसे बचा लिया गया। हालात काफी बिगड़ चुके हैं।
विज्ञापन
गौरतलब रहे कि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद और व्यापारी वर्ग काफी समय से आमने-सामने है। व्यापारियों का आरोप है कि नगर परिषद शहर में सफाई व्यवस्था सुचारू ढंग से नहीं चला पा रही है। इसके बावजूद उनसे घर-घर से कचरा संग्रहण का शुल्क वसूला जा रहा है। कई शहरवासी एवं व्यापारी मासिक शुल्क देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में मासिक शुल्क नहीं मिलने से कंपनी अपने मुलाजिमों को मासिक वेतन नहीं दे पा रही है। वहीं, नगर परिषद भी कंपनी के साथ हुए 11.77 लाख रुपये के करार के तहत पैसा देने में असमर्थ है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था और सफाई कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
ज्यादातर शहरवासी और दुकानदार सफाई शुल्क नहीं दे रहे हैं। जब सफाई शुल्क ही नहीं मिलेगा तो कंपनी को पैसे कहां से दिए जाएंगे। सफाई शुल्क जमा करना कंपनी की जिम्मेदारी है। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
- नितिन गुप्ता, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
बिना सहयोग से शहर को व्यवस्थित रखना संभव नहीं है। हर वर्ग को सफाई अभियान में सहयोग देना चाहिए और सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही सेवाओं का शुल्क समय पर अदा करना चाहिए। शहर में बंद हुई सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों को वेतन मुहैया कराने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
- सलोनी राय, डीसी, उधमपुर