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Udhampur News: मानदेय न बढ़ने पर मिड-डे-मील वर्करों का फूटा गुस्सा
Fri, 12 Jul 2024 04:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Fri, 12 Jul 2024 04:38 AM IST
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शहीद भक्त सिंह पार्क ने प्रदर्शन कर बुलंद की आवाज
कहा, महंगाई के बीच 30 रुपये प्रतिदिन का मेहनताना नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानदेय नहीं बढ़ने पर जिले के सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील वर्करों के सब्र का बांध वीरवार को टूट गया। उन्होंने शहर के शहीद भगत सिंह पार्क में प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। साथ ही महंगाई के बीच शिक्षा विभाग की तरफ से 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे मानदेय को नाकाफी बताया है। कहा कि महंगाई के इस दौर में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए मानदेय बढ़ाया जाए।
जिले के विभिन्न हिस्सों से आए रसोइयों ने कुक यूनियन के बैनर तले मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल अनीता कुमारी और कुलबीर सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग ने उन्हें सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील बनाने के लिए कुक के रूप में नियुक्त किया है। मानदेय के नाम पर उन्हें मात्र 30 रुपये प्रतिदिन दिन के हिसाब दिए जा रहे हैं। इससे पहले उनको 1000 रुपये महीने के हिसाब से दिए जाते थे, लेकिन फिर इसमें कटौती कर दी गई। करीब दस वर्ष से सरकार से स्थायी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक गंभीरता नहीं दिखाई। अगर स्थायी नहीं करना है तो 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिहाड़ी दी जाए ताकि सही ढंग से गुजारा कर सकें।
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कहा, महंगाई के बीच 30 रुपये प्रतिदिन का मेहनताना नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानदेय नहीं बढ़ने पर जिले के सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील वर्करों के सब्र का बांध वीरवार को टूट गया। उन्होंने शहर के शहीद भगत सिंह पार्क में प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। साथ ही महंगाई के बीच शिक्षा विभाग की तरफ से 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे मानदेय को नाकाफी बताया है। कहा कि महंगाई के इस दौर में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए मानदेय बढ़ाया जाए।
जिले के विभिन्न हिस्सों से आए रसोइयों ने कुक यूनियन के बैनर तले मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल अनीता कुमारी और कुलबीर सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग ने उन्हें सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील बनाने के लिए कुक के रूप में नियुक्त किया है। मानदेय के नाम पर उन्हें मात्र 30 रुपये प्रतिदिन दिन के हिसाब दिए जा रहे हैं। इससे पहले उनको 1000 रुपये महीने के हिसाब से दिए जाते थे, लेकिन फिर इसमें कटौती कर दी गई। करीब दस वर्ष से सरकार से स्थायी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक गंभीरता नहीं दिखाई। अगर स्थायी नहीं करना है तो 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिहाड़ी दी जाए ताकि सही ढंग से गुजारा कर सकें।
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