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Udhampur News: दो जर्जर कमरों में चलती हैं आठ कक्षाएं, बारिश में डर से नहीं आते बच्चे
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उधमपुर। गवर्नमेंट मिडिल स्कूल डुबडुबा कालोनी के कक्षा रूम की छत से उखड़ा प्लास्टर: संवाद
- फोटो : mathura
25 साल पुराने स्कूल में न कमरे, न शौचालय न चहारदीवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर के नजदीक सत्तैनी क्षेत्र के सरकारी मिडिल स्कूल डुबडुबा कालोनी की स्थिति बहुत ही दयनीय है। इस स्कूल में 43 विद्यार्थी और चार अध्यापिकाएं तैनात हैं लेकिन स्कूल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। यहां विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों खतरे में हैं। मौके पर पहुंचे संवाद रिपोर्टर को स्कूल में एक भी बच्चे नहीं मिले। बताया गया कि मौसम खराब होने पर अभिभावक डर के मारे बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
खस्ताहाल कमरे और सुरक्षा का खतरा
स्कूल में मात्र दो कमरे हैं और इनकी हालत भी दयनीय है। एक कमरा तो इतना अधिक खस्ताहाल है कि इसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं और छत से प्लास्टर तक उखड़ चुका है। दूसरा कमरा भी स्कूल के पिछले हिस्से में मौजूद पहाड़ी से आने वाले बरसाती पानी और पस्सी गिरने से खस्ताहाल हो रहा है। स्कूल के पास ढाई कनाल के आसपास जमीन मौजूद है, लेकिन कमरों की कमी के कारण अलग अलग कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। दो कमरों में ही आठ कक्षाएं चलती हैं। बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाने वाली जगह भी खस्ताहाल है। स्कूल के बरामदे तक में पानी और पस्सियां आ जाती हैं। स्कूल के आसपास बड़ी बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। बरसात के दौरान हर समय सांप बिच्छू का भी डर बना रहता है। स्कूल में न चहारदीवारी है और न ही शौचालय।
स्कूल की स्थापना और अपग्रेडेशन
इस स्कूल की स्थापना साल 2000 में एक प्राइमरी स्कूल के तौर पर की गई थी। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर साल 2014 में इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल का दर्जा दे दिया गया। मिडल स्कूल का दर्जा मिले हुए लगभग 11 वर्ष हो गए लेकिन स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का भी प्रबंध नहीं हो पाया है। नतीजतन विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
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स्कूल में बच्चे न होने के बाबत स्कूल प्रभारी अनीता गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान पहाड़ी की तरफ से काफी ज्यादा मिट्टी और पानी आ जाता है। पहाड़ी की तरफ से लगातार गिर रही पस्सियां दीवारों क्षतिग्रस्त कर रही है। मौसम खराब होने पर अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। बच्चों की सुरक्षा का मामला होने के कारण सख्ती नहीं बरती जाती है। उन्होंने कहा कि शहर के नजदीक होने के कारण दाखिला लेने के लिए बहुत बच्चे आते हैं मगर हमारे पास बैठने तक की जगह न होने के कारण आसपास के स्कूलों में चले जाते हैं।
विभाग की कार्रवाई
डिप्टी सीईओ कल्पना जसरोटिया ने कहा कि स्कूल के लिए शौचालय, खेल मैदान, सुरक्षा दीवार आदि बुनियादी जरूरतों के लिए विभाग की तरफ से प्रयास शुरू किए गए हैं। इस तरह के सभी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और इस स्कूल में भी और कमरे बनवाए जाएंगे।
अब देखना यह है कि विभाग की तरफ से किए जा रहे प्रयास कब तक रंग लाते हैं और स्कूल की स्थिति में सुधार होता है या नहीं। फिलहाल, स्कूल की स्थिति को देखकर लगता है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है।
बाक्स 00
सरकारी प्राथमिक विद्यालय के भवन और स्कूल के स्थान के लिए भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) ने
निम्नलिखित मानक निर्धारित किए हैं पर इसका 25 फीसदी भी पालन नहीं होता -
- स्कूल का स्थल: आवासीय क्षेत्रों से आसानी से सुलभ होना चाहिए।
- भारी यातायात वाली सड़कों, नदियों, तालाबों, रेलवे पटरियों आदि से दूर होना चाहिए।
- भवन डिजाइन और मानक:
- कक्षाओं का आकार प्रति छात्र 2-2.5 वर्ग मीटर होना चाहिए।
- कक्षाओं की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए।
- गलियारों की चौड़ाई कम से कम 1.8 मीटर होनी चाहिए।
- शौचालयों की संख्या प्रति 15 छात्रों पर 1 शौचालय होनी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर के नजदीक सत्तैनी क्षेत्र के सरकारी मिडिल स्कूल डुबडुबा कालोनी की स्थिति बहुत ही दयनीय है। इस स्कूल में 43 विद्यार्थी और चार अध्यापिकाएं तैनात हैं लेकिन स्कूल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। यहां विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों खतरे में हैं। मौके पर पहुंचे संवाद रिपोर्टर को स्कूल में एक भी बच्चे नहीं मिले। बताया गया कि मौसम खराब होने पर अभिभावक डर के मारे बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
खस्ताहाल कमरे और सुरक्षा का खतरा
स्कूल में मात्र दो कमरे हैं और इनकी हालत भी दयनीय है। एक कमरा तो इतना अधिक खस्ताहाल है कि इसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं और छत से प्लास्टर तक उखड़ चुका है। दूसरा कमरा भी स्कूल के पिछले हिस्से में मौजूद पहाड़ी से आने वाले बरसाती पानी और पस्सी गिरने से खस्ताहाल हो रहा है। स्कूल के पास ढाई कनाल के आसपास जमीन मौजूद है, लेकिन कमरों की कमी के कारण अलग अलग कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। दो कमरों में ही आठ कक्षाएं चलती हैं। बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाने वाली जगह भी खस्ताहाल है। स्कूल के बरामदे तक में पानी और पस्सियां आ जाती हैं। स्कूल के आसपास बड़ी बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। बरसात के दौरान हर समय सांप बिच्छू का भी डर बना रहता है। स्कूल में न चहारदीवारी है और न ही शौचालय।
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स्कूल की स्थापना और अपग्रेडेशन
इस स्कूल की स्थापना साल 2000 में एक प्राइमरी स्कूल के तौर पर की गई थी। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर साल 2014 में इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल का दर्जा दे दिया गया। मिडल स्कूल का दर्जा मिले हुए लगभग 11 वर्ष हो गए लेकिन स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का भी प्रबंध नहीं हो पाया है। नतीजतन विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
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स्कूल में बच्चे न होने के बाबत स्कूल प्रभारी अनीता गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान पहाड़ी की तरफ से काफी ज्यादा मिट्टी और पानी आ जाता है। पहाड़ी की तरफ से लगातार गिर रही पस्सियां दीवारों क्षतिग्रस्त कर रही है। मौसम खराब होने पर अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। बच्चों की सुरक्षा का मामला होने के कारण सख्ती नहीं बरती जाती है। उन्होंने कहा कि शहर के नजदीक होने के कारण दाखिला लेने के लिए बहुत बच्चे आते हैं मगर हमारे पास बैठने तक की जगह न होने के कारण आसपास के स्कूलों में चले जाते हैं।
विभाग की कार्रवाई
डिप्टी सीईओ कल्पना जसरोटिया ने कहा कि स्कूल के लिए शौचालय, खेल मैदान, सुरक्षा दीवार आदि बुनियादी जरूरतों के लिए विभाग की तरफ से प्रयास शुरू किए गए हैं। इस तरह के सभी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और इस स्कूल में भी और कमरे बनवाए जाएंगे।
अब देखना यह है कि विभाग की तरफ से किए जा रहे प्रयास कब तक रंग लाते हैं और स्कूल की स्थिति में सुधार होता है या नहीं। फिलहाल, स्कूल की स्थिति को देखकर लगता है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है।
बाक्स 00
सरकारी प्राथमिक विद्यालय के भवन और स्कूल के स्थान के लिए भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) ने
निम्नलिखित मानक निर्धारित किए हैं पर इसका 25 फीसदी भी पालन नहीं होता -
- स्कूल का स्थल: आवासीय क्षेत्रों से आसानी से सुलभ होना चाहिए।
- भारी यातायात वाली सड़कों, नदियों, तालाबों, रेलवे पटरियों आदि से दूर होना चाहिए।
- भवन डिजाइन और मानक:
- कक्षाओं का आकार प्रति छात्र 2-2.5 वर्ग मीटर होना चाहिए।
- कक्षाओं की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए।
- गलियारों की चौड़ाई कम से कम 1.8 मीटर होनी चाहिए।
- शौचालयों की संख्या प्रति 15 छात्रों पर 1 शौचालय होनी चाहिए।