{"_id":"68925e9e5a14d19c3506e859","slug":"udhampur-government-middle-school-badeyan-poor-building-udhampur-news-c-10-agr1006-678930-2025-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: सरकारी मिडिल स्कूल बाड़ेयां के जर्जर क्लास रूम<bha>;<\/bha> जोखिम में नौनिहालों की जान, शिक्षक भी परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: सरकारी मिडिल स्कूल बाड़ेयां के जर्जर क्लास रूम<bha>;</bha> जोखिम में नौनिहालों की जान, शिक्षक भी परेशान
विज्ञापन
मिडिल स्कूल बाड़ेयां का खस्ताहाल क्लासरूम।
उधमपुर। बेशक सरकार सरकारी स्कूलों में जरूरी सुविधाओं के साथ गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान को लेकर भरसक प्रयास कर रही है लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कुछ स्कूलों की हालत इतनी अधिक बदतर है कि इनमें शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों की जान तक जोखिम में नजर आती है।
ऐसा ही एक स्कूल डीसी कार्यालय के लगभग 300 मीटर की दूरी पर वार्ड नंबर पांच में सरकारी मिडिल स्कूल बाड़ेयां है। 1951 में स्थापित इस स्कूल में बारी-बारी से बनाए गए कुल नौ कक्षा कक्ष हैं लेकिन पुराने कमरों की सुध नहीं लिए जाने के कारण वर्तमान में मात्र दो नए कक्षा कक्षों को छोड़कर अन्य सभी की हालत बाहर और भीतर दोनों तरफ से इतनी अधिक जर्जर हो चुकी है कि इनकी दीवारों से लेकर छत तक दरारें पड़ चुकी हैं। खिड़कियां और दरवाजे क्षतिग्रस्त और जर्जर हालत में हैं। कक्षा कक्षों के भीतर दीवारों और फर्श से सीलन के कारण प्लास्टर तक उखड़ कर गिर चुका है और कई जगहों पर गड्ढे बन चुके हैं। ब्लैकबोर्ड तक लिखने लायक नहीं रह गए हैं।
वहीं, एक टिन वाले कक्षा कक्ष को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे शिक्षा विभाग यहां जानबूझकर किसी हादसे का इंतजार कर रहा हो। इस कक्ष की छत की टिन और दीवारों के बीच गैप हो चुका है। टिन के सहारे के लिए डाली गई लकड़ी की बल्लियां दीवारों से खिसकने की कगार पर हैं। बारिश के दौरान पानी स्कूल की कक्षाओं के भीतर घुस आता है, जिससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है बल्कि हादसे का भी डर पैदा हो जाता है।
विज्ञापन
आठवीं तक के इस को-एजुकेशन वाले स्कूल में मौजूदा समय में 80 विद्यार्थी हैं और इन्हें पढ़ाने के लिए नौ शिक्षक तैनात हैं। कमरों की जर्जर हालत के कारण दो कमरों को बंद रखा गया है और शेष खस्ताहाल कक्षों में ही कक्षाएं संचालित होती हैं। स्कूल की इस दुर्दशा पर इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों से लेकर शिक्षक तक परेशान हैं।
विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएं:
स्कूल में पढ़ाई तो काफी अच्छी होती है और सभी शिक्षक काफी मेहनत के साथ अच्छे से पढ़ाते हैं, लेकिन कक्षाओं की हालत काफी ज्यादा खराब है। दीवारों पर सीलन से ब्लैकबोर्ड तक लिखने के काबिल नहीं रह गए हैं।
— संजय, कक्षा 7
स्कूल के कमरों की हालत काफी ज्यादा खराब हो गई है। बारिश के दौरान सारा पानी अंदर आ जाता है। खासकर बरसात और सर्दी के दिनों में काफी ज्यादा परेशानी पेश आती है।
- शुभम, कक्षा 8
स्कूल के चारों तरफ सुरक्षा के लिए चारदीवारी तो बनी है, लेकिन कक्षाओं की जर्जर हालत से डर लगता है। कई कक्षाओं में खिड़कियों के दरवाजे तक नहीं हैं।
- बलविंदर, कक्षा 8
स्कूल की हालत काफी ज्यादा खराब हो चुकी है। दीवारों की दरारें और फर्श पर गड्ढे डरावने लगते हैं। बारिश के दौरान सभी कक्षाओं के विद्यार्थी सुरक्षित कमरों में एकत्रित होकर बैठ जाते हैं।
-अतुल, कक्षा 8
-
-- -- -- -- -- -- --
कोट...
स्पोर्ट्स रूम, कार्यालय कक्ष और किचन के अलावा स्कूल में कुल नौ कक्षा कक्ष हैं। इनमें से दो नए कमरे हैं और इनमें छोटे बच्चों की कक्षाएं संचालित होती हैं। बाकी पुराने दो कमरों में जरूरी सामान रखा है और शेष में कक्षाएं संचालित होती हैं। खेल मैदान, पेयजल, चारदीवारी, शौचालय इत्यादि का बढ़िया इंतजाम है। चूंकि यह स्कूल काफी ज्यादा पुराना है और इनमें बने कुछ कमरे भी अधिक पुराने हैं, जिसके कारण इनकी हालत अब खराब हो चुकी है। लेकिन फिर भी हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करते हैं कि विद्यार्थियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। शिक्षा विभाग के निर्देश पर छह महीने में स्कूल की रिपोर्ट तैयार करके भेजी जाती है।
- प्राध्यापिका, अनीता खजूरिया
-- -- -- --
खस्ताहाल इमारत वाले स्कूलों को चिन्हित कर प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। विभाग का प्रयास है कि सभी स्कूलों की हालत को सुधारा जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
- डिप्टी सीईओ, कल्पना जसरोटिया
विज्ञापन
ऐसा ही एक स्कूल डीसी कार्यालय के लगभग 300 मीटर की दूरी पर वार्ड नंबर पांच में सरकारी मिडिल स्कूल बाड़ेयां है। 1951 में स्थापित इस स्कूल में बारी-बारी से बनाए गए कुल नौ कक्षा कक्ष हैं लेकिन पुराने कमरों की सुध नहीं लिए जाने के कारण वर्तमान में मात्र दो नए कक्षा कक्षों को छोड़कर अन्य सभी की हालत बाहर और भीतर दोनों तरफ से इतनी अधिक जर्जर हो चुकी है कि इनकी दीवारों से लेकर छत तक दरारें पड़ चुकी हैं। खिड़कियां और दरवाजे क्षतिग्रस्त और जर्जर हालत में हैं। कक्षा कक्षों के भीतर दीवारों और फर्श से सीलन के कारण प्लास्टर तक उखड़ कर गिर चुका है और कई जगहों पर गड्ढे बन चुके हैं। ब्लैकबोर्ड तक लिखने लायक नहीं रह गए हैं।
विज्ञापन
वहीं, एक टिन वाले कक्षा कक्ष को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे शिक्षा विभाग यहां जानबूझकर किसी हादसे का इंतजार कर रहा हो। इस कक्ष की छत की टिन और दीवारों के बीच गैप हो चुका है। टिन के सहारे के लिए डाली गई लकड़ी की बल्लियां दीवारों से खिसकने की कगार पर हैं। बारिश के दौरान पानी स्कूल की कक्षाओं के भीतर घुस आता है, जिससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है बल्कि हादसे का भी डर पैदा हो जाता है।
विज्ञापन
आठवीं तक के इस को-एजुकेशन वाले स्कूल में मौजूदा समय में 80 विद्यार्थी हैं और इन्हें पढ़ाने के लिए नौ शिक्षक तैनात हैं। कमरों की जर्जर हालत के कारण दो कमरों को बंद रखा गया है और शेष खस्ताहाल कक्षों में ही कक्षाएं संचालित होती हैं। स्कूल की इस दुर्दशा पर इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों से लेकर शिक्षक तक परेशान हैं।
विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएं:
स्कूल में पढ़ाई तो काफी अच्छी होती है और सभी शिक्षक काफी मेहनत के साथ अच्छे से पढ़ाते हैं, लेकिन कक्षाओं की हालत काफी ज्यादा खराब है। दीवारों पर सीलन से ब्लैकबोर्ड तक लिखने के काबिल नहीं रह गए हैं।
— संजय, कक्षा 7
स्कूल के कमरों की हालत काफी ज्यादा खराब हो गई है। बारिश के दौरान सारा पानी अंदर आ जाता है। खासकर बरसात और सर्दी के दिनों में काफी ज्यादा परेशानी पेश आती है।
- शुभम, कक्षा 8
स्कूल के चारों तरफ सुरक्षा के लिए चारदीवारी तो बनी है, लेकिन कक्षाओं की जर्जर हालत से डर लगता है। कई कक्षाओं में खिड़कियों के दरवाजे तक नहीं हैं।
- बलविंदर, कक्षा 8
स्कूल की हालत काफी ज्यादा खराब हो चुकी है। दीवारों की दरारें और फर्श पर गड्ढे डरावने लगते हैं। बारिश के दौरान सभी कक्षाओं के विद्यार्थी सुरक्षित कमरों में एकत्रित होकर बैठ जाते हैं।
-अतुल, कक्षा 8
-
कोट...
स्पोर्ट्स रूम, कार्यालय कक्ष और किचन के अलावा स्कूल में कुल नौ कक्षा कक्ष हैं। इनमें से दो नए कमरे हैं और इनमें छोटे बच्चों की कक्षाएं संचालित होती हैं। बाकी पुराने दो कमरों में जरूरी सामान रखा है और शेष में कक्षाएं संचालित होती हैं। खेल मैदान, पेयजल, चारदीवारी, शौचालय इत्यादि का बढ़िया इंतजाम है। चूंकि यह स्कूल काफी ज्यादा पुराना है और इनमें बने कुछ कमरे भी अधिक पुराने हैं, जिसके कारण इनकी हालत अब खराब हो चुकी है। लेकिन फिर भी हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करते हैं कि विद्यार्थियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। शिक्षा विभाग के निर्देश पर छह महीने में स्कूल की रिपोर्ट तैयार करके भेजी जाती है।
- प्राध्यापिका, अनीता खजूरिया
खस्ताहाल इमारत वाले स्कूलों को चिन्हित कर प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। विभाग का प्रयास है कि सभी स्कूलों की हालत को सुधारा जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
- डिप्टी सीईओ, कल्पना जसरोटिया