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Udhampur News: प्रयासों का नहीं दिख रहा असर, अस्तित्व की जंग लड़ रही देविका नदी
Fri, 12 Jul 2024 04:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Fri, 12 Jul 2024 04:30 AM IST
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दो दशक पहले नौ करोड़ की लागत से दोनों किनारों पर बनाई गई सुरक्षा दीवार कई जगह क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। एक तरफ देविका नदी के संरक्षण को लेकर विभिन्न संगठनों एवं प्रशासन की ओर से कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी सीवरेज निर्माण कार्य सहित देविका नदी के सौंदर्यीकरण के लिए अहम परियोजनाओं पर काम किया गया। लेकिन, दो दशक पहले लगभग नौ करोड़ की लागत से नदी के दोनों किनारों पर बनाई गई सुरक्षा दीवार कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे नदी की हालत बदतर होती चली जा रही है।
उधमपुर जिला मुख्यालय को देविका नगरी के नाम से जाना जाता है। क्योंकि, यह नदी शहर के बीचोबीच से गुजरती है। इससे लोगों की आस्था भी जुड़ी है। देविका को गंगा नदी की बड़ी बहन है। मान्यता है कि इस नदी में हरिद्वार के समान अस्थि विर्सजन का फल मिलता है। इस कारण अधिकतर जिलेवासी देविका नदी में अस्थियां विसर्जित करते हैं। देविका के तट पर कई देवी देवताओं के मंदिर हैं। इस कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोग धर्म-कर्म के लिए यहां पहुंचते हैं।
लोकसभा या विधानसभा चुनाव में देविका का विकास हमेशा अहम मुद्दा रहा है। इसी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर उधमपुर की जनता उम्मीदवारों की हात-जीत तय करती है। करीब दो दशक पहले देविका के संरक्षण के लिए लगभग 8.47 करोड़ की लागत से नगर परिषद के अधीन हाउसिंग कॉलोनी से लेकर ओमाड़ा मोड़ तक सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से लगभग चार किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई थी। इसका उद्देश्य देविका नदी को अतिक्रमण से बचाना था। लेकिन, 20 सालों में बाढ़, बारिश के साथ ही संबंधित विभाग की अनदेखी का दंश झेलना पड़ा है। मौजूदा समय में सुरक्षा दीवार कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस वजह से देविका के संरक्षण के प्रयास व दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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सुरक्षा दीवाराें का नहीं हो रहा उचित संरक्षण
देविका के अस्तित्व को बचाने के लिए काफी समय से संघर्षरत पूर्व बैंक प्रबंधक एवं स्वतंत्र पुरातत्वविद अनिल पाबा ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद 1997 में देविका के लिए 8.47 करोड़ रुपये मंजूर करवाए गए थे। गुलाम नबी आजाद के मुख्यमंत्री बनने पर देविका प्रोटेक्शन वॉल परियोजना को मंजूरी मिली थी। इसके संरक्षण के लिए नदी के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई गई, लेकिन अनदेखी के कारण आज सुरक्षा दीवार कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। देविका के संरक्षण को लेकर किए जा रहे सभी प्रयास निराधार साबित हो रहे हैं।
दीवारों के संरक्षण व निर्माण के लिए तैयार हो रहा प्रस्ताव
देविका नदी में पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण घाट और तटों पर फैली अव्यवस्था को लेकर देविका रेस्टोरेशन परियोजना तैयार की जा रहा है। इसके तहत नदी के किनारों पर बनी सुरक्षा दीवारों की मरम्मत या फिर पुर्ननिर्माण को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि देविका के संरक्षण से जुड़े उद्देश्य को पूरा किया जा सके।
- सलोनी राय, डीसी, उधमपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। एक तरफ देविका नदी के संरक्षण को लेकर विभिन्न संगठनों एवं प्रशासन की ओर से कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी सीवरेज निर्माण कार्य सहित देविका नदी के सौंदर्यीकरण के लिए अहम परियोजनाओं पर काम किया गया। लेकिन, दो दशक पहले लगभग नौ करोड़ की लागत से नदी के दोनों किनारों पर बनाई गई सुरक्षा दीवार कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे नदी की हालत बदतर होती चली जा रही है।
उधमपुर जिला मुख्यालय को देविका नगरी के नाम से जाना जाता है। क्योंकि, यह नदी शहर के बीचोबीच से गुजरती है। इससे लोगों की आस्था भी जुड़ी है। देविका को गंगा नदी की बड़ी बहन है। मान्यता है कि इस नदी में हरिद्वार के समान अस्थि विर्सजन का फल मिलता है। इस कारण अधिकतर जिलेवासी देविका नदी में अस्थियां विसर्जित करते हैं। देविका के तट पर कई देवी देवताओं के मंदिर हैं। इस कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोग धर्म-कर्म के लिए यहां पहुंचते हैं।
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लोकसभा या विधानसभा चुनाव में देविका का विकास हमेशा अहम मुद्दा रहा है। इसी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर उधमपुर की जनता उम्मीदवारों की हात-जीत तय करती है। करीब दो दशक पहले देविका के संरक्षण के लिए लगभग 8.47 करोड़ की लागत से नगर परिषद के अधीन हाउसिंग कॉलोनी से लेकर ओमाड़ा मोड़ तक सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से लगभग चार किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई थी। इसका उद्देश्य देविका नदी को अतिक्रमण से बचाना था। लेकिन, 20 सालों में बाढ़, बारिश के साथ ही संबंधित विभाग की अनदेखी का दंश झेलना पड़ा है। मौजूदा समय में सुरक्षा दीवार कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस वजह से देविका के संरक्षण के प्रयास व दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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सुरक्षा दीवाराें का नहीं हो रहा उचित संरक्षण
देविका के अस्तित्व को बचाने के लिए काफी समय से संघर्षरत पूर्व बैंक प्रबंधक एवं स्वतंत्र पुरातत्वविद अनिल पाबा ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद 1997 में देविका के लिए 8.47 करोड़ रुपये मंजूर करवाए गए थे। गुलाम नबी आजाद के मुख्यमंत्री बनने पर देविका प्रोटेक्शन वॉल परियोजना को मंजूरी मिली थी। इसके संरक्षण के लिए नदी के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई गई, लेकिन अनदेखी के कारण आज सुरक्षा दीवार कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। देविका के संरक्षण को लेकर किए जा रहे सभी प्रयास निराधार साबित हो रहे हैं।
दीवारों के संरक्षण व निर्माण के लिए तैयार हो रहा प्रस्ताव
देविका नदी में पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण घाट और तटों पर फैली अव्यवस्था को लेकर देविका रेस्टोरेशन परियोजना तैयार की जा रहा है। इसके तहत नदी के किनारों पर बनी सुरक्षा दीवारों की मरम्मत या फिर पुर्ननिर्माण को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि देविका के संरक्षण से जुड़े उद्देश्य को पूरा किया जा सके।
- सलोनी राय, डीसी, उधमपुर