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दैनिक कार्यों के साथ परमात्मा का ध्यान अवश्य करें : सुभाष शास्त्री
Mon, 29 Jul 2024 02:43 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:43 AM IST
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अखंड परम धाम आश्रम में हुआ दो दिवसीय सत्संग का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मनुष्य को दिनचर्या के कामकाज के साथ-साथ परमात्मा का ध्यान अवश्य करना चाहिए। क्योंकि, मनुष्य मोह माया में फंसकर ऐसे कार्य कर जाता है, जिससे वह परमात्मा से दूर हो जाता है। यह ज्ञान संत सुभाष शास्त्री ने रविवार को गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में अखंड परम धाम आश्रम उमाला में शुरू हुए दो दिवसीय सत्संग में दिया।
उन्होंने बताया कि इस तनावपूर्ण जीवन में मनुष्य को परमात्मा का ध्यान करना बहुत जरूरी है। प्रभु का ध्यान करने से मनुष्य न सिर्फ चिंताओं से मुक्त होता है, बल्कि उसमें काम करने की इच्छा भी बढ़ती है। आधुनिक युग में मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है कि काम के बिना उसे कुछ दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि वह अपने घर परिवार व समाज से कटता जा रहा है।
ऐसे में परमात्मा का ध्यान करने से तनाव से मुक्ति मिलती है। मनुष्य के हृदय में अच्छे विचार आएंगे और उसका मन शांत होगा। भक्ति के मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को चरित्र का महत्व भी समझना चाहिए। चैतन्य महाप्रभु गांव-गांव घूम कर भगवान नाम के संकीर्तन के माध्यम से जनजागृति में लगे रहते थे। वह अपने प्रवचन में कहा करते थे कि कलयुग में यज्ञ, अनुष्ठानों आदि कर्मकांड की अपेक्षा शुद्ध सात्विक चरित्र के साथ जीवन बिताते हुए भगवान के स्मरण से ही अपना जीवन सार्थक बनाया जा सकता है।
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जब तक मन में सांसारिक भोग पदार्थों के लिए आकर्षित होगा, तब तक आचरण नहीं सुधरेगा। प्रभु के सिवाय इस संसार में कोई भी वस्तु आनंदमय नहीं है। इसलिए सदा उसी का नाम जपा करें। उन्होंने संगत से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मनुष्य को दिनचर्या के कामकाज के साथ-साथ परमात्मा का ध्यान अवश्य करना चाहिए। क्योंकि, मनुष्य मोह माया में फंसकर ऐसे कार्य कर जाता है, जिससे वह परमात्मा से दूर हो जाता है। यह ज्ञान संत सुभाष शास्त्री ने रविवार को गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में अखंड परम धाम आश्रम उमाला में शुरू हुए दो दिवसीय सत्संग में दिया।
उन्होंने बताया कि इस तनावपूर्ण जीवन में मनुष्य को परमात्मा का ध्यान करना बहुत जरूरी है। प्रभु का ध्यान करने से मनुष्य न सिर्फ चिंताओं से मुक्त होता है, बल्कि उसमें काम करने की इच्छा भी बढ़ती है। आधुनिक युग में मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है कि काम के बिना उसे कुछ दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि वह अपने घर परिवार व समाज से कटता जा रहा है।
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ऐसे में परमात्मा का ध्यान करने से तनाव से मुक्ति मिलती है। मनुष्य के हृदय में अच्छे विचार आएंगे और उसका मन शांत होगा। भक्ति के मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को चरित्र का महत्व भी समझना चाहिए। चैतन्य महाप्रभु गांव-गांव घूम कर भगवान नाम के संकीर्तन के माध्यम से जनजागृति में लगे रहते थे। वह अपने प्रवचन में कहा करते थे कि कलयुग में यज्ञ, अनुष्ठानों आदि कर्मकांड की अपेक्षा शुद्ध सात्विक चरित्र के साथ जीवन बिताते हुए भगवान के स्मरण से ही अपना जीवन सार्थक बनाया जा सकता है।
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जब तक मन में सांसारिक भोग पदार्थों के लिए आकर्षित होगा, तब तक आचरण नहीं सुधरेगा। प्रभु के सिवाय इस संसार में कोई भी वस्तु आनंदमय नहीं है। इसलिए सदा उसी का नाम जपा करें। उन्होंने संगत से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहने का आह्वान किया।