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Udhampur News: सरकारी स्कूलों में 700 शिक्षकों की कमी, बच्चों की पढ़ाई पर असर
Mon, 16 Jun 2025 01:43 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:43 AM IST
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जिले में संचालित हो रहे कुल 1428 सरकारी स्कूल
चिनैनी जोन की स्थिति भी चिंताजनक, 306 शिक्षकों के पद खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले में कुल 1428 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। हालांकि, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।
जानकारी के अनुसार, जिले में लगभग 700 से अधिक शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चिनैनी जोन की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 306 शिक्षकों के पद खाली हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में गणित, उर्दू, विज्ञान, अंग्रेजी सहित अन्य विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों की शिक्षा स्तर में गिरावट आना स्वाभाविक है।
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स्थानीय प्रतिनिधियों की बार-बार की गई अपीलें रही अनसुनी
विभिन्न पंचायतों के पूर्व सरपंच जैसे सत्यालता के यशपाल, कुलदीप राज, शिव देव सिंह, छोटू राम, अब्दुल रशीद, भीम सिंह, राम सिंह आदि ने कई बार सरकार और शिक्षा विभाग से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों और वार्षिक परीक्षाओं के परिणामों पर पड़ रहा है। उन्होंने एक बार फिर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
दावे और हकीकत में अंतर
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग की ओर से लगातार यह दावा किया जाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और अभिभावकों से आग्रह किया जाता है कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नामांकित कराएं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है, क्योंकि शिक्षकों की भारी कमी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कोट
विभाग की ओर से अपने उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है। विभाग की ओर से यही प्रयास किए जा रहे हैं कि गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने से पहले ही जिला में स्कूलों में आ रही शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए।
- नरेंद्र मोहन सूरी, जिला शिक्षा मुख्य अधिकारी
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चिनैनी जोन की स्थिति भी चिंताजनक, 306 शिक्षकों के पद खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले में कुल 1428 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। हालांकि, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।
जानकारी के अनुसार, जिले में लगभग 700 से अधिक शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चिनैनी जोन की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 306 शिक्षकों के पद खाली हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में गणित, उर्दू, विज्ञान, अंग्रेजी सहित अन्य विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों की शिक्षा स्तर में गिरावट आना स्वाभाविक है।
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स्थानीय प्रतिनिधियों की बार-बार की गई अपीलें रही अनसुनी
विभिन्न पंचायतों के पूर्व सरपंच जैसे सत्यालता के यशपाल, कुलदीप राज, शिव देव सिंह, छोटू राम, अब्दुल रशीद, भीम सिंह, राम सिंह आदि ने कई बार सरकार और शिक्षा विभाग से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों और वार्षिक परीक्षाओं के परिणामों पर पड़ रहा है। उन्होंने एक बार फिर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
दावे और हकीकत में अंतर
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग की ओर से लगातार यह दावा किया जाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और अभिभावकों से आग्रह किया जाता है कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नामांकित कराएं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है, क्योंकि शिक्षकों की भारी कमी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कोट
विभाग की ओर से अपने उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है। विभाग की ओर से यही प्रयास किए जा रहे हैं कि गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने से पहले ही जिला में स्कूलों में आ रही शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए।
- नरेंद्र मोहन सूरी, जिला शिक्षा मुख्य अधिकारी