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Udhampur News: थाईलैंड में विश्व ने देखी भारतीय पैरा आर्चरी की ताकत, स्टार खिलाड़ी पायल ने विश्व चैंपियन शीतल को हराकर बनाया रिकॉर्ड
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कटड़ा। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में जारी वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारतीय पैरा तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। प्रतियोगिता में भारत ने 16 पदक जीतकर समग्र पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सात स्वर्ण, पांच रजत और चार कांस्य पदक अपने नाम किए जिससे विश्व स्तर पर भारतीय पैरा आर्चरी की ताकत फिर साबित हुई है।
ऐतिहासिक सफलता में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आर्चरी अकादमी की स्टार खिलाड़ी पायल नाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। महिला कंपाउंड वर्ग के फाइनल मुकाबले में पायल नाग ने अपनी ही टीम की साथी विश्व चैंपियन शीतल देवी को रोमांचक मुकाबले में 139-136 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। मैच को टूर्नामेंट का सबसे प्रतिस्पर्धी फाइनल माना जा रहा है।
पायल के स्वर्ण पदक जीतने से जहां भारतीय दल में उत्साह की लहर दौड़ गई। वहीं शीतल देवी ने रजत पदक जीतकर भारत के लिए दोहरा मंच सुनिश्चित किया। दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरा महिला तीरंदाजी की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
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दिव्यांग खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना उद्देश्य
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य ने कहा कि श्राइन बोर्ड की आर्चरी अकादमी का उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है और पायल व शीतल की सफलता उसी दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण ने पूरे देश और जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन किया है। श्राइन बोर्ड भविष्य में भी खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
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ऐतिहासिक सफलता में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आर्चरी अकादमी की स्टार खिलाड़ी पायल नाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। महिला कंपाउंड वर्ग के फाइनल मुकाबले में पायल नाग ने अपनी ही टीम की साथी विश्व चैंपियन शीतल देवी को रोमांचक मुकाबले में 139-136 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। मैच को टूर्नामेंट का सबसे प्रतिस्पर्धी फाइनल माना जा रहा है।
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पायल के स्वर्ण पदक जीतने से जहां भारतीय दल में उत्साह की लहर दौड़ गई। वहीं शीतल देवी ने रजत पदक जीतकर भारत के लिए दोहरा मंच सुनिश्चित किया। दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरा महिला तीरंदाजी की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
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दिव्यांग खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना उद्देश्य
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य ने कहा कि श्राइन बोर्ड की आर्चरी अकादमी का उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है और पायल व शीतल की सफलता उसी दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण ने पूरे देश और जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन किया है। श्राइन बोर्ड भविष्य में भी खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।