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शिक्षकों ने छुपा रखी थी बात, बाद में हुआ खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला, उध्ामपुर
Updated Tue, 09 Dec 2014 01:33 AM IST
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दो दिन पहले शनिवार को मरी छात्रा शिवानी के पिता राज कुमार ने बताया कि
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बेटी की मौत के बाद उन्हें पोस्टमार्टम भी नहीं कराने दिया गया। वह हाउसिंग
कालोनी में दर्जी का काम करते हैं। उनकी बेटी शिवानी दूसरी औलाद थी।
उसकी मौत की जानकारी मिलने पर भी स्कूल से कोई भी शिक्षक या प्रिंसिपल देखने के लिए भी नहीं पहुंचा। हाल चाल भी नहीं पूछा। शिवानी ने एक दिसंबर को स्कूल में अत्यधिक मात्रा में आयरन की गोली खा ली थी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
वहीं छात्र राहुल के पिता शाम लाल ने बताया कि स्कूल में उल्टियां कराने के बाद भी शिक्षकों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी। तीस टैबलेट का लिफाफा घर लाने के बाद ही उन्हें पूरी बात समझ में आई और वह तुरंत अपने बेटे को अस्पताल ले गए। जम्मू में जीएमसी अस्पताल रहने के बाद विशाल को वापस लाया गया। एक भी टीचर उसका हाल चाल पूछने के लिए नहीं पहुंचा।
प्रिंसिपल को करेंगे सस्पेंड
मुख्य शिक्षा अधिकारी बलबीर सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। मंगलवार को जांच टीम मौके पर जाएगी। प्रिंसिपल को सस्पेंड किया जाएगा। मामला काफी गंभीर है। सभी जोन के शिक्षा अधिकारियों को पूरा समझाया गया था कि किस तरह से आयरन की टैबलेट देनी है।
इसके बाद भी अगर लापरवाही हुई है तो जोनल शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस टैबलेट को सप्ताह में एक बार दिया जाना है। वह भी स्कूल में। शिक्षकों की देखरेख में। अगर टैबलेट को घरों में दे दिया गया तो यह एक गंभीर अपराध बनता है।
अभिभावकों की मौजूदगी में ही बच्चों को जब नार्मल बीमारियों की दवाइयां दी जाती हैं। तो इस टैबलेट को कैसे बच्चों को दे दिया गया। इसकी पूरी जांच की जा रही है।
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डाक्टरों का भी लगा था कैंप
आयरन की गोली बांटने से कुछ दिन पहले चीफ मेडिकल आफिसर की देखरेख में मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया था। सरपंच सुभाष चंद्र के अनुसार इस कैंप में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. भी मौजूद थे। उन्हाेंने भी बच्चों को पीने की दवाई दी थी। यह दवाई उन्हीं बच्चों को दी गई, जिनके साथ अभिभावक थे। दवाइयाें की एक्सपायरी भी 2015 तक है। इसलिए कहीं न कहीं लापरवाही हुई है।
एक्सपायरी डेट की भी मिली दवाई
कोटली में आयोजित मेडिकल कैंप में भी बच्चों को पीने वाली दवाई देने का दावा सरपंच और परिवार के सदस्य कर रहे हैं। दवाई एक्सपायरी है। जुलाई 2012 में बनी इस दवाई की एक्सपायरी डेट जून 2014 है। उस पर नॉट फार सेल और फिजिशियन सैंपल भी लिखा है। पीने वाली इस दवाई की शीशी भी राहुल शर्मा के घर से मिली है।
इस संबंध में उसके चाचा गणेश ने बताया कि एक्सपायरी तारीख की इस शीशी के बारे में उन्हें पूरी तरह से पता नहीं है। दवाई शायद मेडिकल कैंप में दी गई होगी। कैंप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद थे। गांव के सरपंच सुभाष चंद्र के अनुसार कैंप में सभी डाक्टर थे।
हर बच्चे के अभिभावकों को बुलाकर पीने वाली दवाई दी गई है। दवाई सर्दी जुकाम के लिए है। इस दवाई से बच्चों को कुछ असर हुआ हो, इसकी संभावना नहीं है। क्योंकि डाक्टरों ने पूरा मेडिकल चेकअप कर ही इसे दिया था। इसलिए गड़बड़ी की संभावना नहीं है। अगर एक्सपायरी तारीख की दवाई पी गई है, तो स्कूल में ही क्यों उल्टियां हुईं।
शिवानी के पास ऐसी कोई पीने वाली दवाई नहीं मिली। फिर उसकी हालत क्यों बिगड़ी। उसकी मौत क्यों हुई? चीफ मेडिकल आफिसर डॉ. चंद्र प्रकाश और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अनुसार एक्सपायरी तारीख की दवाइयां किसी कीमत पर भी नहीं दी जा सकती हैं। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी पूरी जांच की जाएगी।
उसकी मौत की जानकारी मिलने पर भी स्कूल से कोई भी शिक्षक या प्रिंसिपल देखने के लिए भी नहीं पहुंचा। हाल चाल भी नहीं पूछा। शिवानी ने एक दिसंबर को स्कूल में अत्यधिक मात्रा में आयरन की गोली खा ली थी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
वहीं छात्र राहुल के पिता शाम लाल ने बताया कि स्कूल में उल्टियां कराने के बाद भी शिक्षकों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी। तीस टैबलेट का लिफाफा घर लाने के बाद ही उन्हें पूरी बात समझ में आई और वह तुरंत अपने बेटे को अस्पताल ले गए। जम्मू में जीएमसी अस्पताल रहने के बाद विशाल को वापस लाया गया। एक भी टीचर उसका हाल चाल पूछने के लिए नहीं पहुंचा।
प्रिंसिपल को करेंगे सस्पेंड
मुख्य शिक्षा अधिकारी बलबीर सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। मंगलवार को जांच टीम मौके पर जाएगी। प्रिंसिपल को सस्पेंड किया जाएगा। मामला काफी गंभीर है। सभी जोन के शिक्षा अधिकारियों को पूरा समझाया गया था कि किस तरह से आयरन की टैबलेट देनी है।
इसके बाद भी अगर लापरवाही हुई है तो जोनल शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस टैबलेट को सप्ताह में एक बार दिया जाना है। वह भी स्कूल में। शिक्षकों की देखरेख में। अगर टैबलेट को घरों में दे दिया गया तो यह एक गंभीर अपराध बनता है।
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अभिभावकों की मौजूदगी में ही बच्चों को जब नार्मल बीमारियों की दवाइयां दी जाती हैं। तो इस टैबलेट को कैसे बच्चों को दे दिया गया। इसकी पूरी जांच की जा रही है।
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डाक्टरों का भी लगा था कैंप
आयरन की गोली बांटने से कुछ दिन पहले चीफ मेडिकल आफिसर की देखरेख में मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया था। सरपंच सुभाष चंद्र के अनुसार इस कैंप में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. भी मौजूद थे। उन्हाेंने भी बच्चों को पीने की दवाई दी थी। यह दवाई उन्हीं बच्चों को दी गई, जिनके साथ अभिभावक थे। दवाइयाें की एक्सपायरी भी 2015 तक है। इसलिए कहीं न कहीं लापरवाही हुई है।
एक्सपायरी डेट की भी मिली दवाई
कोटली में आयोजित मेडिकल कैंप में भी बच्चों को पीने वाली दवाई देने का दावा सरपंच और परिवार के सदस्य कर रहे हैं। दवाई एक्सपायरी है। जुलाई 2012 में बनी इस दवाई की एक्सपायरी डेट जून 2014 है। उस पर नॉट फार सेल और फिजिशियन सैंपल भी लिखा है। पीने वाली इस दवाई की शीशी भी राहुल शर्मा के घर से मिली है।
इस संबंध में उसके चाचा गणेश ने बताया कि एक्सपायरी तारीख की इस शीशी के बारे में उन्हें पूरी तरह से पता नहीं है। दवाई शायद मेडिकल कैंप में दी गई होगी। कैंप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद थे। गांव के सरपंच सुभाष चंद्र के अनुसार कैंप में सभी डाक्टर थे।
हर बच्चे के अभिभावकों को बुलाकर पीने वाली दवाई दी गई है। दवाई सर्दी जुकाम के लिए है। इस दवाई से बच्चों को कुछ असर हुआ हो, इसकी संभावना नहीं है। क्योंकि डाक्टरों ने पूरा मेडिकल चेकअप कर ही इसे दिया था। इसलिए गड़बड़ी की संभावना नहीं है। अगर एक्सपायरी तारीख की दवाई पी गई है, तो स्कूल में ही क्यों उल्टियां हुईं।
शिवानी के पास ऐसी कोई पीने वाली दवाई नहीं मिली। फिर उसकी हालत क्यों बिगड़ी। उसकी मौत क्यों हुई? चीफ मेडिकल आफिसर डॉ. चंद्र प्रकाश और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अनुसार एक्सपायरी तारीख की दवाइयां किसी कीमत पर भी नहीं दी जा सकती हैं। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी पूरी जांच की जाएगी।