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ज्ञानी पुरूष पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी होते रहेंगे--संत सुभाष शास्त्री
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उधमपुर के रठियान में आयोजित कथा में प्रो. शिव निर्मोही को सम्मानित करते संत सुभाष शास्त्री
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। नगर के साथ लगते रठियान पंचायत के खरूनी गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। शनिवार को पद्मश्री प्रो. शिव निर्मोही को मुख्य रूप से आमंत्रित किया गया था। जिन्हें कला संस्कृति व साहित्य जगत में विशेष योगदान देने के लिए कथावाचक सुभाष शास्त्री ने सम्मानित किया।
कथा की शुरूआत में कथावाचक ने बताया कि संसार में मनुष्य के लिए सबसे बड़ी कल्याण प्राप्ति यही है कि उसका चित्त तीव्र भक्ति योग से प्रभु में लगकर स्थिर हो जाए। बुराई छोड़ने का लाभ है। लेकिन, जो महापुरुषों के कहने पर तुरंत बुराई का त्याग और अच्छाई का ग्रहण कर लेते हैं, वह बहुत बडे़ लाभ को प्राप्त कर लेते हैं। यदि तुम्हें सबके स्वामी अंतर्यामी प्रभु का ध्यान-भजन करना है तो सद्गुरु की शरण में जाकर ज्ञानोपदेश तथा उनका आशीर्वाद लेकर अभी से भजन शुरू कर दें। आखिर फिर कब समय मिलेगा? काल की गति विचित्र है। जो कभी हरे भरे वृक्ष थे, वे अब सूखे हो गए। जलाने के लिए ईंधन बन गए। अत: समय मत गंवाओ।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी पुरुष पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी होते रहेंगे। मुनि वशिष्ठ, महाराज जनक, आदि बहुत से ऋषि, ब्रह्मऋषि एवं राजर्षि ब्रह्मज्ञानी थे। श्री गुरू नानक, कबीर, रैदास, आदि ब्रह्मज्ञानी हैं। और, यदि आप ब्रह्म बोध प्राप्त करलें तो आगे आप भी ब्रह्मज्ञानी हो सकते हैं। ब्रह्म तो आप अब भी हैं। ब्रह्म तो सभी हैं। सिर्फ, ज्ञान होना ही शेष है। ब्रह्मज्ञान हो जाए तो आप ब्रह्मज्ञानी या ‘ब्रह्म ज्ञान’ स्वरूप ही हैं। अप्प दीयो भव:, अर्थात् आप स्वयं दीपक होकर प्रकाश फैलाओ। इस स्थिति को प्राप्त करने की पहली सीढ़ी है प्रभु चरणों से प्रीति।
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कथा की शुरूआत में कथावाचक ने बताया कि संसार में मनुष्य के लिए सबसे बड़ी कल्याण प्राप्ति यही है कि उसका चित्त तीव्र भक्ति योग से प्रभु में लगकर स्थिर हो जाए। बुराई छोड़ने का लाभ है। लेकिन, जो महापुरुषों के कहने पर तुरंत बुराई का त्याग और अच्छाई का ग्रहण कर लेते हैं, वह बहुत बडे़ लाभ को प्राप्त कर लेते हैं। यदि तुम्हें सबके स्वामी अंतर्यामी प्रभु का ध्यान-भजन करना है तो सद्गुरु की शरण में जाकर ज्ञानोपदेश तथा उनका आशीर्वाद लेकर अभी से भजन शुरू कर दें। आखिर फिर कब समय मिलेगा? काल की गति विचित्र है। जो कभी हरे भरे वृक्ष थे, वे अब सूखे हो गए। जलाने के लिए ईंधन बन गए। अत: समय मत गंवाओ।
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उन्होंने कहा कि ज्ञानी पुरुष पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी होते रहेंगे। मुनि वशिष्ठ, महाराज जनक, आदि बहुत से ऋषि, ब्रह्मऋषि एवं राजर्षि ब्रह्मज्ञानी थे। श्री गुरू नानक, कबीर, रैदास, आदि ब्रह्मज्ञानी हैं। और, यदि आप ब्रह्म बोध प्राप्त करलें तो आगे आप भी ब्रह्मज्ञानी हो सकते हैं। ब्रह्म तो आप अब भी हैं। ब्रह्म तो सभी हैं। सिर्फ, ज्ञान होना ही शेष है। ब्रह्मज्ञान हो जाए तो आप ब्रह्मज्ञानी या ‘ब्रह्म ज्ञान’ स्वरूप ही हैं। अप्प दीयो भव:, अर्थात् आप स्वयं दीपक होकर प्रकाश फैलाओ। इस स्थिति को प्राप्त करने की पहली सीढ़ी है प्रभु चरणों से प्रीति।
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