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सत्संग सुनने से प्रशस्त होगा सत्य का मार्ग : महात्मा
Sat, 31 May 2025 01:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Sat, 31 May 2025 01:22 AM IST
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उधमपुर में बिलन बावली में आयोजित सद्भावना सत्संग में प्रवचन करते महात्मा।
संशय समाप्त करने के लिए सत्संग में आना जरूरी
मानव उत्थान सेवा समिति का सद्भावना सत्संग समारोह
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार को बिलन बावली क्षेत्र में सद्भावना सत्संग समारोह आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने बताया कि सत्संग सुनने से सभी संशय समाप्त होते हैं और सत्य का मार्ग प्रशस्त होता है।
सद्गुरुदेव सतपाल महाराज की वरिष्ठ शिष्या एवं मां राजराजेश्वरी और आश्रम प्रभारी महात्मा समा बाई ने श्रद्धालुओं को अपने सारगर्भित प्रवचनों में समझाया कि मनुष्य जन्म क्षणभंगुर है। जीवन में सत्संग की प्राप्ति बड़े भाग्य से होती है।
संत कबीर के दोहे का उदाहरण देते हुए बाईजी ने कहा-राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय। जो सुख साधु संग में, सो बैकुंठ न होय। अर्थात सच्चा आत्मिक सुख-आनंद तो संतों के संग से ही मिलेगा। उनका कहना था कि ध्यान से मन को एकाग्र करने से ही भगवद् प्राप्ति होती है।
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महात्मा त्रिपुरा बाई एवं संयमी बाई ने आत्मानुभवी विचारों में कहा कि घोर कलियुग में नसीब वालों को ही सत्संग की प्राप्ति होती है। सत्संग में बैठने से मन की खटपट समाप्त होकर आनंद की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पेट की भूख मिटाने के लिए आप भोजन करते हो। उसी प्रकार आत्मा की शांति के लिए आपको आत्मज्ञानी संतों की शरणागत होना पड़ेगा, तभी कल्याण होगा। इस अवसर पर हेडमास्टर बिशन दास, मोहन लाल, कैप्टन एनआर कुडियाल, यशपाल, तरसेम राज, गोपाल सिंह, पूर्ण चंद, जगदेव चंद आदि मौजूद थे।
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मानव उत्थान सेवा समिति का सद्भावना सत्संग समारोह
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार को बिलन बावली क्षेत्र में सद्भावना सत्संग समारोह आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने बताया कि सत्संग सुनने से सभी संशय समाप्त होते हैं और सत्य का मार्ग प्रशस्त होता है।
सद्गुरुदेव सतपाल महाराज की वरिष्ठ शिष्या एवं मां राजराजेश्वरी और आश्रम प्रभारी महात्मा समा बाई ने श्रद्धालुओं को अपने सारगर्भित प्रवचनों में समझाया कि मनुष्य जन्म क्षणभंगुर है। जीवन में सत्संग की प्राप्ति बड़े भाग्य से होती है।
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संत कबीर के दोहे का उदाहरण देते हुए बाईजी ने कहा-राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय। जो सुख साधु संग में, सो बैकुंठ न होय। अर्थात सच्चा आत्मिक सुख-आनंद तो संतों के संग से ही मिलेगा। उनका कहना था कि ध्यान से मन को एकाग्र करने से ही भगवद् प्राप्ति होती है।
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महात्मा त्रिपुरा बाई एवं संयमी बाई ने आत्मानुभवी विचारों में कहा कि घोर कलियुग में नसीब वालों को ही सत्संग की प्राप्ति होती है। सत्संग में बैठने से मन की खटपट समाप्त होकर आनंद की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पेट की भूख मिटाने के लिए आप भोजन करते हो। उसी प्रकार आत्मा की शांति के लिए आपको आत्मज्ञानी संतों की शरणागत होना पड़ेगा, तभी कल्याण होगा। इस अवसर पर हेडमास्टर बिशन दास, मोहन लाल, कैप्टन एनआर कुडियाल, यशपाल, तरसेम राज, गोपाल सिंह, पूर्ण चंद, जगदेव चंद आदि मौजूद थे।