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अस्थायी कर्मियों ने किया थालियां बजाकर प्रदर्शन, बोले- बेटियों की शादी की है चिंता
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उधमपुर: पीएचई अस्थाई कर्मचारियों द्वारा थालिया बजाकर प्रदर्शन किया गया.
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चल रहे जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने वीरवार को थालियां बजाकर रोष रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। बाद में स्थायी नियुक्ति देने सहित अन्य लंबित मांगों का एलजी प्रशासन के नाम एक ज्ञापन डीसी कार्यालय में सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बेटियों की शादी की चिंता सता रही है।
प्रदर्शनकारी नगर के बाडेयां स्थित विभाग के वाटर प्वाइंट में एकत्रित हुए और थालियां बजाते हुए डीसी कार्यालय तक रोष रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन के साथ ही एलजी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभाग के सैकड़ों अस्थायी कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 80 दिन से हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। 25-25 सालों तक विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई साथी स्थायी नियुक्ति की आस लगाकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, और बहुत से सेवानिवृत्त होने के करीब हैं। सरकार अब भी न तो उनके लिए नियमितीकरण की योजना बना रही है और न ही उन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 72 महीनों का बकाया वेतन भी जारी नहीं किया जा रहा है। इसके कारण अस्थायी कर्मचारी भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। इसलिए, अब कर्मचारियों ने ठाना है कि सरकार या तो उन्हें स्थायी करे, या नौकरी से बर्खास्त कर दे।
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मेरे सेवानिवृत्त होने में दो साल बचे हैं। विभाग में अस्थायी सेवा देते हुए सारी उम्र निकल गई। सेवाकाल का अधिकतर समय स्थायी नियुक्ति के लिए संघर्ष करने में बीत गया। कभी जमीन बेचकर गुजारा किया तो कभी उधार लेकर काम चलाया। अब सरकार को अपने अड़ियल रवैये में बदलाव लाने की जरूरत है।
- जियाफत शाह निवासी फरोल, रामनगर
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लगभग 23 साल पहले विभाग में अस्थायी तौर पर तैनात हुआ था। आज भी वही स्थिति है। बेटियां शादी लायक हो गई हैं, लेकिन पैसों की तंगी आड़े आ रही है। विभाग से कई बार मदद की गुहार लगाई है, लेकिन उसे भी ठुकरा दिया गया। नाममात्र की इस सरकारी नौकरी में जिंदगी बर्बाद हो गई। कम से कम अब तो सरकार परेशानियां समझे।
- भूचाल सिंह निवासी बलांध, उधमपुर
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सारी उम्र विभाग में गुजारने के बाद पछतावा हो रहा है कि काश इस नौकरी की बजाय कुछ और काम किया होता। स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद खुशहाल जिंदगी जीने के सारे सपने चूर हो चुके हैं। आज कल तो घर चलाना भी मुश्किल है। उधार लेकर बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाया है। अब बेटियों की शादी की चिंता सता रही है।
- प्रताप सिंह निवासी काल्डी, सुलगार
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प्रदर्शनकारी नगर के बाडेयां स्थित विभाग के वाटर प्वाइंट में एकत्रित हुए और थालियां बजाते हुए डीसी कार्यालय तक रोष रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन के साथ ही एलजी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभाग के सैकड़ों अस्थायी कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 80 दिन से हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। 25-25 सालों तक विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि कई साथी स्थायी नियुक्ति की आस लगाकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, और बहुत से सेवानिवृत्त होने के करीब हैं। सरकार अब भी न तो उनके लिए नियमितीकरण की योजना बना रही है और न ही उन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 72 महीनों का बकाया वेतन भी जारी नहीं किया जा रहा है। इसके कारण अस्थायी कर्मचारी भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। इसलिए, अब कर्मचारियों ने ठाना है कि सरकार या तो उन्हें स्थायी करे, या नौकरी से बर्खास्त कर दे।
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मेरे सेवानिवृत्त होने में दो साल बचे हैं। विभाग में अस्थायी सेवा देते हुए सारी उम्र निकल गई। सेवाकाल का अधिकतर समय स्थायी नियुक्ति के लिए संघर्ष करने में बीत गया। कभी जमीन बेचकर गुजारा किया तो कभी उधार लेकर काम चलाया। अब सरकार को अपने अड़ियल रवैये में बदलाव लाने की जरूरत है।
- जियाफत शाह निवासी फरोल, रामनगर
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लगभग 23 साल पहले विभाग में अस्थायी तौर पर तैनात हुआ था। आज भी वही स्थिति है। बेटियां शादी लायक हो गई हैं, लेकिन पैसों की तंगी आड़े आ रही है। विभाग से कई बार मदद की गुहार लगाई है, लेकिन उसे भी ठुकरा दिया गया। नाममात्र की इस सरकारी नौकरी में जिंदगी बर्बाद हो गई। कम से कम अब तो सरकार परेशानियां समझे।
- भूचाल सिंह निवासी बलांध, उधमपुर
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सारी उम्र विभाग में गुजारने के बाद पछतावा हो रहा है कि काश इस नौकरी की बजाय कुछ और काम किया होता। स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद खुशहाल जिंदगी जीने के सारे सपने चूर हो चुके हैं। आज कल तो घर चलाना भी मुश्किल है। उधार लेकर बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाया है। अब बेटियों की शादी की चिंता सता रही है।
- प्रताप सिंह निवासी काल्डी, सुलगार