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Udhampur News: दूसरे दिन भी सांकरी मेला में सैकड़ों श्रद्धलु पहुंचे
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उधमपुर। पंचैरी के सांकरी देवता मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते स्थानीय कलाकार: सोशल
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। पंचैरी के मीर में मंगलवार को शुरू हुए तीन दिवसीय बाबा सांकरी देवता मेले में दूसरे दिन भी काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर चिनैनी विधानसभा के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मेले में दूसरे दिन कई सांस्कृतिक व खेल गतिविधियां भी आयोजित हुईं जिनका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। मेले में पहुंचे लोगों ने सबसे पहले बाबा सांकरी देव स्थान में शीश नवाकर परिवार और समाज की सुख शांति की प्रार्थना की। इसके बाद बाहर मेले की गतिविधियों का आनंद उठाया और फिर खाने पीने की वस्तुओं व अन्य सामानों के स्टालों पर पहुंचकर खरीददारी की। मेले को लेकर प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के अलावा अन्य सभी जरूरी प्रबंध किए गए हैं। वीरवार को इसका समापन होगा।
पुजारी कृष्ण सिंह ने बताया कि मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और इसमें स्थापित शिव परिवार की मृर्ति स्वयंभू हैं जो 8वीं से 9वीं शताब्दी के दौरान स्थानीय सिद्ध पुरुष बाबा सांकरी महाराज को जमीन के भीतर गढ़ी हुई मिली थी। बाबा सांकरी को हर रात सपने में शिव परिवार की यह मूर्ति दर्शन देती थी और एक दिन स्वयं शिवजी ने बाबा सांकरी को स्वप्न में दर्शन देकर इस मूर्ति को बाहर निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया था।
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उधमपुर। पंचैरी के मीर में मंगलवार को शुरू हुए तीन दिवसीय बाबा सांकरी देवता मेले में दूसरे दिन भी काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर चिनैनी विधानसभा के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मेले में दूसरे दिन कई सांस्कृतिक व खेल गतिविधियां भी आयोजित हुईं जिनका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। मेले में पहुंचे लोगों ने सबसे पहले बाबा सांकरी देव स्थान में शीश नवाकर परिवार और समाज की सुख शांति की प्रार्थना की। इसके बाद बाहर मेले की गतिविधियों का आनंद उठाया और फिर खाने पीने की वस्तुओं व अन्य सामानों के स्टालों पर पहुंचकर खरीददारी की। मेले को लेकर प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के अलावा अन्य सभी जरूरी प्रबंध किए गए हैं। वीरवार को इसका समापन होगा।
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पुजारी कृष्ण सिंह ने बताया कि मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और इसमें स्थापित शिव परिवार की मृर्ति स्वयंभू हैं जो 8वीं से 9वीं शताब्दी के दौरान स्थानीय सिद्ध पुरुष बाबा सांकरी महाराज को जमीन के भीतर गढ़ी हुई मिली थी। बाबा सांकरी को हर रात सपने में शिव परिवार की यह मूर्ति दर्शन देती थी और एक दिन स्वयं शिवजी ने बाबा सांकरी को स्वप्न में दर्शन देकर इस मूर्ति को बाहर निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया था।
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