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Udhampur News: बदइंतजामी के पांच पत्थरों पर टिकी जिंदगी... कघोट गांव के पास बस हादसे में 22 मौतों के बाद भी नहीं लगाए क्रैश बैरियर
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रामनगर। रामनगर-उधमपुर मुख्य मार्ग पर कघोट के पास एक महीने पहले बस हादसे में 22 यात्रियों की मौत हो गई थी। जिम्मेदारों ने हादसे से सबक लेने के बजाय खाई में वाहन जाने से रोकने के लिए पांच पत्थर लगा दिए। लोक निर्माण विभाग की उदासीनता के कारण फिर कीमती जिंदगियां दांव पर हैं।
क्रैश बैरियर लगाने के बजाय सड़क सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। महीने पहले हुए हादसे से न केवल दर्जनों परिवारों को उम्र भर का रोना मिला बल्कि सड़क सुरक्षा दावों की पोल भी खोली थी।
विभाग के लापरवाह रवैये को लेकर आमजन से लेकर सामाजिक संगठनों में भारी रोष और नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि यदि विभाग ने समय रहते बेहद खतरनाक मोड़ पर मजबूत क्रैश बैरियर लगाए होते तो न सिर्फ भीषण बस दुर्घटना को टाला जा सकता था बल्कि जानमाल के नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
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20 अप्रैल की सुबह अनियंत्रित बस गहरी खाई में गिरी थी। हादसे में 22 यात्रियों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 61 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे की भयावहता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ित परिवारों के घर जाकर संवेदनाएं व्यक्त की थीं और सुरक्षा के बड़े दावे किए थे।
जमीनी हकीकत यह है कि दौरों और बयानों के बाद भी क्रैश बैरियर लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन और विभाग की ओर से केवल औपचारिकता निभाते हुए दुर्घटनास्थल पर सुरक्षा के नाम पर पांच बड़े पत्थर रखवा दिए गए।
लंबे समय से ब्लैक स्पॉट बना मोड़
रामनगर विकास काउंसिल के प्रधान संजीव जंडियाल सहित वरिष्ठ सदस्यों ने प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर एतराज जताया है। प्रधान संजीव जंडियाल का कहना है कि कघोट के पास यह मोड़ लंबे समय से ब्लैक स्पॉट बना है और लगातार हादसे का कारण बन रहा है। इसके बावजूद विभाग की ओर से स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। अब इतने बड़े हादसे के बाद भी सिर्फ पांच पत्थर लगाकर जिम्मेदारी पूरी की जा रही है जो बेहद निंदनीय है।
कीमती जिंदगियों के साथ हो रहा खिलवाड़
उप प्रधान विकास मोदी और अन्य सदस्यों विनय जंडियाल, प्रतीक डोगरा और गणेश दास ने कहा कि इतने संवेदनशील मोड़ पर पत्थर लगाना तकनीकी रूप से सही समाधान नहीं है। मनोज लैहडा के अनुसार यदि समय रहते क्रैश बैरियर लगे होते तो इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। हादसे के बाद की जा रही प्रशासनिक खानापूर्ति कीमती जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है। राकेश गुप्ता ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे और क्षेत्र के लोग अक्सर इसी सड़क से उधमपुर के लिए जाते हैं। खतरनाक मोड़ को पार करते समय हमेशा डर और हादसे की आशंका रहती है। प्रशासन को जल्द स्थायी सुरक्षा प्रबंध करने चाहिए।
लोगों की प्रमुख मांगें
कघोट मोड़ पर मजबूत और टिकाऊ क्रैश बैरियर स्थापित किए जाएं। वाहन चालकों की सतर्कता के लिए मोड़ से ठीक पहले बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे संवेदनशील मोड़ पर आधुनिक स्ट्रीट लाइट या प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो। मार्ग के पूरे हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा का स्थायी समाधान निकाला जाए। लोगों की जान को जोखिम में डालने वाले और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कघोट मोड़ पर बिना देरी के स्थायी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि भविष्य में मार्ग पर किसी की जान न जाए।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग के अधिकारियों से पूछा जाएगा कि अब तक स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू क्यों नहीं किया गया? हादसे की जगह पर जल्द क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
- सतीश कुमार, तहसीलदार, रामनगर
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क्रैश बैरियर लगाने के बजाय सड़क सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। महीने पहले हुए हादसे से न केवल दर्जनों परिवारों को उम्र भर का रोना मिला बल्कि सड़क सुरक्षा दावों की पोल भी खोली थी।
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विभाग के लापरवाह रवैये को लेकर आमजन से लेकर सामाजिक संगठनों में भारी रोष और नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि यदि विभाग ने समय रहते बेहद खतरनाक मोड़ पर मजबूत क्रैश बैरियर लगाए होते तो न सिर्फ भीषण बस दुर्घटना को टाला जा सकता था बल्कि जानमाल के नुकसान के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
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20 अप्रैल की सुबह अनियंत्रित बस गहरी खाई में गिरी थी। हादसे में 22 यात्रियों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 61 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे की भयावहता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ित परिवारों के घर जाकर संवेदनाएं व्यक्त की थीं और सुरक्षा के बड़े दावे किए थे।
जमीनी हकीकत यह है कि दौरों और बयानों के बाद भी क्रैश बैरियर लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन और विभाग की ओर से केवल औपचारिकता निभाते हुए दुर्घटनास्थल पर सुरक्षा के नाम पर पांच बड़े पत्थर रखवा दिए गए।
लंबे समय से ब्लैक स्पॉट बना मोड़
रामनगर विकास काउंसिल के प्रधान संजीव जंडियाल सहित वरिष्ठ सदस्यों ने प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर एतराज जताया है। प्रधान संजीव जंडियाल का कहना है कि कघोट के पास यह मोड़ लंबे समय से ब्लैक स्पॉट बना है और लगातार हादसे का कारण बन रहा है। इसके बावजूद विभाग की ओर से स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। अब इतने बड़े हादसे के बाद भी सिर्फ पांच पत्थर लगाकर जिम्मेदारी पूरी की जा रही है जो बेहद निंदनीय है।
कीमती जिंदगियों के साथ हो रहा खिलवाड़
उप प्रधान विकास मोदी और अन्य सदस्यों विनय जंडियाल, प्रतीक डोगरा और गणेश दास ने कहा कि इतने संवेदनशील मोड़ पर पत्थर लगाना तकनीकी रूप से सही समाधान नहीं है। मनोज लैहडा के अनुसार यदि समय रहते क्रैश बैरियर लगे होते तो इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। हादसे के बाद की जा रही प्रशासनिक खानापूर्ति कीमती जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है। राकेश गुप्ता ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे और क्षेत्र के लोग अक्सर इसी सड़क से उधमपुर के लिए जाते हैं। खतरनाक मोड़ को पार करते समय हमेशा डर और हादसे की आशंका रहती है। प्रशासन को जल्द स्थायी सुरक्षा प्रबंध करने चाहिए।
लोगों की प्रमुख मांगें
कघोट मोड़ पर मजबूत और टिकाऊ क्रैश बैरियर स्थापित किए जाएं। वाहन चालकों की सतर्कता के लिए मोड़ से ठीक पहले बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूरे संवेदनशील मोड़ पर आधुनिक स्ट्रीट लाइट या प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो। मार्ग के पूरे हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा का स्थायी समाधान निकाला जाए। लोगों की जान को जोखिम में डालने वाले और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कघोट मोड़ पर बिना देरी के स्थायी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि भविष्य में मार्ग पर किसी की जान न जाए।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग के अधिकारियों से पूछा जाएगा कि अब तक स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू क्यों नहीं किया गया? हादसे की जगह पर जल्द क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
- सतीश कुमार, तहसीलदार, रामनगर