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बसें चलने की उम्मीद से बस स्टैंड पहुंचे लोग, लेकिन निराश लौटना पड़ा
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उधमपुर। यात्री वाहनों में 50 प्रतिशत यात्रियों को बिठाने के आदेश के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन निजी यात्री वाहनों की आवाजाही को बंद रखा, जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को वाहन चलने की उम्मीद से यात्री बस अड्डा पर पहुंचे, लेकिन बसें न चलने पर निराश होकर लौट गए। वहीं ट्रांसपोर्ट यूनियन के सदस्यों का कहना है कि जब तक किराए में बढ़ोतरी का आदेश जारी नहीं किया जाता है, तब तक यात्री वाहन बंद रहेंगे।
सरकार ने कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए आदेश दिए हैं कि यात्री वाहन केवल 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ ही चलेंगे, लेकिन ट्रांसपोर्टर इस आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। इसी को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने बुधवार को यात्री वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया था। वहीं इसके बाद सरकार ने किराए में बढ़ोतरी को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है और अब यह हड़ताल लगातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को हड़ताल का तीसरा दिन था। शहर व ग्रामीण इलाकों में बस व मटाडोर की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखी गई। यात्री वाहन न चलने के कारण ग्रामीण इलाकों से चंद व्यक्ति ही निजी वाहन लेकर शहर पहुंच सके। सुबह से शाम तक सैला तालाब मेटाडोर स्टैंड और टाउन हाल मेटाडोर स्टैंड वीरान नजर आया। यात्री पहुंचे, लेकिन वाहन न चलने पर निराश होकर लौट गए। कुछ ऐसे ही हालात बस अड्डा पर भी रहे। कई यात्री बस अड्डा पर बसों के चलने का इंतजार करते रहे, लेकिन शाम तक कोई बस नहीं चली। बस अड्डा दिन भर बसों से भरा रहा, लेकिन कोई बस नहीं चली। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ बस व मेटाडोर चलाना किसी तरह से भी संभव नहीं है। इससे तो बस का खर्च भी नहीं निकल सकेगा। इससे तो केवल नुकसान ही होना है। नुकसान उठाने से तो अच्छा है कि वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया जाए।
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सरकार ने कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए आदेश दिए हैं कि यात्री वाहन केवल 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ ही चलेंगे, लेकिन ट्रांसपोर्टर इस आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। इसी को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने बुधवार को यात्री वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया था। वहीं इसके बाद सरकार ने किराए में बढ़ोतरी को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है और अब यह हड़ताल लगातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को हड़ताल का तीसरा दिन था। शहर व ग्रामीण इलाकों में बस व मटाडोर की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखी गई। यात्री वाहन न चलने के कारण ग्रामीण इलाकों से चंद व्यक्ति ही निजी वाहन लेकर शहर पहुंच सके। सुबह से शाम तक सैला तालाब मेटाडोर स्टैंड और टाउन हाल मेटाडोर स्टैंड वीरान नजर आया। यात्री पहुंचे, लेकिन वाहन न चलने पर निराश होकर लौट गए। कुछ ऐसे ही हालात बस अड्डा पर भी रहे। कई यात्री बस अड्डा पर बसों के चलने का इंतजार करते रहे, लेकिन शाम तक कोई बस नहीं चली। बस अड्डा दिन भर बसों से भरा रहा, लेकिन कोई बस नहीं चली। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ बस व मेटाडोर चलाना किसी तरह से भी संभव नहीं है। इससे तो बस का खर्च भी नहीं निकल सकेगा। इससे तो केवल नुकसान ही होना है। नुकसान उठाने से तो अच्छा है कि वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया जाए।
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