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Udhampur News: एक महीने से बिना मुखिया के चल रहा गवर्नमेंट मेडिकल कालेज उधमपुर
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उधमपुर। गवर्नमेंट मेडिकल कालेज में कक्षा में शामिल एमबीबीएस के छात्र।
- फोटो : udhampur news
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उधमपुर। गवर्नमेंट मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के दूसरे बैच का संचालन शुरू हो गया है। बावजूद इसके न ही कालेज परिसर का बुनियादी ढांचा तैयार हो पाया है और न हीं पर्याप्त मात्रा में सभी विभाग के प्रोफेसर्स की तैनाती की गई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक माह से कालेज में प्रिंसिपल का पद भी खाली पड़ा हुआ है। इसका सीधा असर छात्रों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
जिला उधमपुर के बैली गांव में लगभग 255 करोड़ की परियोजना से तैयार होने वाले गवर्नमेंट मेडिकल कालेज का निर्माण कार्य अब जून 2025 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 मेें केंद्र सरकार की ओर से जिला उधमपुर के लिए मंजूर किए गए मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए बैली गांव में 214 कनाल भूमि का चयन किया गया। जोकि जिला मुख्यालय से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के चलते निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ पाया। कालेज परिसर में शैक्षणिक ब्लॉक, प्रशासनिक ब्लॉक, प्रयोगशाला, ऑडिटोरियम सहित डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए रिहायशी ब्लॉक और छात्रों के लिए हॉस्टल का भी निर्माण किया जा रहा। शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों से जोड़े रखने के लिए खेल मैदान के साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
मौजूदा समय में चल रहे एमबीबीएस के दो बैच
निर्माण कार्य में देरी के कारण एमबीबीएस के लगभग 100 छात्रों का पहला बैच 2023 में जिला अस्पताल जोकि मौजूदा समय में एसोसिएट जीएमसी के रूप में संचालित है के परिसर में नव निर्मित ब्लॉक परिसर में शुरू किया गया था। हाल ही में पिछले वर्ष अक्तूबर माह में दूसरा बैच भी शुरू कर दिया गया है। इसमें 100 के करीब छात्रों ने एडमिशन ली है जिनमें 85 प्रतिशत छात्र राज्य से हैं जबकि 15 प्रतिशत छात्र ऑल इंडिया कोटा से यहां पढ़ने आए हैं। मौजूदा समय में लगभग 200 के करीब प्रशिक्षु डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे हैं।
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किराए की इमारतों में बनाए गए छात्रावास
जीएमसी अस्पताल परिसर के साथ नवनिर्मित इमारत में मौजूदा समय में कक्षाओं, प्रशासनिक ब्लॉक एवं प्रयोगशाला का संचालन एक ही इमारत में किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं के होस्टल के लिए किराए पर इमारतें ली गई हैं। इनमें लड़के और लड़कियों के रहने के लिए अलग से व्यवस्था है। बैली गांव में परियोजना के पूरे होने पर ही मेडिकल कालेज सभी सुविधाओं के साथ संपूर्ण रूप से संचालित हो पाएगा।
31 दिसंबर को प्रिंसिपल हुए थे सेवानिवृत्त
बताते चलें कि 31 दिसंबर 2024 को कालेज प्रिंसिपल मृत्युंजय गुप्ता के रिटायर्ड होने के बाद से किसी की भी तैनाती नहीं की गई और न ही किसी को प्रिंसिपल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इसके अलावा कालेज में 24 विभाग प्रमुख के पद में से 20 प्रोफेसर के पद भी खाली पड़े हुए हैं। इनके स्थान पर एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर अतिरिक्त सेवाएं प्रदान कर प्रशिक्षुओं को डॉक्टर की तैयारी करवा रहे हैं। जिससे उन पर भी काम का अतिरिक्त बोझ उत्पन्न हो रहा है क्योंकि वह कालेज में बच्चों को शिक्षित करने से साथ-साथ जीएमसी अस्पताल में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इससे डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे मेडिकल छात्रों की शिक्षा पर भी असर पड़ सकता है और भविष्य में चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो सकती है।
जीएमसी में फैकल्टी की स्थिति:
पोस्ट - मंजूर - नियुक्ति - रिक्त
प्रिंसिपल - 1 - 0 - 0
प्रोफेसर - 24 - 4 - 20
एसोसिएट प्रोफेसर - 34 - 3 - 31
असिस्टेंट प्रोफेसर- 52 - 35 - 17
एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर पर अतिरिक्त कार्यभार
सूत्रों के मुताबिक खाली पड़े विभागों में शैक्षणिक व्यवस्था के तहत लगाए 81 एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की तैनाती की गई है। जिन्हें तीन वर्ष के लिए एडहॉक बेसिस पर नियुक्ति किया जाता है और अनुभव के आधार पर पदोन्नति भी मिलती है। विभाग प्रमुख की अनुपस्थिति में यही मेडिकल कालेज के छात्रों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। हालांकि मेडिकल कालेज के छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए जीएमसी अस्पताल में भी लगाया जाता है और प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं, लेकिन शैक्षणिक स्टाफ की कमी और अस्थायी तौर पर होने वाली तैनाती के कारण कहीं न मेडिकल कालेज के छात्रों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
कोट
मेडिकल कालेज में छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए एकेडमिक अरेंजमेंट के तहत प्रोफेसरों की तैनाती की जाती है। जो विभाग प्रमुख के पद खाली है, उन्हें भी भरने के प्रयास किए जा रहे हैं। रही बात प्रिंसिपल की तैनाती को लेकर जल्द ही मामले का संज्ञान लिया जाएगा।
- सकीना इट्टू, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री, जम्मू-कश्मीर।
मेडिकल कालेज परिसर का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के कगार पर है और उम्मीद है कि जून 2025 तक निर्माण कार्य पूरा कर जीएमसी प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
- सलोनी राय, डीसी उधमपुर।
फोटो सहित
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जिला उधमपुर के बैली गांव में लगभग 255 करोड़ की परियोजना से तैयार होने वाले गवर्नमेंट मेडिकल कालेज का निर्माण कार्य अब जून 2025 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 मेें केंद्र सरकार की ओर से जिला उधमपुर के लिए मंजूर किए गए मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए बैली गांव में 214 कनाल भूमि का चयन किया गया। जोकि जिला मुख्यालय से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के चलते निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ पाया। कालेज परिसर में शैक्षणिक ब्लॉक, प्रशासनिक ब्लॉक, प्रयोगशाला, ऑडिटोरियम सहित डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए रिहायशी ब्लॉक और छात्रों के लिए हॉस्टल का भी निर्माण किया जा रहा। शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों से जोड़े रखने के लिए खेल मैदान के साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
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मौजूदा समय में चल रहे एमबीबीएस के दो बैच
निर्माण कार्य में देरी के कारण एमबीबीएस के लगभग 100 छात्रों का पहला बैच 2023 में जिला अस्पताल जोकि मौजूदा समय में एसोसिएट जीएमसी के रूप में संचालित है के परिसर में नव निर्मित ब्लॉक परिसर में शुरू किया गया था। हाल ही में पिछले वर्ष अक्तूबर माह में दूसरा बैच भी शुरू कर दिया गया है। इसमें 100 के करीब छात्रों ने एडमिशन ली है जिनमें 85 प्रतिशत छात्र राज्य से हैं जबकि 15 प्रतिशत छात्र ऑल इंडिया कोटा से यहां पढ़ने आए हैं। मौजूदा समय में लगभग 200 के करीब प्रशिक्षु डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे हैं।
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किराए की इमारतों में बनाए गए छात्रावास
जीएमसी अस्पताल परिसर के साथ नवनिर्मित इमारत में मौजूदा समय में कक्षाओं, प्रशासनिक ब्लॉक एवं प्रयोगशाला का संचालन एक ही इमारत में किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं के होस्टल के लिए किराए पर इमारतें ली गई हैं। इनमें लड़के और लड़कियों के रहने के लिए अलग से व्यवस्था है। बैली गांव में परियोजना के पूरे होने पर ही मेडिकल कालेज सभी सुविधाओं के साथ संपूर्ण रूप से संचालित हो पाएगा।
31 दिसंबर को प्रिंसिपल हुए थे सेवानिवृत्त
बताते चलें कि 31 दिसंबर 2024 को कालेज प्रिंसिपल मृत्युंजय गुप्ता के रिटायर्ड होने के बाद से किसी की भी तैनाती नहीं की गई और न ही किसी को प्रिंसिपल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इसके अलावा कालेज में 24 विभाग प्रमुख के पद में से 20 प्रोफेसर के पद भी खाली पड़े हुए हैं। इनके स्थान पर एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर अतिरिक्त सेवाएं प्रदान कर प्रशिक्षुओं को डॉक्टर की तैयारी करवा रहे हैं। जिससे उन पर भी काम का अतिरिक्त बोझ उत्पन्न हो रहा है क्योंकि वह कालेज में बच्चों को शिक्षित करने से साथ-साथ जीएमसी अस्पताल में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इससे डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे मेडिकल छात्रों की शिक्षा पर भी असर पड़ सकता है और भविष्य में चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो सकती है।
जीएमसी में फैकल्टी की स्थिति:
पोस्ट - मंजूर - नियुक्ति - रिक्त
प्रिंसिपल - 1 - 0 - 0
प्रोफेसर - 24 - 4 - 20
एसोसिएट प्रोफेसर - 34 - 3 - 31
असिस्टेंट प्रोफेसर- 52 - 35 - 17
एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर पर अतिरिक्त कार्यभार
सूत्रों के मुताबिक खाली पड़े विभागों में शैक्षणिक व्यवस्था के तहत लगाए 81 एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की तैनाती की गई है। जिन्हें तीन वर्ष के लिए एडहॉक बेसिस पर नियुक्ति किया जाता है और अनुभव के आधार पर पदोन्नति भी मिलती है। विभाग प्रमुख की अनुपस्थिति में यही मेडिकल कालेज के छात्रों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। हालांकि मेडिकल कालेज के छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए जीएमसी अस्पताल में भी लगाया जाता है और प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं, लेकिन शैक्षणिक स्टाफ की कमी और अस्थायी तौर पर होने वाली तैनाती के कारण कहीं न मेडिकल कालेज के छात्रों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
कोट
मेडिकल कालेज में छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए एकेडमिक अरेंजमेंट के तहत प्रोफेसरों की तैनाती की जाती है। जो विभाग प्रमुख के पद खाली है, उन्हें भी भरने के प्रयास किए जा रहे हैं। रही बात प्रिंसिपल की तैनाती को लेकर जल्द ही मामले का संज्ञान लिया जाएगा।
- सकीना इट्टू, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री, जम्मू-कश्मीर।
मेडिकल कालेज परिसर का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के कगार पर है और उम्मीद है कि जून 2025 तक निर्माण कार्य पूरा कर जीएमसी प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
- सलोनी राय, डीसी उधमपुर।
फोटो सहित