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Udhampur News: पित्त की थैली में पथरी की समय पर जांच करवाएं, उपचार से नियंत्रण करें

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उधमपुर। पित्त की थैली में पथरी यानी गॉल ब्लैडर स्टोन की समस्या आम है। कई लोगों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन पथरी पित्त की नली में फंसने पर गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में समय पर जांच और उपचार जरूरी है, क्योंकि लापरवाही से संक्रमण, पीलिया और अग्न्याशय में सूजन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
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पित्त की थैली लिवर के नीचे स्थित छोटी, नाशपाती के आकार की थैली होती है। इसमें लिवर द्वारा बनाया गया पित्त जमा और गाढ़ा होता है, जो भोजन में मौजूद वसा को पचाने में मदद करता है। पित्त में कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने अथवा थैली के ठीक से खाली न होने पर छोटे-छोटे क्रिस्टल जमा होकर धीरे-धीरे पथरी का रूप ले सकते हैं।
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पथरी मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। मिश्रित पथरी में कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन और कैल्शियम जैसे पदार्थ होते हैं। कोलेस्ट्रॉल स्टोन में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल जमा होता है, जबकि पिगमेंट स्टोन में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होती है और यह काली या भूरी हो सकती है। काली पथरी कुछ रक्त संबंधी और लिवर की बीमारियों से जुड़ी हो सकती है, जबकि भूरी पथरी संक्रमण या पित्त के रुकने के कारण बन सकती है।
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महिलाओं, खासकर गर्भावस्था या एस्ट्रोजन के अधिक संपर्क के दौरान, इसके बनने का खतरा बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र, अधिक वजन या मोटापा, तेजी से वजन कम करना, क्रैश डाइट, डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और परिवार में पथरी का इतिहास भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
क्या हैं प्रमुख लक्षण
कई लोगों में पथरी बिना लक्षण के रहती है। समस्या होने पर पेट के ऊपरी दाहिने या बीच वाले हिस्से में अचानक और लगातार दर्द हो सकता है। यह दर्द अक्सर तला-भुना या भारी भोजन करने के बाद शुरू होता है और पीठ या दाहिने कंधे तक फैल सकता है। दर्द 30 मिनट से कई घंटे तक रह सकता है। इसके साथ जी मिचलाना और उल्टी भी हो सकती है। पित्त की नली में रुकावट होने पर पित्त की थैली में सूजन या संक्रमण, पीलिया, कॉमन बाइल डक्ट में पथरी और अग्न्याशय में सूजन यानी गॉलस्टोन पैंक्रियाटाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तेज और लगातार दर्द, बुखार या ठंड लगना, आंखों या त्वचा का पीला होना और बार-बार उल्टी होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी है।


कैसे बरतें सावधानियां
स्वस्थ वजन बनाए रखना, तेजी से वजन कम करने और क्रैश डाइट से बचना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित आहार लेना पथरी के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। अत्यधिक वसायुक्त और ज्यादा रिफाइंड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
कोट
तेज और लगातार दर्द, बुखार, पीलिया या अन्य गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।
- डाॅ. अनिल, सहायक प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, जीएमसी
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