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Udhampur News: पंजाबी के आधिकारिक दर्जे को लेकर उधमपुर में भी आवाज बुलंद, सिख संगठनों ने निकाली रोष रैली
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पंजाबी भाषा को अधिकारिक दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन
- फोटो : udhampur news
उधमपुर। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने और स्कूली शिक्षा में इसे पुनर्बहाल करने की मांग ने अब तूल पकड़ लिया है। जम्मू में जारी अनिश्चितकालीन धरने के समर्थन में शुक्रवार को उधमपुर की सड़कों पर भी सिख समुदाय का विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला।
जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीजीपीसी) उधमपुर के बैनर तले एकजुट हुए विभिन्न सिख संगठनों और ऑल जम्मू-कश्मीर सिख संगत के सदस्यों ने शहर में एक विशाल रोष रैली निकाली। गुरुद्वारा सिंह सभा से शुरू हुई यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से गुजरती हुई जिला आयुक्त कार्यालय पर समाप्त हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में पंजाबी साडा हक है, ग्रांट पंजाबी द स्टेटस ऑफ एन ऑफिशियल लैंग्वेज और डू जस्टिस टू द पंजाबी लैंग्वेज जैसी नारों लिखी पट्टिकाएं थीं और अपनी मांग के समर्थन में जमकर नारेबाजी कर रहे थे।
डीसी कार्यालय पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने जिला आयुक्त को अपनी तीन सूत्रीय प्रमुख मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि पंजाबी भाषा को तुरंत जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाए, स्कूली पाठ्यक्रम में इसे प्राथमिकता के साथ दोबारा बहाल किया जाए और सरकारी स्कूलों में पंजाबी शिक्षकों के नए पद सृजित किए जाएं। रैली को संबोधित करते हुए डीजीपीसी के प्रधान जसपाल सिंह ने कहा कि वर्ष 2020 से पूर्व पंजाबी भाषा को जो दर्जा और अधिकार प्राप्त थे, उन्हें केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अनुचित रूप से समाप्त कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाबी किसी एक धर्म या वर्ग की भाषा नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की बहु सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है, जिसे हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी समान रूप से प्रेम और सम्मान देते हैं। कमेटी ने केंद्र और स्थानीय प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उधमपुर में भी उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
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जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीजीपीसी) उधमपुर के बैनर तले एकजुट हुए विभिन्न सिख संगठनों और ऑल जम्मू-कश्मीर सिख संगत के सदस्यों ने शहर में एक विशाल रोष रैली निकाली। गुरुद्वारा सिंह सभा से शुरू हुई यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से गुजरती हुई जिला आयुक्त कार्यालय पर समाप्त हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में पंजाबी साडा हक है, ग्रांट पंजाबी द स्टेटस ऑफ एन ऑफिशियल लैंग्वेज और डू जस्टिस टू द पंजाबी लैंग्वेज जैसी नारों लिखी पट्टिकाएं थीं और अपनी मांग के समर्थन में जमकर नारेबाजी कर रहे थे।
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डीसी कार्यालय पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने जिला आयुक्त को अपनी तीन सूत्रीय प्रमुख मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि पंजाबी भाषा को तुरंत जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाए, स्कूली पाठ्यक्रम में इसे प्राथमिकता के साथ दोबारा बहाल किया जाए और सरकारी स्कूलों में पंजाबी शिक्षकों के नए पद सृजित किए जाएं। रैली को संबोधित करते हुए डीजीपीसी के प्रधान जसपाल सिंह ने कहा कि वर्ष 2020 से पूर्व पंजाबी भाषा को जो दर्जा और अधिकार प्राप्त थे, उन्हें केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अनुचित रूप से समाप्त कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाबी किसी एक धर्म या वर्ग की भाषा नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की बहु सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है, जिसे हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी समान रूप से प्रेम और सम्मान देते हैं। कमेटी ने केंद्र और स्थानीय प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उधमपुर में भी उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
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