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Udhampur News: संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, भगवान गणेश का पूजन किया
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आर्दश कालोनी के राधा कृष्ण मंदिर में बुग्गा का उपवास पूर्ण करती महिला श्रद्धालु।
- फोटो : udhampur news
उधमपुर। पूरे शहर में बुग्गा व्रत के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से उपवास रखा और भगवान गणेश की पूजा की। यह व्रत भगवान गणेश को संकटों का नाशक माना जाता है। इसीलिए इस व्रत को संकट मोचक या संकट चतुर्थी का व्रत भी कहा जाता है। संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दे कर व्रत को संपन्न किया।
व्रत रखने के लिए महिलाओं ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। महिलाओं ने सुबह ही अपने घरों तथा मंदिरों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा, दीपक, कपूर और मोदक आदि भोग अर्पित किया। पूरे दिन बिना कुछ खाए-पीए उपवास रखा और शाम को चंद्रमा के दर्शन और भगवान गणेश की पूजा के साथ व्रत पूर्ण किया।
स्थानीय महिलाओं के अनुसार यह व्रत अपने बच्चों व परिवार को संकटों से मुक्ति और जीवन में सफलता तथा शांति की प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हुए भगवान गणेश से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की भलाई की प्रार्थना करते हैं। पूरे दिन पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और कई परिवारों ने सामूहिक रूप से अर्चना कर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने की कामना की।
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पंडित सत्यमूर्ति ने बताया कि व्रत को सिर्फ विवाहित महिलाएं ही रख सकती हैं। पूरे वर्ष में 12 संकट चतुर्थियों में से यह सबसे विशेष गणेश चतुर्थी होती है और इसे रखने से पुत्र की भी प्राप्ति होती है। पूरे दिन उपवास कर शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना कर व्रत को संपन्न करती हैं।
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व्रत रखने के लिए महिलाओं ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। महिलाओं ने सुबह ही अपने घरों तथा मंदिरों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा, दीपक, कपूर और मोदक आदि भोग अर्पित किया। पूरे दिन बिना कुछ खाए-पीए उपवास रखा और शाम को चंद्रमा के दर्शन और भगवान गणेश की पूजा के साथ व्रत पूर्ण किया।
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स्थानीय महिलाओं के अनुसार यह व्रत अपने बच्चों व परिवार को संकटों से मुक्ति और जीवन में सफलता तथा शांति की प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हुए भगवान गणेश से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की भलाई की प्रार्थना करते हैं। पूरे दिन पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और कई परिवारों ने सामूहिक रूप से अर्चना कर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने की कामना की।
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पंडित सत्यमूर्ति ने बताया कि व्रत को सिर्फ विवाहित महिलाएं ही रख सकती हैं। पूरे वर्ष में 12 संकट चतुर्थियों में से यह सबसे विशेष गणेश चतुर्थी होती है और इसे रखने से पुत्र की भी प्राप्ति होती है। पूरे दिन उपवास कर शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना कर व्रत को संपन्न करती हैं।