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मन शांत और स्थिर हो तो आनंद दूर नहीं है: सुभाष शास्त्री
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अखंड परम धाम आश्रम में आयोजित सतसंग में उपस्थित संगत।
- फोटो : udhampur news
उधमपुर। गुरु पूर्णिमा एवं गुरु पूजा के उपलक्ष्य में दूसरे दिन का कार्यक्रम अखण्ड परम धाम आश्रम शिव रैंबल चक मोड़ उधमपुर में आयोजित किया गया। इसमें सभी गुरु भक्तों ने सुभाष शास्त्री जी महाराज एवं गुरु माता की विधिवत पूजा करके उनसे आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर महाराज ने आई हुई संगत को सत्संग से निहाल करते हुए कहा कि जितनी भी साधनाएं हैं, वह मन को शुद्ध करने और वश में करने की हैं। मन शांत और स्थिर हो तो आनंद दूर नहीं है।
हम आंखों से जो भी देखते हैं, कानों से जो भी सुनते हैं, नाक से जो सूंघते हैं, त्वचा से जो भी स्पर्श करते हैं, जीभ से जो भी चखते हैं। जब भी हम इंद्रियों के माध्यम से कुछ अनुभव करते हैं तो मन में एक दृश्य बन जाता है।
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शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के चंचल मन को शांत करना बहुत कठिन है, क्योंकि रूप, रस, गंध, शब्द, स्पर्श किसी न किसी विषय का मन में चिंतन चलता ही रहता है और विचारों की बाढ़ अक्सर आती रहती है।
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इस अवसर पर महाराज ने आई हुई संगत को सत्संग से निहाल करते हुए कहा कि जितनी भी साधनाएं हैं, वह मन को शुद्ध करने और वश में करने की हैं। मन शांत और स्थिर हो तो आनंद दूर नहीं है।
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हम आंखों से जो भी देखते हैं, कानों से जो भी सुनते हैं, नाक से जो सूंघते हैं, त्वचा से जो भी स्पर्श करते हैं, जीभ से जो भी चखते हैं। जब भी हम इंद्रियों के माध्यम से कुछ अनुभव करते हैं तो मन में एक दृश्य बन जाता है।
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शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के चंचल मन को शांत करना बहुत कठिन है, क्योंकि रूप, रस, गंध, शब्द, स्पर्श किसी न किसी विषय का मन में चिंतन चलता ही रहता है और विचारों की बाढ़ अक्सर आती रहती है।