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पद्मश्री पुरस्कार हासिल करने के बाद उधमपुर पहुंचने पर प्रो. शिव निर्मोही का किया स्वागत
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उधमपुर शहर के डाक बंगला में प्रो. शिव निर्मोही का स्वागत करते शहरवासी
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से पद्मश्री पुरस्कार पाने के बाद प्रो. शिव निर्मोही का मंगलवार को उधमपुर पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ। शहरवासियों ने डाक बंगला में उनका फूलों के हार पहनाकर स्वागत किया।
सुबह करीब 10 बजे प्रोफेसर उधमपुर पहुंचे तो विक्रम सलाथिया, डॉ. केसी शर्मा, विक्रम गुलाटी, आदि ने उनका हार पहनाकर स्वागत किया। लोगों ने कहा कि प्रोफेसर को पुरस्कार मिलने से जिले का नाम रोशन हुआ है। वहीं, प्रो. निर्मोही ने कहा कि राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार हासिल करना उनके लिए बहुत ही गर्व की बात है।
उन्होंने बताया कि उनके रहने की व्यवस्था होटल में की गई थी। उस होटल में उनको बहुत पुराने साथी मिले, जोकि साहित्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके मिलने से पुरानी यादें ताजा हो गईं। वहीं, सोमवार को कार्यक्रम के दौरान उनको पुरस्कार लेने के लिए मंच पर बुलाया गया तो राष्ट्रपति ने उनका नाम लेकर बुलाया, और कहा कि प्रो. शिव निर्मोही उनकी प्रेरणा हैं। उन्होंने इनकी बहुत सी पुस्तकें पढ़ी हैं।
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प्रो. निर्मोही ने बताया कि वह उधमपुर से अपनी पुस्तकें राष्ट्रपति को भेजते थे। उनको कल पता चला कि राष्ट्रपति ने उनकी पुस्तकों को पढ़ा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें देख कर कहा कि जम्मू-कश्मीर से भी लोग पहुंचे हैं।
उन्होंने शिक्षा और साहित्य के जरिए डुग्गर संस्कृति और धर्म के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनको दिल्ली पहुंचकर पता चला कि देश भर के लोगों ने प्रदेश के इतिहास के बारे में पढ़ा है। इस दौरान उनको सुरेश वाड़ेकर और करण जौहर जैसे लोगों से मिलने का भी अवसर मिला। जम्मू के लोगों से प्रो. निर्मोही ने कहा कि अपनी संस्कृति को जीवित रखना है। वीरता का झंडा हमेशा बुलंद रखना है।
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सुबह करीब 10 बजे प्रोफेसर उधमपुर पहुंचे तो विक्रम सलाथिया, डॉ. केसी शर्मा, विक्रम गुलाटी, आदि ने उनका हार पहनाकर स्वागत किया। लोगों ने कहा कि प्रोफेसर को पुरस्कार मिलने से जिले का नाम रोशन हुआ है। वहीं, प्रो. निर्मोही ने कहा कि राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार हासिल करना उनके लिए बहुत ही गर्व की बात है।
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उन्होंने बताया कि उनके रहने की व्यवस्था होटल में की गई थी। उस होटल में उनको बहुत पुराने साथी मिले, जोकि साहित्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके मिलने से पुरानी यादें ताजा हो गईं। वहीं, सोमवार को कार्यक्रम के दौरान उनको पुरस्कार लेने के लिए मंच पर बुलाया गया तो राष्ट्रपति ने उनका नाम लेकर बुलाया, और कहा कि प्रो. शिव निर्मोही उनकी प्रेरणा हैं। उन्होंने इनकी बहुत सी पुस्तकें पढ़ी हैं।
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प्रो. निर्मोही ने बताया कि वह उधमपुर से अपनी पुस्तकें राष्ट्रपति को भेजते थे। उनको कल पता चला कि राष्ट्रपति ने उनकी पुस्तकों को पढ़ा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें देख कर कहा कि जम्मू-कश्मीर से भी लोग पहुंचे हैं।
उन्होंने शिक्षा और साहित्य के जरिए डुग्गर संस्कृति और धर्म के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनको दिल्ली पहुंचकर पता चला कि देश भर के लोगों ने प्रदेश के इतिहास के बारे में पढ़ा है। इस दौरान उनको सुरेश वाड़ेकर और करण जौहर जैसे लोगों से मिलने का भी अवसर मिला। जम्मू के लोगों से प्रो. निर्मोही ने कहा कि अपनी संस्कृति को जीवित रखना है। वीरता का झंडा हमेशा बुलंद रखना है।