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Udhampur News: एक साल में 20% तक बढ़ी वनों की उत्पादकता
Tue, 14 Jan 2025 01:02 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Tue, 14 Jan 2025 01:02 AM IST
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कार्बन अवशोषण में भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर पहले स्थान पर
रामबन। जम्मू-कश्मीर में वन क्षेत्र की स्थिति बहुत अच्छी है। कार्बन अवशोषण में भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर पहले स्थान पर है। पिछले एक साल में वनों की उत्पादकता में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह 296 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर और 336 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गई है। यह सभी राज्यों से आगे है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश है।
यह जानकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) बीके सिंह ने रामबन के बटोत में वन संरक्षक, चिनाब सर्कल, संदीप कुमार और रामबन, डोडा और किश्तवाड़ जिलों के सभी डीएफओ के साथ समीक्षा बैठक के बाद दी।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत 2010-11 से वनों में शंकुधारी पौधों के रोपण के परिणाम सकारात्मक हैं।
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वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के बारे में उन्होंने कहा कि वन विभाग की भूमिका बहुत अधिक नहीं है तथा जम्मू-कश्मीर एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 1921 से वनों का सीमांकन या सीमांकन शुरू किया गया था तथा तत्कालीन सरकार ने वनवासियों का अच्छे से ख्याल रखा है तथा 1944 के दौरान ही लगभग 1 लाख हेक्टेयर वन भूमि उन्हें दे दी गई थी।
इसके अलावा चल रही जलविद्युत परियोजनाओं में कैच प्लान के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई तथा उन्होंने इन परियोजनाओं को चलाने में आने वाली बाधाओं तथा तरीकों के बारे में जानकारी ली।
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रामबन। जम्मू-कश्मीर में वन क्षेत्र की स्थिति बहुत अच्छी है। कार्बन अवशोषण में भारत के सभी केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर पहले स्थान पर है। पिछले एक साल में वनों की उत्पादकता में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह 296 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर और 336 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गई है। यह सभी राज्यों से आगे है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश है।
यह जानकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) बीके सिंह ने रामबन के बटोत में वन संरक्षक, चिनाब सर्कल, संदीप कुमार और रामबन, डोडा और किश्तवाड़ जिलों के सभी डीएफओ के साथ समीक्षा बैठक के बाद दी।
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उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत 2010-11 से वनों में शंकुधारी पौधों के रोपण के परिणाम सकारात्मक हैं।
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वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के बारे में उन्होंने कहा कि वन विभाग की भूमिका बहुत अधिक नहीं है तथा जम्मू-कश्मीर एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 1921 से वनों का सीमांकन या सीमांकन शुरू किया गया था तथा तत्कालीन सरकार ने वनवासियों का अच्छे से ख्याल रखा है तथा 1944 के दौरान ही लगभग 1 लाख हेक्टेयर वन भूमि उन्हें दे दी गई थी।
इसके अलावा चल रही जलविद्युत परियोजनाओं में कैच प्लान के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई तथा उन्होंने इन परियोजनाओं को चलाने में आने वाली बाधाओं तथा तरीकों के बारे में जानकारी ली।