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जिला अस्पताल में शुरू होगा एमबीबीएस का पहला सत्र
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उधमपुर: जिला अस्पताल की इमारत का दृश्य.
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। केंद्र सरकार की तरफ से मंजूर किए गए मेडिकल कॉलेज के तहत एमबीबीएस का पहला सत्र जिला अस्पताल की इमारत में शुरू किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल में अलग से ढांचा तैयार किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है।
वर्षों के इंतजार के बाद अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज उधमपुर को मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद जिला प्रशासन ने शहर के साथ लगते बैली गांव में जमीन का चयन किया। स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कॉलेज के लिए 214 कनाल जमीन उपलब्ध करवा दी गई है। जमीन मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आगे की कार्यप्रणाली शुरू कर दी।
लेकिन, 2020 में कोरोना संकट सामने आने के बाद इस योजना पर आगे का काम धीमा पड़ गया। जब इसको मंजूरी मिली थी तो स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी को दो वर्ष के अंदर इमारत तैयार कर मेडिकल कॉलेज शुरू करने के आदेश दिए थे। लेकिन, कोरोना संकट के कारण यह संभव नहीं हो सका। अब सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने एमबीबीएस का पहला सत्र शुरू करने की तरफ ध्यान दिया है।
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पहला सत्र जिला अस्पताल में ही शुरू किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल में ही व्यवस्था की जाएगी। पीडब्ल्यूडी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है। कंसलटेंट एजेंसी की व्यवस्था करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इस पर करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कंसलटेंट एजेंसी व्यवस्था करेगी कि किस तरह से अस्पताल में ही बदलाव कर एमबीबीएस का पहला बैच शुरू किया जा सकता है? इसके लिए अस्पताल में कुछ नए सिरे से निर्माण भी किया जा सकता है। 2022-23 का एमबीबीएस का सत्र उधमपुर में शुरू होने की संभावना है।
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मेडिकल कॉलेज के लिए 325 करोड़ रुपये मंजूर
उधमपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए केंद्र सरकार ने 2019 में ही 325 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी है। इस राशि से कॉलेज की इमारत के साथ सभी तरह की व्यवस्थाएं की जानी है। अक्सर मरीज की हालत खराब होने के बाद उसको जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया जाता है। लेकिन, मेडिकल कॉलेज बनने के बाद किसी को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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कंसलटेंट एजेंसी की व्यवस्था के लिए काम शुरू कर दिया गया है। एजेंसी आर्किटेक्ट व ड्राइंग का काम करेगी, और इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआर तैयार कर सरकार को भेज दी जाएगी। विभाग ने अपनी तरफ से इसको लेकर प्रयास तेज कर दिए हैं।
- मोहम्मद जबीर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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वर्षों के इंतजार के बाद अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज उधमपुर को मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद जिला प्रशासन ने शहर के साथ लगते बैली गांव में जमीन का चयन किया। स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कॉलेज के लिए 214 कनाल जमीन उपलब्ध करवा दी गई है। जमीन मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आगे की कार्यप्रणाली शुरू कर दी।
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लेकिन, 2020 में कोरोना संकट सामने आने के बाद इस योजना पर आगे का काम धीमा पड़ गया। जब इसको मंजूरी मिली थी तो स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी को दो वर्ष के अंदर इमारत तैयार कर मेडिकल कॉलेज शुरू करने के आदेश दिए थे। लेकिन, कोरोना संकट के कारण यह संभव नहीं हो सका। अब सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने एमबीबीएस का पहला सत्र शुरू करने की तरफ ध्यान दिया है।
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पहला सत्र जिला अस्पताल में ही शुरू किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल में ही व्यवस्था की जाएगी। पीडब्ल्यूडी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है। कंसलटेंट एजेंसी की व्यवस्था करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इस पर करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कंसलटेंट एजेंसी व्यवस्था करेगी कि किस तरह से अस्पताल में ही बदलाव कर एमबीबीएस का पहला बैच शुरू किया जा सकता है? इसके लिए अस्पताल में कुछ नए सिरे से निर्माण भी किया जा सकता है। 2022-23 का एमबीबीएस का सत्र उधमपुर में शुरू होने की संभावना है।
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मेडिकल कॉलेज के लिए 325 करोड़ रुपये मंजूर
उधमपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए केंद्र सरकार ने 2019 में ही 325 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी है। इस राशि से कॉलेज की इमारत के साथ सभी तरह की व्यवस्थाएं की जानी है। अक्सर मरीज की हालत खराब होने के बाद उसको जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया जाता है। लेकिन, मेडिकल कॉलेज बनने के बाद किसी को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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कंसलटेंट एजेंसी की व्यवस्था के लिए काम शुरू कर दिया गया है। एजेंसी आर्किटेक्ट व ड्राइंग का काम करेगी, और इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआर तैयार कर सरकार को भेज दी जाएगी। विभाग ने अपनी तरफ से इसको लेकर प्रयास तेज कर दिए हैं।
- मोहम्मद जबीर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी