{"_id":"61b24e52ffdcd818d43dbf79","slug":"development-udhampur-news-jmu249510972","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंजूरी के बाद भी नहीं बन सकी उधमपुर डेवलपमेंट अथारिटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंजूरी के बाद भी नहीं बन सकी उधमपुर डेवलपमेंट अथारिटी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर। देविका नगरी के विकास व विस्तार के लिए 2013 में उधमपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) को मंजूरी मिली थी। अक्तूबर 2013 में इसके लिए अधिसूचना जारी हुई। लेकिन, आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित है। इस योजना से शहर का दायरा बढ़ने के साथ चहुंमुखी विकास की नई उम्मीद जगी थी।
कई बार मांग करने के बाद 2013 में पूर्व राज्य सरकार ने यूडीए को मंजूरी दी, और इसके लिए अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना जारी होने के बाद लगा कि जल्द ही इसको लेकर काम शुरू किया जाएगा। इसको लेकर आवास एवं शहरी विकास विभाग को काम करना था। मंजूरी में उधमपुर के विकास के लिए शहर के साथ 70 ग्रामीण इलाके भी रखे गए थे।
मंजूरी मिलने के बाद उधमपुर भी जम्मू, श्रीनगर व कटड़ा की तरह एक विकासशील शहर बनता। ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को पक्की सड़कें, गलियां, बिजली, पानी व शहरी स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी थी। एक तरह से 70 ग्रामीण इलाके भी शहर के दायरे में आ जाने थे। लेकिन, यह योजना अधिसूचना तक ही सीमित रही। आज तक इसको लेकर कुछ नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
------
यूडीए में शामिल किए गए उधमपुर के गांव
शहर के साथ लगते संगूर, ठंडा पदर, रौंद दोमेल, लोअर थनोआ, कावा, उमाला, मलाड़, गढ़ी, रैंबल, संबल, जक्खड़, ठंडा पद्दर, नगरोटा, दंदियाल, सुक्की करलाई, रौंत, थिल, चैरी स्याल, गंगेड़ा, जखैनी, संबल, रख टंडे, बडाली, कोटली पाई, सुई, मगैनी, मानपा, रठियान, लौंडना, दलाह, कशीराह, बरियाल, सौंथा, बालिया, डिब्बर, थिल सहित 70 ग्रामीण इलाकों को यूडीए में शामिल किया गया था।
------
विधायक पद पर रहते हुए इसके के लिए विशेष तौर पर प्रयास किए थे, और 2013 में इसको मंजूरी दिलाई थी। इस पर काम शुरू होने की भी उम्मीद थी। लेकिन, सरकार के बदलने के बाद इसको अधर में लटका दिया गया। और, आज तक इसको लेकर काम शुरू नहीं हो पाया। अगर उधमपुर विकास प्राधिकरण पर काम हो जाता तो उधमपुर के साथ लगते इलाकों का भी विकास हो जाता।
- बलवंत सिंह मनकोटिया, पूर्व विधायक, उधमपुर
विज्ञापन
कई बार मांग करने के बाद 2013 में पूर्व राज्य सरकार ने यूडीए को मंजूरी दी, और इसके लिए अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना जारी होने के बाद लगा कि जल्द ही इसको लेकर काम शुरू किया जाएगा। इसको लेकर आवास एवं शहरी विकास विभाग को काम करना था। मंजूरी में उधमपुर के विकास के लिए शहर के साथ 70 ग्रामीण इलाके भी रखे गए थे।
विज्ञापन
मंजूरी मिलने के बाद उधमपुर भी जम्मू, श्रीनगर व कटड़ा की तरह एक विकासशील शहर बनता। ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को पक्की सड़कें, गलियां, बिजली, पानी व शहरी स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी थी। एक तरह से 70 ग्रामीण इलाके भी शहर के दायरे में आ जाने थे। लेकिन, यह योजना अधिसूचना तक ही सीमित रही। आज तक इसको लेकर कुछ नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
------
यूडीए में शामिल किए गए उधमपुर के गांव
शहर के साथ लगते संगूर, ठंडा पदर, रौंद दोमेल, लोअर थनोआ, कावा, उमाला, मलाड़, गढ़ी, रैंबल, संबल, जक्खड़, ठंडा पद्दर, नगरोटा, दंदियाल, सुक्की करलाई, रौंत, थिल, चैरी स्याल, गंगेड़ा, जखैनी, संबल, रख टंडे, बडाली, कोटली पाई, सुई, मगैनी, मानपा, रठियान, लौंडना, दलाह, कशीराह, बरियाल, सौंथा, बालिया, डिब्बर, थिल सहित 70 ग्रामीण इलाकों को यूडीए में शामिल किया गया था।
------
विधायक पद पर रहते हुए इसके के लिए विशेष तौर पर प्रयास किए थे, और 2013 में इसको मंजूरी दिलाई थी। इस पर काम शुरू होने की भी उम्मीद थी। लेकिन, सरकार के बदलने के बाद इसको अधर में लटका दिया गया। और, आज तक इसको लेकर काम शुरू नहीं हो पाया। अगर उधमपुर विकास प्राधिकरण पर काम हो जाता तो उधमपुर के साथ लगते इलाकों का भी विकास हो जाता।
- बलवंत सिंह मनकोटिया, पूर्व विधायक, उधमपुर