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संरक्षण का इंतजार कर रही देविकानगरी की बावलियां

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उधमपुर में मौजूद प्राकृतिक जलस्रोत, जिसको संरक्षण की जरूरत है - फोटो : UDHAMPUR
उधमपुर। शहर में जब भी पानी की किल्लत होती है, तब लोगों के काम देविकानगरी की प्राचीन बावलियां आती हैं। लेकिन, संरक्षण न किए जाने के कारण बावलियां अस्तित्व खोती जा रही हैं। अब जिला प्रशासन और जल शक्ति विभाग ने इनके संरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।
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देविकानगरी को कभी बावलियों का शहर कहा जाता था। शहर व आसपास के इलाकों में किसी समय सौ से अधिक बावलियां हुआ करती थीं। लोग जैसे-जैसे आधुनिक होते गए, बावलियां उपेक्षित होती गईं। जिसके चलते यहां की ऐतिहासिक बावलियों का अस्तित्व संकट में घिरता गया। जल शक्ति विभाग से जब लोगों को घर बैठे पानी मिलने लगा तो उन्होंने बावलियों पर जाना छोड़ दिया। फिर रखरखाव के अभाव में बावलियां अपना अस्तित्व खोने लगीं। वर्तमान में ज्यादातर बावलियों की दुर्दशा हो चुकी है।
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जब भी शहरवासियों को पानी की सप्लाई नहीं मिलती है तो लोग पानी के लिए इन बावलियों पर पहुंचते हैं। कई वर्षों के इंतजार के बाद जिला प्रशासन और जल शक्ति विभाग ने इनके संरक्षण की तरफ ध्यान देकर एक प्रस्ताव तैयार किया है। जल शक्ति विभाग ने 11 बावलियों के संरक्षण को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है। इसको जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है, क्योंकि इन बावलियों और प्राकृतिक जल स्रोतों से विभाग पानी लेकर लोगों के घरों तक पहुंचा रहा है।
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देविका नदी के तट पर हैं सात बावलियां
शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देविका के तट पर करीब सात बावलियां व प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। जोकि शहरवासियों की जरूरत को पूरा कर रहे हैं। जब भी शहर में पीने की सप्लाई प्रभावित होती है, सैकड़ों लोग देविका की बावलियों से पानी लेते हैं।
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उधमपुर की कुछ प्रमुख प्राचीन बावलियां
रतैड़ी बावली, दंदियाल की बावलियां, लड्डन बावली, मोआड़ा मोड़ की बावली, दलाह की बावली, गंगेड़ा में राजे दी बां, देविका में रानी बावली, बाड़यां में बड़ी बां, बाड़यां में निक्की बां, बाड़यां में तनु दी बां, बिल्लन बावली, मंगू दी बां, रतैड़ी बावली, गंगेड़ा स्थित रानी बावली, फंगैल दी बां, डुग्गे वाली बां, अंबे हार दी बां, माई दी बां, साकन बावली, मियां बाग में पांच बावलियां, नडुए दी बां, परोचे दी बां।

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बावलियां पानी की कमी को पूरा करने में बहुत मदद करती हैं। इनके संरक्षण को लेकर प्रयास चल रहा है। दो प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। जल शक्ति विभाग प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद 11 बावलियों का संरक्षण करेगा।
- ताज चौधरी, एक्सईएन, जल शक्ति विभाग, उधमपुर
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