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विभागीय क्लीयरेंस में फंसा पुल का काम
ब्यूरो/अमर उजाला, रियासी
Updated Sat, 07 Nov 2015 01:42 AM IST
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जिला मुख्यालय से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित अंजी कयाला गांव के लोगों की बदकिस्मती ही कहिए कि अंजी नाले पर बनने वाले पुल का काम दो विभागों के लोचे में पड़ा हुआ है।
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क्लीयरेंस के चक्कर में काम रुका पड़ा है, जिससे गांव के दोनों सिरे मिल नहीं पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुल बना रही एजेंसी जेकेपीसीसी के अधिकारी का कहना है कि उनको वन विभाग द्वारा पुल तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाने को क्लीयरेंस नहीं मिल रही है।
दूसरी तरफ वन विभाग निर्माण एजेंसी द्वारा केस को फालोअप नहीं करने की बात कह रहा है। पुल के निर्माण नहीं होने से एक ही पंचायत के दोनों तरफ रहने वाले लोगों को अंजी में बहने वाले पानी के बीच से गुजर कर जाना पड़ता है।
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सरपंच मो. लतीफ, अयूब खान, मकबूल अहमद तथा चन्नी के अनुसार पुल को बनाने का काम पांच वर्ष पहले शुरू हुआ था। इसके लिए पिलर बना दिए गए।
वहीं लोहे के एंगल भी लगाये गए, लेकिन न तो पुल के दोनों सिरों के पिलरों को साइडों से जोड़ा गया और न ही इस पर चलने के लिए रास्ता बनाया गया। मौजूदा समय में पुल का काम बंद है।
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बीच में नाले के कारण बच्चे पानी में घुस कर पढ़ने जाते हैं। लोगों के अनुसार अंजी में पहले बजरी और पत्थरों की कमी होने से पुल के पिलरों को बनाने के लिए वहां तक मैटेरियल पहुंचाने का काम आसान था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है।
वन विभाग के पास रुपए जमा करवाए हैं
पुल तक जाने के लिए सड़क बनाया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए वन विभाग की क्लीयरेंस चाहिए। बिना सड़क के वहां तक मैटेरियल पहुंचाना संभव नहीं है। क्लीयरेंस मिलने के दो महीने के बाद ही पुल का काम पूरा कर दिया जाएगा। वन विभाग के पास लगभग पौने दो लाख रुपए जमा भी करवाये गए हैं।
-अरशद मीर, डीजीएम, जेकेपीसीसी
मेरे पास नहीं है मामला
हमारे डिवीजन से कोई काम नहीं रुका है। जेकेपीसीसी ने अपने केस को फॉलोअप नहीं किया होगा। मामला सचिवालय या सरकार के पास लटका हो सकता है। इसे कंपनी को खुद ही देखना होगा।
-सुरिंदर सिंह, डीएफओ