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Udhampur News: जंगली रास्ता व नाला पार कर पढ़ने जाते हैं बच्चे, प्राइमरी स्कूल अपग्रेड करने की मांग
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चिनैनी शिक्षा जोन के अंतर्गत चौकी प्राइमरी स्कूल की जानकारी देते स्थानीय लोग। संवाद
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- 31 वर्ष पुराने स्कूल का आज तक नहीं बढ़ाया गया दर्जा, चौकी प्राइमरी स्कूल पर ध्यान देने की मांग
- स्कूल में शिक्षकों के तीन पद, एक ही पढ़ा रहा, किचन शेड भी नहीं
चिनैनी। चिनैनी शिक्षा जोन प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा जोन कहलाता है। यहां तीन सौ से ज्यादा स्कूल हैं। बावजूद इसके कई स्कूल आज भी ऐसे हैं जहां शिक्षकों का अभाव है। इसी जोन में प्राइमरी स्कूल चौकी भी आता है जो वर्ष 1994 को खोला गया था और जिसका दर्जा आज तक नहीं बढ़ाया गया। मिडिल की पढ़ाई के लिए बच्चों को दो किलोमीटर दूर जंगली रास्ता और एक बड़ा नाला पार कर वहां पहुंचना पड़ता है।
सड़क से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित प्राइमरी स्कूल चौकी में सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय निवासी अशोक कुमार, मुंशी राम, मक्खन लाल, संजय कुमार, धरमू, कृष्ण लाल आदि ने बताया कि इस प्राइमरी स्कूल में शिक्षकों के तीन पद हैं जिसमें एक ही भरा है जबकि दो खाली हैं। इसके अलावा स्कूल में किचन शेड न होने के कारण खुले आसमान तले बच्चों का मिड-डे मील तैयार होता है। बारिशों में दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। स्कूल में एक ही शौचालय है। जबकि लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल सड़क से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है जिस पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। चौकी प्राइमरी स्कूल में करीब 40 छात्र-छात्राएं चौकी के अलावा डिढ्ढा गोठ, कुरजनु से भी पढ़ाई के लिए आते हैं।
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मिडिल स्कूल का दर्जा मिल जाए तो दूर हो जाएगी समस्या
ग्रामीणों ने कहा कि 31 साल पुराने चौकी स्कूल को मिडिल का दर्जा मिलना चाहिए। मौजूदा समय में छात्र व छात्राएं पांचवीं पास के बाद कोलासर मिडिल स्कूल जाते हैं, जो चौकी प्राइमरी स्कूल से करीब दो किलोमीटर दूर जंगली रास्ता और एक बड़े नाले को पार कर पहुंचना पड़ता है। मिडिल स्कूल दूर होने की वजह से बच्चों के साथ कोई हादसा न घट जाए इसका भी अंदेशा रहता है । पिछले कई वर्षों से मात्र एक शिक्षक के सहारे चौकी प्राइमरी स्कूल चल रहा है, जिससे बच्चों को कई दिक्कतें पेश आती हैं। गांव में बीए पास करने वालों की संख्या भी मात्र पांच से छह है जबकि 12वीं पास करने वालों की संख्या 10 से 15 के करीब है। मिडिल स्कूल बन जाए तो बच्चों की कई समस्याएं दूर हो जाएंगी ।
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कोट..
स्कूल का दर्जा बढ़ाने को लेकर मौके पर फिजिबिलिटी देखी जाएगी और उसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को बनाकर भेजी जाएगी जबकि किचन को लेकर लिखा गया है और शिक्षकों की कमी भी जल्द दूर होने की उम्मीद है ।
- राम लाल, जेडईओ
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- स्कूल में शिक्षकों के तीन पद, एक ही पढ़ा रहा, किचन शेड भी नहीं
चिनैनी। चिनैनी शिक्षा जोन प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा जोन कहलाता है। यहां तीन सौ से ज्यादा स्कूल हैं। बावजूद इसके कई स्कूल आज भी ऐसे हैं जहां शिक्षकों का अभाव है। इसी जोन में प्राइमरी स्कूल चौकी भी आता है जो वर्ष 1994 को खोला गया था और जिसका दर्जा आज तक नहीं बढ़ाया गया। मिडिल की पढ़ाई के लिए बच्चों को दो किलोमीटर दूर जंगली रास्ता और एक बड़ा नाला पार कर वहां पहुंचना पड़ता है।
सड़क से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित प्राइमरी स्कूल चौकी में सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय निवासी अशोक कुमार, मुंशी राम, मक्खन लाल, संजय कुमार, धरमू, कृष्ण लाल आदि ने बताया कि इस प्राइमरी स्कूल में शिक्षकों के तीन पद हैं जिसमें एक ही भरा है जबकि दो खाली हैं। इसके अलावा स्कूल में किचन शेड न होने के कारण खुले आसमान तले बच्चों का मिड-डे मील तैयार होता है। बारिशों में दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। स्कूल में एक ही शौचालय है। जबकि लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल सड़क से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है जिस पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। चौकी प्राइमरी स्कूल में करीब 40 छात्र-छात्राएं चौकी के अलावा डिढ्ढा गोठ, कुरजनु से भी पढ़ाई के लिए आते हैं।
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मिडिल स्कूल का दर्जा मिल जाए तो दूर हो जाएगी समस्या
ग्रामीणों ने कहा कि 31 साल पुराने चौकी स्कूल को मिडिल का दर्जा मिलना चाहिए। मौजूदा समय में छात्र व छात्राएं पांचवीं पास के बाद कोलासर मिडिल स्कूल जाते हैं, जो चौकी प्राइमरी स्कूल से करीब दो किलोमीटर दूर जंगली रास्ता और एक बड़े नाले को पार कर पहुंचना पड़ता है। मिडिल स्कूल दूर होने की वजह से बच्चों के साथ कोई हादसा न घट जाए इसका भी अंदेशा रहता है । पिछले कई वर्षों से मात्र एक शिक्षक के सहारे चौकी प्राइमरी स्कूल चल रहा है, जिससे बच्चों को कई दिक्कतें पेश आती हैं। गांव में बीए पास करने वालों की संख्या भी मात्र पांच से छह है जबकि 12वीं पास करने वालों की संख्या 10 से 15 के करीब है। मिडिल स्कूल बन जाए तो बच्चों की कई समस्याएं दूर हो जाएंगी ।
कोट..
स्कूल का दर्जा बढ़ाने को लेकर मौके पर फिजिबिलिटी देखी जाएगी और उसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को बनाकर भेजी जाएगी जबकि किचन को लेकर लिखा गया है और शिक्षकों की कमी भी जल्द दूर होने की उम्मीद है ।
- राम लाल, जेडईओ