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शेरे ए कश्मीर पुलिस एकेडमी में गेस्ट लैक्चर का कार्यक्रम
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आईजीपी मुकेश सिंह को सम्मनित करते एसडीएस जमवाल।
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। शेरे-ए-कश्मीर पुलिस एकेडमी में प्रोबेशनर पुलिस उपाधीक्षक और उप-निरीक्षकों के लिए एक गेस्ट लेक्चर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) जम्मू मुकेश सिंह की ओर से प्रतिभागियों को आपराधिक न्याय प्रणाली के स्तंभ पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका पर आधारित जानकारी प्रदान की गई।
आईजीपी ने अपने व्याख्यान के दौरान न्याय सुनिश्चित करने में प्रत्येक एजेंसी द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एजेंसी अपने आप में महत्वपूर्ण है और यह आपराधिक न्याय प्रणाली का मुख्य अंग है। इनमें से एक के भी ठीक से कार्य नहीं करने से आपराधिक न्याय प्रणाली का पूरा पहिया विफल साबित होता है। उन्होंने एफआईआर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एफआईआर किसी भी मामले का आधार है। इसमें देखभाल के साथ-साथ सावधानी भी बरती जानी चाहिए कि इसे सरल और सत्य शब्दों में दर्ज किया जाए। चूंकि सभी जांच एफआईआर के पंजीकरण से शुरू होती है और चार्जशीट में समाप्त हो जाती है। एफआईआर विस्तार महत्व रखती है और अधिकारियों को उचित जांच करने में सहायक होती है।
इसके साथ ही उन्होंने अभियोजन की भूमिका को आपराधिक न्याय प्रणाली में बहुत महत्वपूर्ण बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी अपराधी कानून की उचित प्रक्रिया से बचना नहीं चाहिए और न ही किसी निर्दोष को दंडित किया जाए। क्योंकि न्यायपालिका न्याय प्रदान करने को सुनिश्चित करती है। कार्यक्रम के अंत में शेर-ए-कश्मीर पुलिस एकेडमी के निदेशक डॉ. एसडी सिंह जमवाल ने आईजीपी जम्मू को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मनित किया।
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इस मौके पर एसएसपी (आउटडोर) मोहन लाल, सीपीओ कमल शर्मा, एसएसपी राजीव पांडे, सीपीओ, सीनियर पीओएस, एसवाईएसपी और अकादमी के अन्य कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-विजय कुमार
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आईजीपी ने अपने व्याख्यान के दौरान न्याय सुनिश्चित करने में प्रत्येक एजेंसी द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एजेंसी अपने आप में महत्वपूर्ण है और यह आपराधिक न्याय प्रणाली का मुख्य अंग है। इनमें से एक के भी ठीक से कार्य नहीं करने से आपराधिक न्याय प्रणाली का पूरा पहिया विफल साबित होता है। उन्होंने एफआईआर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एफआईआर किसी भी मामले का आधार है। इसमें देखभाल के साथ-साथ सावधानी भी बरती जानी चाहिए कि इसे सरल और सत्य शब्दों में दर्ज किया जाए। चूंकि सभी जांच एफआईआर के पंजीकरण से शुरू होती है और चार्जशीट में समाप्त हो जाती है। एफआईआर विस्तार महत्व रखती है और अधिकारियों को उचित जांच करने में सहायक होती है।
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इसके साथ ही उन्होंने अभियोजन की भूमिका को आपराधिक न्याय प्रणाली में बहुत महत्वपूर्ण बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी अपराधी कानून की उचित प्रक्रिया से बचना नहीं चाहिए और न ही किसी निर्दोष को दंडित किया जाए। क्योंकि न्यायपालिका न्याय प्रदान करने को सुनिश्चित करती है। कार्यक्रम के अंत में शेर-ए-कश्मीर पुलिस एकेडमी के निदेशक डॉ. एसडी सिंह जमवाल ने आईजीपी जम्मू को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मनित किया।
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इस मौके पर एसएसपी (आउटडोर) मोहन लाल, सीपीओ कमल शर्मा, एसएसपी राजीव पांडे, सीपीओ, सीनियर पीओएस, एसवाईएसपी और अकादमी के अन्य कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-विजय कुमार