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इनफैंटरी दिवस पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
ब्यूराे/अमरउजाला, उध्ामपुर
Updated Wed, 28 Oct 2015 01:41 AM IST
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उत्तरी कमान में भारतीय सेना ने 68वां इनफैंटरी दिवस मनाया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उत्तरी कमान के कमांडर जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने ध्रुव शहीदी स्मारक में इनफैंटरी यूनिट को बधाई दी।
इस दौरान शहीदों को याद किया गया। कार्यक्रम में जनरल हुड्डा ने कहा कि इनफैंटरी यूनिट देश की सीमाओं और अंदरूनी सुरक्षा के लिए बेहतर काम कर रही है। इस यूनिट की स्थापना 27 अक्तूबर 1947 को हुई थी।
तब पहली बटालियन सिख रेजीमेंट को दिल्ली से श्रीनगर पहुंचाया गया था। पाक सैनिकों के साथ कबायलियों ने श्रीनगर में हमला कर दिया था।
इन कबालियों को खदेड़ने के लिए ही प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और महाराज हरि सिंह के बीच विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए और दूसरे ही दिन रेजीमेंट श्रीनगर पहुंच गई।
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स्वतंत्र भारत में पहली बार घुसपैठ के खिलाफ सेना की कार्रवाई की गई थी। इसे युद्ध की महारानी भी कहा जाता है। पहली बार आपरेशन गुलमर्ग शुरू किया गया था। पुंछ में भी 20 अक्तूबर को पाक सेना ने घुसपैठ की थी।
इसके बाद 22 अक्तूबर 1947 को पांच हजार के करीब कबायलियों ने घाटी में घुसपैठ की। उसी की याद में हर साल इनफैंटरी दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।
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इस दौरान शहीदों को याद किया गया। कार्यक्रम में जनरल हुड्डा ने कहा कि इनफैंटरी यूनिट देश की सीमाओं और अंदरूनी सुरक्षा के लिए बेहतर काम कर रही है। इस यूनिट की स्थापना 27 अक्तूबर 1947 को हुई थी।
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तब पहली बटालियन सिख रेजीमेंट को दिल्ली से श्रीनगर पहुंचाया गया था। पाक सैनिकों के साथ कबायलियों ने श्रीनगर में हमला कर दिया था।
इन कबालियों को खदेड़ने के लिए ही प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और महाराज हरि सिंह के बीच विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए और दूसरे ही दिन रेजीमेंट श्रीनगर पहुंच गई।
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स्वतंत्र भारत में पहली बार घुसपैठ के खिलाफ सेना की कार्रवाई की गई थी। इसे युद्ध की महारानी भी कहा जाता है। पहली बार आपरेशन गुलमर्ग शुरू किया गया था। पुंछ में भी 20 अक्तूबर को पाक सेना ने घुसपैठ की थी।
इसके बाद 22 अक्तूबर 1947 को पांच हजार के करीब कबायलियों ने घाटी में घुसपैठ की। उसी की याद में हर साल इनफैंटरी दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।