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विवादित जमीन पर निर्माण विरोध में बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला,रामनगर
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:19 PM IST
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कसबे में पीर बाबा के साथ वाली जमीन पर हो रहे निर्माण के विरोध में लोगों ने मंगलवार को प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। दुकानदारों ने दुकानें बंद कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने उक्त विवादित जमीन पर निर्माण कार्य बंद कराने की मांग की। एसडीएम ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
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कुछ दिन पहले ही जमीन पर बशीर अहमद निवासी किडमू ने दुकान का निर्माण शुरू किया था। स्थानीय लोगों ने इस पर एतराज जताया था। इस मामले में लोगों का प्रतिनिधिमंडल एसडीपीओ से मिला था और विवादित जमीन पर निर्माण कार्य बंद रखने की मांग की थी। इसके बाद एक दिन निर्माण कार्य बंद रहा, लेकिन सोमवार को फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
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इससे स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। स्थानीय लोगों, व्यापार मंडल व आरएसएस ने रामनगर बंद का ऐलान कर दिया। मंगलवार को बारिश के बीच संख्या में लोग बस अड्डे पर इकट्ठा हुए। दुकानें बंद कर वह रामनगर-उधमपुर मार्ग पर विवादित जमीन के पास धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे सड़क पर जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन दोपहर 12 बजे तक चला।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि साजिश के तहत बशीर अहमद को उक्त जमीन आवंटित की गई। इस जमीन पर किसी भी कीमत पर निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। थाना प्रभारी उरफान परवेज मौके पर पहुंच कर लोगों को समझाने का प्रयास किया। लोगों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए एसडीएम अंशुल गर्ग, एसडीपीओ दीपक ढींगरा मौके पर पहुंचे, मगर प्रदर्शनकारी कोई भी बात सुनने को तैयार नही थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उन्हें लिखित में निर्माण कार्य बंद करने का आदेश नहीं मिलेगा, तब तक प्रदर्शन चलता रहेगा। इसके बाद एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों को अपने कार्यालय में बुलाकर लिखित में आदेश दिया कि विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाई रखी जाएगी। प्रदर्शन में विनोद खजूरिया, सचिन गुप्ता, नंद किशोर मल्होत्रा, राजेंद्र शर्मा, पवन देव सिंह, रमेश बारिया आदि शामिल रहे।
इसलिए हुआ विवाद : पीर बाबा के साथ वाली जमीन खसरा नंबर 204 है। राजस्व रिकार्ड के अनुसार वर्ष 1971 तक इस जमीन पर एक स्कूल था। इसके बाद 1988 तक यह जमीन रकवा सरकार हो गई, लेकिन उसके बाद इस जमीन को औकाफ के नाम कर दिया गया। वर्ष 2014 में बशीर अहमद को दुकान बनाने के लिए दो मरला जमीन आवंटित कर दी गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की थी कि इस जमीन पर दुकानों का निर्माण कार्य तुरंत बंद कराया जाए और इसे औकाफ से वापस लेकर स्टेट लैंड घोषित किया जाए।