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कोरोना की तीसरी लहर में लैब होने के बाद भी नहीं हो पा रहे कोरोना टेस्ट
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उधमपुर। जिला अस्पताल में पांच महीने पहले आरटीपीसीआर कोरोना जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित किए जाने के बाद भी उधमपुर में जांच नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य विभाग को हर रोज छह सौ से अधिक सैंपल जम्मू भेजने पड़ रहे हैं, और चार दिन बाद रिपोर्ट मिल रही है।
करीब तीन सप्ताह से जिला कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहा है। हर रोज सौ से अधिक लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के लिए जांच करना सबसे बड़ी चुनौती है। संक्रमण की सटीक पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी है। इसके लिए आज भी उधमपुर जम्मू पर निर्भर है। पांच महीने पहले विभाग ने जिला अस्पताल में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर आरटीपीसीआर प्रयोगशाला स्थापित की थी। लेकिन, स्टाफ न होने के कारण इसको शुरू नहीं किया जा सका।
करीब डेढ़ महीना पहले जम्मू से एक टीम उधमपुर भेजी गई थी। विभाग ने उपायुक्त से प्रयोगशाला का उद्घाटन करवा कर इसको शुरू करने का दावा किया। विभाग का दावा था कि इसमें हर रोज करीब सौ लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा सकेंगे। साथ ही उधमपुर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। लेकिन, कुछ दिनों बाद प्रयोगशाला को बंद कर दिया गया। वह अभी तक बंद ही है। कोरोना की तीसरी लहर में जिले में हर रोज छह सौ से अधिक लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट जम्मू से मिल रही है, इसलिए चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। तब तक संक्रमित समाज के बीच रह रहा है। इससे संक्रमण बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
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अपनी प्रयोगशाला शुरू करने को लेकर प्रयास चल रहे हैं। स्टाफ न होने के कारण ही इसको शुरू नहीं किया जा रहा है। लेकिन, तीन से चार दिन के अंदर प्रयोगशाला को शुरू कर दिया जाएगा। इसकी तैयारी की जा चुकी है। इसके शुरू होने के बाद हर रोज करीब पांच सौ लोगों के आसानी से आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा सकेंगे।
- डा. मोहम्मद यासीन, जिला कोरोना संक्रमण नोडल अधिकारी
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करीब तीन सप्ताह से जिला कोरोना की तीसरी लहर से जूझ रहा है। हर रोज सौ से अधिक लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के लिए जांच करना सबसे बड़ी चुनौती है। संक्रमण की सटीक पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी है। इसके लिए आज भी उधमपुर जम्मू पर निर्भर है। पांच महीने पहले विभाग ने जिला अस्पताल में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर आरटीपीसीआर प्रयोगशाला स्थापित की थी। लेकिन, स्टाफ न होने के कारण इसको शुरू नहीं किया जा सका।
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करीब डेढ़ महीना पहले जम्मू से एक टीम उधमपुर भेजी गई थी। विभाग ने उपायुक्त से प्रयोगशाला का उद्घाटन करवा कर इसको शुरू करने का दावा किया। विभाग का दावा था कि इसमें हर रोज करीब सौ लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा सकेंगे। साथ ही उधमपुर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। लेकिन, कुछ दिनों बाद प्रयोगशाला को बंद कर दिया गया। वह अभी तक बंद ही है। कोरोना की तीसरी लहर में जिले में हर रोज छह सौ से अधिक लोगों के आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट जम्मू से मिल रही है, इसलिए चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। तब तक संक्रमित समाज के बीच रह रहा है। इससे संक्रमण बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
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अपनी प्रयोगशाला शुरू करने को लेकर प्रयास चल रहे हैं। स्टाफ न होने के कारण ही इसको शुरू नहीं किया जा रहा है। लेकिन, तीन से चार दिन के अंदर प्रयोगशाला को शुरू कर दिया जाएगा। इसकी तैयारी की जा चुकी है। इसके शुरू होने के बाद हर रोज करीब पांच सौ लोगों के आसानी से आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा सकेंगे।
- डा. मोहम्मद यासीन, जिला कोरोना संक्रमण नोडल अधिकारी