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नगर परिषद नहीं कर पा रही देविका घाट का रख रखाव
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उधमपुर: देविका तट पर बने पार्कों का दृश्य.
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। देविका परियोजना के तहत करोड़ों की लागत से तैयार किए देविका घाट के रख रखाव के लिए नगर परिषद को कर्मचारी और फंड नहीं मिल रहा है। इसके चलते घाट की देखभाल सिर्फ सफाई तक ही सीमित है।
देविका परियोजना के तहत करीब 12 करोड़ की लागत से देविका घाट का सौंदर्यीकरण किया गया है। इसकी सुंदरता अब देखते ही बन रही है। यूईईडी ने सौंदर्यीकरण का काम करने के बाद 17 दिसंबर को इसको नप को सौंप दिया था। लेकिन, नप के पास इसके रख रखाव के लिए कर्मचारी ही नहीं हैं। मौजूदा कर्मचारियों से ही नप काम चलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही।
करीब दो महीने से नप घाटों की सफाई कर उन्हें सुंदर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह सफाई भी ठीक से नहीं की जाती। इसके अलावा पौधों की देखभाल, फुटपाथ का रख रखाव, आदि काम श्रीराम भरोसे हैं। समय पर बेहतर पोषण न मिल पाने से घाटों की सुंदरता अब फीकी हो चली है।
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नप को चाहिए 12 से 13 कर्मचारी
नप के अनुसार देविका घाट की देखभाल के लिए हर महीने करीब एक लाख रुपये की जरूरत है। देविका घाट पर कई कीमती चीजें मौजूद हैं। इनके रख रखाव के लिए करीब छह गार्ड, पार्क के रख रखाव के लिए तीन माली, लाइटों के रख रखाव के लिए एक इलेक्ट्रिशियन, सफाई व्यवस्था के लिए तीन सफाई कर्मचारी और 10 सीसीटीवी की जरूरत है। सीसीटीवी से ही देविका घाट की सुरक्षा को पुख्ता बनाया जा सकता है।
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घाट के सुंदरता देखने पहुंच रहे सैकड़ों लोग
देविका घाट की सुंदरता को देखने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। लेकिन, इनको घाट पर पानी के अलावा और कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। घाट पर चंद लोगों के ही बैठने की सुविधा है। साथ ही खाने पीने की वस्तुओं की भी कोई स्टाल नहीं है।
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नगर परिषद के पास कर्मचारियों की लगातार कमी होती जा रही है। कुछ दिन पहले ही एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दो सेवानिवृत्त हो गए। नए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। देविका घाट के रख रखाव के लिए न तो अभी तक पैसा मिला है, और न ही नए कर्मचारी मिल पाए हैं।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, नगर परिषद अध्यक्ष, उधमपुर
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देविका परियोजना के तहत करीब 12 करोड़ की लागत से देविका घाट का सौंदर्यीकरण किया गया है। इसकी सुंदरता अब देखते ही बन रही है। यूईईडी ने सौंदर्यीकरण का काम करने के बाद 17 दिसंबर को इसको नप को सौंप दिया था। लेकिन, नप के पास इसके रख रखाव के लिए कर्मचारी ही नहीं हैं। मौजूदा कर्मचारियों से ही नप काम चलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही।
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करीब दो महीने से नप घाटों की सफाई कर उन्हें सुंदर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह सफाई भी ठीक से नहीं की जाती। इसके अलावा पौधों की देखभाल, फुटपाथ का रख रखाव, आदि काम श्रीराम भरोसे हैं। समय पर बेहतर पोषण न मिल पाने से घाटों की सुंदरता अब फीकी हो चली है।
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नप को चाहिए 12 से 13 कर्मचारी
नप के अनुसार देविका घाट की देखभाल के लिए हर महीने करीब एक लाख रुपये की जरूरत है। देविका घाट पर कई कीमती चीजें मौजूद हैं। इनके रख रखाव के लिए करीब छह गार्ड, पार्क के रख रखाव के लिए तीन माली, लाइटों के रख रखाव के लिए एक इलेक्ट्रिशियन, सफाई व्यवस्था के लिए तीन सफाई कर्मचारी और 10 सीसीटीवी की जरूरत है। सीसीटीवी से ही देविका घाट की सुरक्षा को पुख्ता बनाया जा सकता है।
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घाट के सुंदरता देखने पहुंच रहे सैकड़ों लोग
देविका घाट की सुंदरता को देखने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। लेकिन, इनको घाट पर पानी के अलावा और कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। घाट पर चंद लोगों के ही बैठने की सुविधा है। साथ ही खाने पीने की वस्तुओं की भी कोई स्टाल नहीं है।
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नगर परिषद के पास कर्मचारियों की लगातार कमी होती जा रही है। कुछ दिन पहले ही एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दो सेवानिवृत्त हो गए। नए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। देविका घाट के रख रखाव के लिए न तो अभी तक पैसा मिला है, और न ही नए कर्मचारी मिल पाए हैं।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, नगर परिषद अध्यक्ष, उधमपुर

उधमपुर: देविका तट पर बने पार्कों का दृश्य.- फोटो : UDHAMPUR