{"_id":"5f7b6d638ebc3e9beb593a85","slug":"bycott-of-back-to-village-in-udhampur-udhampur-news-jmu2201442166","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक साल से समाधान नहीं, सरपंच बोले-भिखारी नहीं हैं जो बार-बार लगाएं गुहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक साल से समाधान नहीं, सरपंच बोले-भिखारी नहीं हैं जो बार-बार लगाएं गुहार
विज्ञापन
उधमपुर। खंड विकास कार्यालय उधमपुर के अधीन आने वाले खरूनियां पंचायत के पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बैक-टू-विलेज अभियान का बहिष्कार कर दिया। पंचायत के किसी प्रतिनिधि अथवा आम व्यक्ति ने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। पंचायत खरूनियां के सरपंच पूरन ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान पंचायत के भूमि राजमार्ग में आई थी। यह भूमि शामलाट थी, जिसका पंचायत को मुआवजा मिलना था, लेकिन अभी तक नहीं मिल पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजे से बचने के लिए प्रशासन ने जमीन का स्टेट्स ही बदल दिया। रिपोर्ट में शामलाट जमीन को नाला, रास्ते के रूप में बदल दिया गया, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2019 को पंचायत के एडीसी उधमपुर के समक्ष इस संबंध में एक पत्र भी दिया था कि पंचायत को पैसा जारी किया जाए। इसके बाद कई बार कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अभी तक मसले का समाधान नहीं हो सका। ऐसे में सरकार के ऐसे कार्यक्रमों का लाभ क्या है?
सरपंच ने कहा कि बैक-टू-विलेज कार्यक्रम से पहले जनसुनवाई अभियान शुरू हुआ था। इसमें उपायुक्त उधमपुर पंचायत में पहुंचे थे। उनके समक्ष भी मुआवजे के मुद्दे को उठाया गया, लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। ऐसे में पंचायत ने कार्यक्रम का बहिष्कार करना ही उचित समझा और इसमें हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पंचायत के प्रतिनिधि भिखारी नहीं हैं, जो बार-बार अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाते रहें। अगर पंचायत की ओर से कुछ आया है तो अधिकारियों को उस पर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन लापरवाह अधिकारियों के कारण ही पंचायती राज संस्थान कमजोर हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजे से बचने के लिए प्रशासन ने जमीन का स्टेट्स ही बदल दिया। रिपोर्ट में शामलाट जमीन को नाला, रास्ते के रूप में बदल दिया गया, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2019 को पंचायत के एडीसी उधमपुर के समक्ष इस संबंध में एक पत्र भी दिया था कि पंचायत को पैसा जारी किया जाए। इसके बाद कई बार कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अभी तक मसले का समाधान नहीं हो सका। ऐसे में सरकार के ऐसे कार्यक्रमों का लाभ क्या है?
विज्ञापन
सरपंच ने कहा कि बैक-टू-विलेज कार्यक्रम से पहले जनसुनवाई अभियान शुरू हुआ था। इसमें उपायुक्त उधमपुर पंचायत में पहुंचे थे। उनके समक्ष भी मुआवजे के मुद्दे को उठाया गया, लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। ऐसे में पंचायत ने कार्यक्रम का बहिष्कार करना ही उचित समझा और इसमें हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पंचायत के प्रतिनिधि भिखारी नहीं हैं, जो बार-बार अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाते रहें। अगर पंचायत की ओर से कुछ आया है तो अधिकारियों को उस पर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन लापरवाह अधिकारियों के कारण ही पंचायती राज संस्थान कमजोर हो रहे हैं।
विज्ञापन