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राशन डिपो में आटे की जगह गेहूं मिलने पर फूटा गुस्सा
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उधमपुर। कोरोना कर्फ्यू के बीच गरीब लोगों को खोनेपीने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वहीं, अब राशन डिपों में उन्हें आटा नहीं मिलने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को भी वार्ड तीन के राशन डिपो में आटा और चावल की जगह गेहूं देने पर लोगों का सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर गेहूं की जगह आटा व चावल देने की मांग उठाई ताकि बच्चों को दो वक्त की रोटी खिला सकें।
प्रदर्शनकारियों में शामिल पिंकी देवी ने कहा कि मई माह में उधमपुर के लगभग सभी सरकारी राशन डिपो पर बीपीएल परिवारों को आटा व चावल की जगह गेहूं दी जा रही है। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह गेहूं का क्या करें। इसे कहां ले जाकर पिसवाएं और फिर आटा लाकर अपने बच्चों को रोटी खिलाएं। एक तरफ सरकार ने कोरोना कर्फ्यू लगाकर लोगों के आवागमन पर पाबंदी लगा दी है और वहीं अब बीपीएल परिवारों को राशन डिपो पर गेहूं देकर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर ऐसा ही रहा तो गरीब परिवारों के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। क्योंकि कोरोना कर्फ्यू की वजह से पहले ही कामकाज बंद हैं और अब खानेपीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। महंगाई ने बुरा हाल किया है।
घरेलू चीजों सहित गैस सिलिंडर के दाम आसमान छू रहे हैं। सरकार महंगाई को कम करने की बजाए गरीबों को मिटाने पर आमादा है। कोरोना संकट के बीच उन्हें राहत नहीं मिल रही है। अब राशन डिपो में आटा व चावल देना बंद कर गेहूं दिया जा रहा है। सरकार को खुद सोचना चाहिए कि कोरोना संकट में नगर में रहने वाले गरीब लोग कहां गेहूं पिसवाएंगे। ऐसे तो उनके बच्चे भूखे मर जाएंगे। इसलिए सरकार से मांग है कि जल्द राशन डिपूओं से बीपीएल परिवारों को पहले की तरह आटा व चावल दिया जाए अन्यथा वह सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल पिंकी देवी ने कहा कि मई माह में उधमपुर के लगभग सभी सरकारी राशन डिपो पर बीपीएल परिवारों को आटा व चावल की जगह गेहूं दी जा रही है। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह गेहूं का क्या करें। इसे कहां ले जाकर पिसवाएं और फिर आटा लाकर अपने बच्चों को रोटी खिलाएं। एक तरफ सरकार ने कोरोना कर्फ्यू लगाकर लोगों के आवागमन पर पाबंदी लगा दी है और वहीं अब बीपीएल परिवारों को राशन डिपो पर गेहूं देकर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर ऐसा ही रहा तो गरीब परिवारों के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। क्योंकि कोरोना कर्फ्यू की वजह से पहले ही कामकाज बंद हैं और अब खानेपीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। महंगाई ने बुरा हाल किया है।
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घरेलू चीजों सहित गैस सिलिंडर के दाम आसमान छू रहे हैं। सरकार महंगाई को कम करने की बजाए गरीबों को मिटाने पर आमादा है। कोरोना संकट के बीच उन्हें राहत नहीं मिल रही है। अब राशन डिपो में आटा व चावल देना बंद कर गेहूं दिया जा रहा है। सरकार को खुद सोचना चाहिए कि कोरोना संकट में नगर में रहने वाले गरीब लोग कहां गेहूं पिसवाएंगे। ऐसे तो उनके बच्चे भूखे मर जाएंगे। इसलिए सरकार से मांग है कि जल्द राशन डिपूओं से बीपीएल परिवारों को पहले की तरह आटा व चावल दिया जाए अन्यथा वह सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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