{"_id":"31-39792","slug":"Udhampur-39792-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिनी स्टेडियम की हालत सुधारने के दावे नजर आ रहे खोखले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिनी स्टेडियम की हालत सुधारने के दावे नजर आ रहे खोखले
Udhampur
Updated Sat, 26 Oct 2013 05:42 AM IST
विज्ञापन
उधमपुर। मिनी स्टेडियम स्थित बैडमिंटन हाल का 14.5 लाख रुपये खर्च करके मरम्मत का कार्य किया गया। इसके बावजूद मिनी स्टेडियम कबूतरखाना बना हुआ है। खिलाड़ियों व खेल शिक्षकों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की तरफ से किया गया मरम्मत का कार्य सिर्फ औपचारिकता नजर आ रहा है। मरम्मत और पेंट करके हालत सुधारने के दावे खोखले नजर आ रहे हैं। वहां आज भी कबूतर पहले की तरह डेरा डाले हुए हैं।
वर्ष 2008 में सरकार की तरफ से बैडमिंटन हाल के कायाकल्प के लिए 14.5 लाख रुपये की राशि खेल विभाग को जारी की गई थी। खेल विभाग ने इस राशि को पीडब्ल्यूडी के हवाले कर दिया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा जल्द काम शुरू करने की बात कही जाती रही, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया। 2011 में काम शुरू करने का समय आया, तो पीडब्ल्यूडी की तरफ से हाल के कायाकल्प के लिए 14.5 लाख रुपये की राशि को कम बताया। इसके बाद बैडमिंटन हॉल के कायाकल्प का कार्य अधर में लटक गया। 2012 में डीसी ने मिनी स्टेडियम का दौरा किया और खेल शिक्षकों व खिलाड़ियों ने समस्या को उनके सामने रखा।
डीसी ने पूरी बात सुनने के बाद पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिए गए कि इस राशि से अगर बैडमिंटन हाल की कायाकल्प नहीं हो सकती है, तो इससे मरम्मत का कार्य करके बैडमिंटन की हालत को सुधारा जाए। करीब तीन महीने पहले पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत का कार्य शुरू किया।
विज्ञापन
मरम्मत के कार्य में सबसे पहले बैडमिंटन हाल की खिड़कियों को बंद करके दीवारें खड़ी कर दी गईं। साथ ही औपचारिकता के लिए छत की कुछ मरम्मत की गईं। पूरे हाल में नए सिरे से पेंट करके मरम्मत का कार्य पूरा करके बैडमिंटन हाल को खेल विभाग को सौंप दिया है।
विज्ञापन
वर्ष 2008 में सरकार की तरफ से बैडमिंटन हाल के कायाकल्प के लिए 14.5 लाख रुपये की राशि खेल विभाग को जारी की गई थी। खेल विभाग ने इस राशि को पीडब्ल्यूडी के हवाले कर दिया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा जल्द काम शुरू करने की बात कही जाती रही, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया। 2011 में काम शुरू करने का समय आया, तो पीडब्ल्यूडी की तरफ से हाल के कायाकल्प के लिए 14.5 लाख रुपये की राशि को कम बताया। इसके बाद बैडमिंटन हॉल के कायाकल्प का कार्य अधर में लटक गया। 2012 में डीसी ने मिनी स्टेडियम का दौरा किया और खेल शिक्षकों व खिलाड़ियों ने समस्या को उनके सामने रखा।
विज्ञापन
डीसी ने पूरी बात सुनने के बाद पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिए गए कि इस राशि से अगर बैडमिंटन हाल की कायाकल्प नहीं हो सकती है, तो इससे मरम्मत का कार्य करके बैडमिंटन की हालत को सुधारा जाए। करीब तीन महीने पहले पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत का कार्य शुरू किया।
विज्ञापन
मरम्मत के कार्य में सबसे पहले बैडमिंटन हाल की खिड़कियों को बंद करके दीवारें खड़ी कर दी गईं। साथ ही औपचारिकता के लिए छत की कुछ मरम्मत की गईं। पूरे हाल में नए सिरे से पेंट करके मरम्मत का कार्य पूरा करके बैडमिंटन हाल को खेल विभाग को सौंप दिया है।