पाकिस्तान के दो बड़े आतंकी समूह सुरंग के जरिए जम्मू क्षेत्र में करना चाहते हैं घुसपैठ, ये है उनका खतरनाक प्लान

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 29 Aug 2020 05:21 PM IST
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Tunnel in Samba - फोटो : BSF

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सार

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक बड़े पुलिस अधिकारी के अनुसार, कश्मीर में जब से आतंकियों के लगातार मारे जाने का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से पाकिस्तान में बैठे इनके सरगनाओं की नींद उड़ गई है...

विस्तार

कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ चल रहे नियमित ऑपरेशनों में सुरक्षा बलों को मिल रही कामयाबी से पाकिस्तान में बैठे सरगना परेशान हो गए हैं। घाटी में आतंकियों की नई भर्तियों पर भी काफी हद तक रोक लग चुकी है। पाकिस्तान के दो बड़े आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अब जम्मू संभाग में आतंकी हमले करने की योजना बनाई है।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक बड़े पुलिस अधिकारी के अनुसार, कश्मीर में जब से आतंकियों के लगातार मारे जाने का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से पाकिस्तान में बैठे इनके सरगनाओं की नींद उड़ गई है। अब ये जम्मू संभाग में अपनी गतिविधियां शुरू करना चाह रहे हैं। इस प्रयास में आठ से दस आतंकी पकड़े जा चुके हैं। घुसपैठ के दो प्रयास भी विफल किए गए हैं।
ये आतंकी जम्मू के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत में घुसने का प्रयास करते हैं। अब ये सुरंग तैयार करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। बीएसएफ ने पहले भी ऐसी कई सुरंगों का पता लगाया था। ताजा मामला, जो कि सांबा सेक्टर में देखने को मिला है, वहां 25 मीटर गहरी सुरंग मिली है। हालांकि अभी तक सुरक्षा बलों की चौकसी की वजह से ये आतंकी किसी बड़े हमले को अंजाम नहीं दे सके हैं।
 
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पिछले साल से आतंकियों ने जम्मू में सक्रियता बढ़ाई है। कश्मीर में तकरीबन हर जगह ये आतंकी सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बन रहे हैं। वहां नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तानी सीमा के भीतर जो लॉन्चिंग पैड हैं, वहां आतंकी भारी संख्या में जमा हैं। उन्हें भारतीय सीमा में नहीं धकेला जा सका है।

यही वजह है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा अब जम्मू संभाग में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। पुलिस अधिकारी बताते हैं, इस वक्त बॉर्डर पर खास ध्यान देना होगा, क्योंकि इनकी घुसपैठ वहीं से होती है। सुरंग बनाने का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई सुरंगें देखी गई हैं।

पुलवामा में सीआरपीएफ बस को उड़ाने का प्लान तैयार करने वाला आतंकी मोहम्मद उमर फारूख भी करीब डेढ़ साल तक अफगानिस्तान में रहा था। ट्रेनिंग लेने के बाद वह 2018 में जम्मू के सांबा सेक्टर से ही भारत में घुसा था। जम्मू संभाग में नई भर्ती के दो मामलों का सही वक्त पर पता चल गया। कई आतंकी पकड़े गए।

पूछताछ में मालूम हुआ कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा, इस इलाके में नई भर्ती को लेकर खतरनाक प्लान तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण युवाओं को बहका कर उन्हें आतंकवाद के रास्ते पर लाना चाहते हैं। सांबा सेक्टर के आसपास इन संगठनों की गतिविधियां देखी गई थीं। स्कूल कालेजों के युवाओं को अपने संगठन में भर्ती कर उन्हें हैंड ग्रेनेड फेंकने का प्रशिक्षण देते हैं।

पांच सौ मीटर के दायरे में सुरक्षा बलों की मूवमेंट भी पूछी जाती है। दोनों आतंकी संगठनों का प्लान है कि वे इस इलाके में नए लड़कों को भर्ती कर उनके द्वारा भीड़ वाली जगहों पर हैंड ग्रेनेड से हमला कराया जाए। बीएसएफ जम्मू के अधिकारी बताते हैं कि पिछले एक दशक में यहां आधा दर्जन से ज्यादा सुरंग मिल चुकी हैं। साल 2012 में तो ऐसी सुरंगों का पता लगाने के लिए मेक्सिको की तकनीक पर उपकरण खरीदे जाने की योजना भी काम शुरू हुआ था।

हालांकि बाद में तकनीकी कमेटी ने उन उपकरणों को सही नहीं पाया। बाद में यह निर्णय लिया गया कि सुरंगों का पता लगाने के लिए लोकल इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत बनाना होगा। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के पास जो लोग खेती करते हैं, वे ऐसी घटनाओं पर सबसे पैनी निगाह रख सकते हैं। अगर वहां इंटेलिजेंस नेटवर्क स्थापित हो जाता है तो सुरंग का समय रहते पता चल जाएगा। कुछ हुआ भी ऐसे ही। उसके बाद कई सुरंगों का पता लगाया गया है।
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