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विश्व महिला दिवस: कश्मीर की कुरत उल ऐन ने युवतियों की शादी का उठाया बीड़ा, अब तक 300 से ज्यादा कश्मीरी युवतियों का बसाया घर

Tue, 08 Mar 2022 03:31 AM IST
Vikas Kumar अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 08 Mar 2022 03:31 AM IST
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सार
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि शुरू में वह एजुकेशन, समुदाय पर आधारित पुनर्वास, अनाथ बच्चों के लिए काम कर रही थीं और श्रीनगर, बड़गाम जिले के कई हिस्सों में जाती थीं। उन्होंने जब यह पाया कि कई युवतियां गरीबी के चलते और कई अनाथ होने के कारण शादी नहीं कर पाई हैं। पहले तीन-चार लड़कियों की शादी करवाई, लेकिन बाद में सर्वे किया तो बड़ी संख्या में ऐसी युवतियां पाई गईं, जिनकी शादियां नहीं हो पा रही थीं। 
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world women's day kurat ul ain of kashmir has married more than 300 kashmiri girls so far
कुरत उल ऐन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घाटी में एक समाजसेवी संस्था (एनजीओ) चला रहीं कुरत उल ऐन ने कश्मीरी समाज में दहेज प्रथा, वाजवान, शादी के तौर तरीके आदि जैसी परेशानियों के चलते कश्मीरी युवतियों की शादी में हो रही देरी को दूर करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने गरीब और अनाथ युवतियों के सामूहिक विवाह की एक पक्रिया 2018 में शुरू की थी और अब तक 300 से अधिक युवतियों का विवाह करवा चुकी हैं। 


अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि शुरू में वह एजुकेशन, समुदाय पर आधारित पुनर्वास, अनाथ बच्चों के लिए काम कर रही थीं और श्रीनगर, बड़गाम जिले के कई हिस्सों में जाती थीं। उन्होंने जब यह पाया कि कई युवतियां गरीबी के चलते और कई अनाथ होने के कारण शादी नहीं कर पाई हैं। पहले तीन-चार लड़कियों की शादी करवाई, लेकिन बाद में सर्वे किया तो बड़ी संख्या में ऐसी युवतियां पाई गईं, जिनकी शादियां नहीं हो पा रही थीं। घाटी में ऐसा पहली बार हुआ जब लड़कियों की सामूहिक शादियां करवाई गई हो। लोगों ने भी इस प्रयास की सराहना की और यह सिलसिला आज भी जारी है। 


अभी तक चार बार सामूहिक विवाह के समारोह कराए गए हैं और करीब 300 से अधिक शादियां करवाई गई हैं। सबसे बड़ी दिक्कत कश्मीरी समाज में वाजवान की है, जिसमें कश्मीरी शादियों में सबसे ज्यादा खर्च होता है उसे भी हटा दिया गया। शादियों में केवल केहवा, बेकरी और बिरयानी रखी गई। उन्होंने पांचवां सामूहिक विवाह तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ विधवाओं के लिए रखा है। कहा कि ऐसी महिलाओं का आज के समाज में गुजर बसर करना मुश्किल है, इसलिए अगला प्रयास इसका है।

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