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पुणे से एलओसी पहुंची महिलाएं, जवानों संग कश्मीरी भाइयों को बांधी राखी
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कश्मीरी युवाओँ को राखी बांधती पुणे से आई महिलाएं।
श्रीनगर। पुणे से एलओसी पर माछिल सेक्टर पहुंची महिलाओं ने रक्षा बंधन पर सेना के जवानों के साथ कश्मीरी युवकों को भी राखी बांधकर यहां पहली बार त्योहार मनाया। इन महिलाओं ने 19 से 22 अगस्त तक माछिल, पुष्वरी, कटवार और डबपाल के सुदूर गांवों में जाकर राखियां बांधी।
सेना के समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम कुछ युवा महिलाओं की पहल के कारण अनूठा बन गया। पुणे की रहने वाली गौरी हेमंत किनिकर के साथ उनकी मां साधना किनिकर, गौरी की बहन शताक्षी किनिकर और साथी शिवानी जोशी और लॉ कॉलेज पुणे की साई नंदुकर ने न केवल अपने फौजी भाइयों को बल्कि स्थानीय कश्मीरी भाइयों को भी राखी बांधी। इन महिलाओं ने स्वेच्छा से इस नेक काम के लिए आगे आने का फैसला किया।
समारोह का आयोजन माछिल गांव में किया गया जहां गणमान्य नागरिक, सेना अधिकारी, स्थानीय प्रमुख और ग्रामीण मौजूद थे। रविवार को कार्यक्रम का समापन माछिल गैरीसन में रक्षा बंधन समारोह के साथ हुआ। इस मौके पर महिलाओं ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनके कश्मीरी भाइयों को देश के बारे में और जानने तथा उन्हें इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने का एहसास कराने की जरूरत है। माछिल घाटी की युवा लड़कियों द्वारा प्रगति और आत्म-जागरूकता के प्रति जिस तरह की जिज्ञासा दिखाई गई है, उसे देखकर वह बहुत खुश हैं। अपनी बेटियों को जवानों और युवाओं को राखी बांधते देख साधना की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि मुझे उनकी मां होने पर बहुत गर्व है। इस तरह के आयोजन कश्मीरियों और देश के दूसरे हिस्सों में रहने वालों के बीच की खाई को पाटने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेंगे।
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माछिल गांव के सरपंच ने कहा, हम बहुत खुश हैं और हमारी भावनाएं अभिभूत हैं क्योंकि यह पहली बार हमारे गांव में हमें दिखाया गया है, हमें इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने पर बहुत गर्व है।
ऑनलाइन अभियान चलाया
गौरी किनिकर और उनके सहयोगी का इस काम के लिए दूरदराज के इलाके में आने का फैसला आसान नहीं था। इन युवा महिलाओं ने इस काम के लिए ऑनलाइन अभियान शुरू किया, धन जुटाया। न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत से बड़ी संख्या में लोगों ने स्वेच्छा से उनके अभियान में योगदान दिया।
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सेना के समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम कुछ युवा महिलाओं की पहल के कारण अनूठा बन गया। पुणे की रहने वाली गौरी हेमंत किनिकर के साथ उनकी मां साधना किनिकर, गौरी की बहन शताक्षी किनिकर और साथी शिवानी जोशी और लॉ कॉलेज पुणे की साई नंदुकर ने न केवल अपने फौजी भाइयों को बल्कि स्थानीय कश्मीरी भाइयों को भी राखी बांधी। इन महिलाओं ने स्वेच्छा से इस नेक काम के लिए आगे आने का फैसला किया।
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समारोह का आयोजन माछिल गांव में किया गया जहां गणमान्य नागरिक, सेना अधिकारी, स्थानीय प्रमुख और ग्रामीण मौजूद थे। रविवार को कार्यक्रम का समापन माछिल गैरीसन में रक्षा बंधन समारोह के साथ हुआ। इस मौके पर महिलाओं ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनके कश्मीरी भाइयों को देश के बारे में और जानने तथा उन्हें इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने का एहसास कराने की जरूरत है। माछिल घाटी की युवा लड़कियों द्वारा प्रगति और आत्म-जागरूकता के प्रति जिस तरह की जिज्ञासा दिखाई गई है, उसे देखकर वह बहुत खुश हैं। अपनी बेटियों को जवानों और युवाओं को राखी बांधते देख साधना की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि मुझे उनकी मां होने पर बहुत गर्व है। इस तरह के आयोजन कश्मीरियों और देश के दूसरे हिस्सों में रहने वालों के बीच की खाई को पाटने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेंगे।
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माछिल गांव के सरपंच ने कहा, हम बहुत खुश हैं और हमारी भावनाएं अभिभूत हैं क्योंकि यह पहली बार हमारे गांव में हमें दिखाया गया है, हमें इस महान राष्ट्र का हिस्सा होने पर बहुत गर्व है।
ऑनलाइन अभियान चलाया
गौरी किनिकर और उनके सहयोगी का इस काम के लिए दूरदराज के इलाके में आने का फैसला आसान नहीं था। इन युवा महिलाओं ने इस काम के लिए ऑनलाइन अभियान शुरू किया, धन जुटाया। न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत से बड़ी संख्या में लोगों ने स्वेच्छा से उनके अभियान में योगदान दिया।