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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   The dark reality of Jammu's demographic shift exposed before the Navlekar Committee.

J&K: बठिंडी से बनिहाल तक घुसपैठ का जाल, नावलेकर समिति के सामने खुला जम्मू के जनसांख्यिकीय बदलाव का काला चिट्ठा

Tue, 11 Aug 2026 12:19 PM IST
Nikita Gupta अभिषेक राज अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अभिषेक राज अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Tue, 11 Aug 2026 12:19 PM IST
सार

नावलेकर समिति के सामने जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की बसावट और उससे जुड़े जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी और दस्तावेज पेश किए।

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The dark reality of Jammu's demographic shift exposed before the Navlekar Committee.
सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

जम्मू को घुसपैठियों की शरणस्थली बनाकर जनसांख्यिकीय बदलाव की साजिश का काला चिट्ठा सोमवार को नावलेकर समिति के सामने एक-एक कर खुलना शुरू हुआ। समिति के दौरे के पहले दिन जम्मू के होटल रेडिसन में शासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से प्रस्तुति देकर बताया गया कि जम्मू संभाग के साथ ही पाकिस्तान बॉर्डर से सटे कश्मीर के संवेदनशील जिलों में घुसपैठिए सिस्टम की मिलीभगत से आबाद हुए और आज सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर रहे हैं।

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सबसे चौंकाने और सचेत करने वाली स्थिति जम्मू संभाग में दिखी। यहां जम्मू शहर से लखनपुर तक व्यापक बदलाव की जानकारी दी गई। जम्मू शहर के आसपास बीते 10 वर्षों में 125 से अधिक धर्मस्थलों के बारे में बताया गया। बठिंडी, सिद्धड़ा और तवी के आसपास के क्षेत्र में नए जम्मू शहर के बारे में जानकारी दी गई। सांबा, कठुआ, पुंछ, रामबन जिलों को भी संवेदनशील श्रेणी में रखा गया। सूत्रों के अनुसार समिति को बताया गया कि वर्ष 2009 से जम्मू में रोहिंग्या का आना शुरू हुआ। अब यहां इनकी संख्या बढ़कर 30 से 35 हजार हो गई है। सभी को साजिशन जम्मू में बसाया जा रहा है। दूसरे नंबर पर बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, जो जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों में फैले हुए हैं। इनमें से कुछ पाकिस्तान बॉर्डर से सटे जिलों में भी आबाद हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार सईद हुसैन (60) पहला रोहिंग्या था जो जम्मू के बठिंडी में बसा। इसके बाद रोहिंग्या का यहां आना शुरू हुआ और फिर वे शहर के अलग-अलग हिस्सों में बस गए। 2012 में इन्हें बठिंडी में एक जगह लाकर बसा दिया गया। इनके आधार कार्ड, राशन कार्ड बनवाने के साथ ही बिजली व पानी के कनेक्शन भी जारी कर दिए गए।

अधिकारियों ने केंद्रीय समिति के समक्ष अमर उजाला के ऑपरेशन पहचान का भी जिक्र किया, जिसमें हमने घुसपैठियों के पूरे नेटवर्क और उनकी बसावट की जानकारी देते हुए सात दिनों तक अभियान चलाया, जिसके बाद तीन अगस्त को 21 बांग्लादेशी रामबन जिले के बनिहाल से गिरफ्तार किए गए।

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राजनीतिक संरक्षण से दयनीय हुई है स्थिति
समिति को बताया गया कि राजनीतिक संरक्षण से तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है। जम्मू के बठिंडी में पहाड़ी ढलानों पर बड़े पैमाने पर कब्जा किया गया है, जो पहले हरे-भरे जंगल थे। कब्जाई गई पहाड़ियों, जंगलों और सरकारी जमीन पर सड़क की सुविधा देकर घुसपैठियों को आबाद कर दिया गया। कुंजवानी से नगरोटा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के दोनों ओर छन्नी से सिद्धड़ा होते हुए बजालता तक के क्षेत्र भी इस मामले में बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

यहां की स्थिति भी ठीक नहीं
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार लद्दाखी कॉलोनी-ऊपरी ठठर, पुंछ कॉलोनी-गुढ़ा ब्राह्मणा, हैदरपोरा-चिनौर, गुज्जर मोहल्ला-पलोड़ा, पुंछ कॉलोनी-बगानी रायपुर, हैदरपोरा-मालपुर, मस्जिद मोहल्ला-बर्न, कोट-लोअर काला कां, ठठर फ्लैट्स, सूखी नहर, बन तालाब, भारत नगर, कांग कोट, चक भलवाल, पटोली, पुरखू, लक्ष्मी नगर, रमजानपुरा की स्थिति भी जनसांख्यिकीय बदलाव के मामले में बिगड़ती जा रही है।

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समिति पूरे प्रदेश का जानेगी हाल
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आवाजाही से अवैध बस्तियों तक जनसांख्यिकीय बदलाव का अब पूरा हिसाब होगा। असामान्य रूप से बदल रहे जनसांख्यिकीय स्वरूप, रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठ का अध्ययन करने के लिए गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने तीन दिवसीय दौरे पर जांच शुरू कर दी है। समिति सीमा पार आवाजाही से लेकर असामान्य बसावट, विदेशी नागरिकों की पहचान, दस्तावेजों की सत्यता और आबादी में बदलाव तक का अध्ययन करेगी। रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी जाएगी। समिति बस घुसपैठ नहीं, पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाएगी। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों से घुसपैठ, पहचान, दस्तावेज, बसावट और आवाजाही की जानकारी मांगी गई है।

समिति यहां से पंजाब, उत्तर प्रदेश और फिर उत्तराखंड जाएगी। इन तीनों प्रदेशों में भी बड़ी संख्या में जनसांख्यिकीय बदलाव की बात सामने आ रही है। समिति सीमावर्ती जिलों में अचानक से बढ़ी नई सामुदायिक बस्तियों का अध्ययन भी समिति करेगी।

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