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Srinagar News: सोनमर्ग और गुलमर्ग में शुरू हुए शीतकालीन खेल पाठ्यक्रम

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Srinagar, Winter Sports Course Start, Sonmarg And Gulmarg
- जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान सिखा रहा स्कीइंग और स्नो बोर्डिंग जैसे खेल
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अमर उजाला ब्यूरो

श्रीनगर। देश में पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान ने सोनमर्ग और गुलमर्ग में अपने शीतकालीन पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। यहां स्कीइंग और स्नो बोर्डिंग जैसे खेलों का प्रशिक्षण 2 जनवरी से शुरू किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार यह पहला संस्थान है जिसने सोनमर्ग में शीतकालीन पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है जिसे 2022 में बेहद चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों में शुरू किया गया था। तबसे संस्थान लगातार सोनमर्ग में शीतकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित कर रहा है और विभिन्न स्कीइंग विषयों में प्रतिवर्ष लगभग 1,200-1,500 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित कर रहा है।
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वर्तमान में सोनमर्ग में दो स्कीइंग पाठ्यक्रम चल रहे हैं जिनमें रक्षा कर्मियों, एनसीसी कैडेटों और देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है। बेसिक स्कीइंग कोर्स-69 2 से 15 जनवरी तक चलेगा। इसमें 45 लड़कों और 22 लड़कियों सहित 67 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त 7 जनवरी से 16 जनवरी तक चलने वाले एक विशेष स्कीइंग कोर्स-11 (एनसीसी) में 31 लड़कों और 10 लड़कियों सहित 41 एनसीसी कैडेट भाग ले रहे हैं।
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साथ ही गुलमर्ग में किराए के आवास में 30 प्रतिभागियों (24 लड़के और 6 लड़कियां) के साथ एक विशेष बेसिक स्कीइंग कोर्स-05 और 30 प्रतिभागियों (23 लड़के और 7 लड़कियां) के साथ एक बेसिक स्नोबोर्डिंग कोर्स-05 भी चल रहा है। ये पाठ्यक्रम 17 जनवरी को समाप्त होंगे।
ये पाठ्यक्रम पेशेवर रूप से सावधानीपूर्वक डिजाइन किए गए हैं ताकि बुनियादी और उन्नत तकनीकी कौशल प्रदान किए जा सकें। इससे शीतकालीन खेलों में सुरक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षुओं में नेतृत्व क्षमता, लचीलापन और टीम वर्क जैसे गुणों का पोषण किया जा सके।


स्कीइंग और पर्वतारोहण के लिए यहां बेहतरीन प्राकृतिक ढलानें : कर्नल हेमचंद्र

जवाहर इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल कर्नल हेमचंद्र सिंह ने बताया कि कश्मीर के गुलमर्ग और सोनमर्ग में स्कीइंग और पर्वतारोहण गतिविधियों के लिए अब बेहतरीन प्राकृतिक ढलानें हैं। वह पिछले तीन सालों से इस संस्थान का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरान ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार हुआ है। हम पर्वतारोहण, स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, स्नोबोर्डिंग, हिमस्खलन बचाव और नदी पार करने में व्यापक कोर्स प्रदान करते हैं। पूरे भारत से बच्चे और युवा इन कौशल को सीखने के लिए हमसे जुड़ते हैं। देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कश्मीर घाटी विंटर स्पोर्ट्स के लिए बेजोड़ परिस्थितियां प्रदान करती है। चाहे वह टेक्निकल पर्वतारोहण हो या बेसिक विंटर एक्टिविटीज। भारत में बहुत कम जगहें हैं जहां ऐसी ट्रेनिंग संभव है। जम्मू-कश्मीर को प्रकृति से अनोखा आशीर्वाद मिला है।

बनाया जा रहा प्रमुख विंटर स्पोर्ट्स हब
प्रिंसिपल ने बताया कि संस्थान पिछले तीन सालों से सोनमर्ग को प्रमुख विंटर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित कर रहा है। यहां स्कीइंग गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। सिविल प्रशासन ने भी सोनमर्ग में स्कीइंग कोर्स शुरू कर दिए हैं। पर्यटक भी इस क्षेत्र में स्कीइंग सीखने में बेहद दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अच्छी स्कीइंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तीन जरूरी घटक होने चाहिए- सुरक्षित ढलान, सुलभ सड़कें और एक लिफ्ट सिस्टम। ढलान न तो बहुत ज्यादा खड़ी होनी चाहिए और न ही सपाट। शुरुआती लोगों के लिए 45 डिग्री का ढलान आदर्श होता है। एक उचित सड़क नेटवर्क पर्यटकों को लाता है और एक लिफ्ट सिस्टम उन्हें ट्रेनिंग के लिए बार-बार ऊपर चढ़ने में सक्षम बनाता है।


स्कीइंग से बढ़ती है सेना की क्षमता
कर्नल सिंह ने कहा कि सेना पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए स्कीइंग तकनीकों पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। चाहे वह सियाचिन ग्लेशियर हो या कोई भी ऊंचाई वाला इलाका, स्कीइंग सैनिकों को तेजी से और सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने में मदद करती है। स्की के नीचे अल्पाइन बाइंडिंग और स्किन्स कर्मियों को प्रभावी ढंग से चढ़ने और उतरने में मदद करती हैं। सैनिकों को तैनाती से पहले खास ऊंचाई वाली जगहों पर ट्रेनिंग दी जाती है। हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल कोर टीमों को ट्रेनिंग देता है जो बाद में पूरी बटालियन को तैयार करती है। सियाचिन और कारगिल जैसे लोकल बैटल स्कूल उनके स्किल्स को और बेहतर बनाते हैं।
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