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Srinagar News: सात दिन के भीतर हटाई जाएंगी एनएच-444 बाईपास के किनारे बनी इमारतें
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुलगाम। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-444 पर कुलगाम बाईपास के विस्तार में चली आ रही रुकावट दूर करने के लिए उपायुक्त शहजाद आलम ने वीरवार को प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया। उन्होंने हाईवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में बाधा बन रही सभी शेष इमारतों को सात दिनों के भीतर हटा दिया जाए।
यह हस्तक्षेप जिला प्रशासन और एनएच अधिकारियों के बीच विरोधाभासी दावों के सामने आने के कुछ दिनों बाद हुआ है। इससे मुआवजे, इमारतों को गिराने और प्रोजेक्ट को लागू करने के मामले में तालमेल की कमी उजागर हुई थी। उपायुक्त ने बाईपास प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और उन हिस्सों का निरीक्षण किया जहां जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया कथित तौर पर पूरी हो जाने के बावजूद व्यावसायिक और आवासीय इमारतें अभी भी खड़ी थीं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी लंबित बाधाओं को बिना किसी और देरी के हटा दिया जाए ताकि चौड़ीकरण का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके। उपायुक्त ने विशेष रूप से एनएच-444 अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शेष इमारतों को गिराने का काम एक सप्ताह के भीतर पूरा करें और तदनुसार प्रगति रिपोर्ट जमा करें।
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बाईपास प्रोजेक्ट हाल ही में सार्वजनिक बहस का विषय बन गया था जब जिला प्रशासन ने यह दावा किया था कि प्रभावित संपत्ति मालिकों को मुआवजा पहले ही वितरित किया जा चुका है जबकि एनएच-444 अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके पास इमारतों को गिराने और हटाने के कार्यों के लिए आवश्यक पर्याप्त सहयोग, जनशक्ति और रिकॉर्ड की कमी है।
इस विवाद ने जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए थे क्योंकि मुआवजा मिलने के बाद भी कई इमारतें अभी भी खड़ी थी और चौड़ीकरण का काम पूरी तरह से खाली किए गए गलियारे के बजाय उन इमारतों के चारों ओर किया जा रहा था।
जिला उपायुक्त के इस दौरे को प्रशासनिक गतिरोध को सुलझाने और एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम में तेजी लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है जिसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्षों पहले पूरी हो जाने के बावजूद बार-बार देरी हुई है।
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कुलगाम। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-444 पर कुलगाम बाईपास के विस्तार में चली आ रही रुकावट दूर करने के लिए उपायुक्त शहजाद आलम ने वीरवार को प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया। उन्होंने हाईवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में बाधा बन रही सभी शेष इमारतों को सात दिनों के भीतर हटा दिया जाए।
यह हस्तक्षेप जिला प्रशासन और एनएच अधिकारियों के बीच विरोधाभासी दावों के सामने आने के कुछ दिनों बाद हुआ है। इससे मुआवजे, इमारतों को गिराने और प्रोजेक्ट को लागू करने के मामले में तालमेल की कमी उजागर हुई थी। उपायुक्त ने बाईपास प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और उन हिस्सों का निरीक्षण किया जहां जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया कथित तौर पर पूरी हो जाने के बावजूद व्यावसायिक और आवासीय इमारतें अभी भी खड़ी थीं।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी लंबित बाधाओं को बिना किसी और देरी के हटा दिया जाए ताकि चौड़ीकरण का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके। उपायुक्त ने विशेष रूप से एनएच-444 अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शेष इमारतों को गिराने का काम एक सप्ताह के भीतर पूरा करें और तदनुसार प्रगति रिपोर्ट जमा करें।
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बाईपास प्रोजेक्ट हाल ही में सार्वजनिक बहस का विषय बन गया था जब जिला प्रशासन ने यह दावा किया था कि प्रभावित संपत्ति मालिकों को मुआवजा पहले ही वितरित किया जा चुका है जबकि एनएच-444 अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके पास इमारतों को गिराने और हटाने के कार्यों के लिए आवश्यक पर्याप्त सहयोग, जनशक्ति और रिकॉर्ड की कमी है।
इस विवाद ने जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए थे क्योंकि मुआवजा मिलने के बाद भी कई इमारतें अभी भी खड़ी थी और चौड़ीकरण का काम पूरी तरह से खाली किए गए गलियारे के बजाय उन इमारतों के चारों ओर किया जा रहा था।
जिला उपायुक्त के इस दौरे को प्रशासनिक गतिरोध को सुलझाने और एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम में तेजी लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है जिसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्षों पहले पूरी हो जाने के बावजूद बार-बार देरी हुई है।