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Srinagar News: जवाब दाखिल करने में लापरवाही पर सरकार को फटकार
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हाईकोर्ट ने चल रहे मामलों में समय पर जवाब देने का निर्देश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जवाब दाखिल करने में लापरवाही पर सरकार को शुक्रवार को फटकार लगाई। नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को एक ऐसा तंत्र बनाने का निर्देश दिया है जिससे अदालतों के सामने सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
जस्टिस वसीम सादिक नारगल की बेंच ने सरकार से एक प्रभावी और समय-सीमा वाला तंत्र तैयार करने का आग्रह किया ताकि संबंधित वकील को रिकॉर्ड तुरंत भेजा जा सके। आपत्तियां समय पर तैयार और दाखिल की जा सकें। लंबित मामलों की प्रभावी निगरानी हो सके और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके जो अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही बरतते हैं।
कोर्ट ने कहा, ऐसा तंत्र न केवल अदालतों के सामने सरकार के प्रभावी प्रतिनिधित्व में मदद करेगा बल्कि सरकार के खिलाफ कड़े आदेश पारित करने की जरूरत को भी खत्म करेगा और जनहित की रक्षा करेगा।
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कोर्ट ने यह बात अली मुहम्मद वानी बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और अन्य नामक एक मामले की सुनवाई के दौरान कही जो 22 अप्रैल को उसके सामने सूचीबद्ध था। अदालत ने जम्मू-कश्मीर के विधि सचिव को 27 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया ताकि वे अदालत को उन कदमों के बारे में अवगत करा सकें जो यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं कि सरकार से जुड़े मामलों का उचित ढंग से बचाव किया जाए और सरकार के हितों की अनदेखी न हो।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जवाब दाखिल करने में लापरवाही पर सरकार को शुक्रवार को फटकार लगाई। नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को एक ऐसा तंत्र बनाने का निर्देश दिया है जिससे अदालतों के सामने सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
जस्टिस वसीम सादिक नारगल की बेंच ने सरकार से एक प्रभावी और समय-सीमा वाला तंत्र तैयार करने का आग्रह किया ताकि संबंधित वकील को रिकॉर्ड तुरंत भेजा जा सके। आपत्तियां समय पर तैयार और दाखिल की जा सकें। लंबित मामलों की प्रभावी निगरानी हो सके और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके जो अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही बरतते हैं।
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कोर्ट ने कहा, ऐसा तंत्र न केवल अदालतों के सामने सरकार के प्रभावी प्रतिनिधित्व में मदद करेगा बल्कि सरकार के खिलाफ कड़े आदेश पारित करने की जरूरत को भी खत्म करेगा और जनहित की रक्षा करेगा।
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कोर्ट ने यह बात अली मुहम्मद वानी बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और अन्य नामक एक मामले की सुनवाई के दौरान कही जो 22 अप्रैल को उसके सामने सूचीबद्ध था। अदालत ने जम्मू-कश्मीर के विधि सचिव को 27 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया ताकि वे अदालत को उन कदमों के बारे में अवगत करा सकें जो यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं कि सरकार से जुड़े मामलों का उचित ढंग से बचाव किया जाए और सरकार के हितों की अनदेखी न हो।