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Srinagar News: सेना के प्रयास ने केरन के लोगों के चेहरों पर बिखेरी मुस्कान
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Army celebrates eid with people at Keran sector near LoC
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- एलओसी सटे गांवों के लोगों के साथ मनाई ईद, 120 परिवारों को दी गई राशन की मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे केरन सेक्टर में सेना ने स्थानीय गांव वासियों के साथ ईद का त्योहार मनाया। सेना ने लगभग 120 जरूरतमंद परिवारों के प्रति मदद का हाथ भी बढ़ाया। इन परिवारों को राशन वितरित किया गया।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि ईद पर चार पंचायत हलकों और 25 गांवों में रहने वाले करीब 120 परिवारों को जरूरी राशन की मदद दी गई। इस पहल का मकसद विधवाओं, अनाथों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक ईद की खुशियां पहुंचाना था। इस पहल का स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। परिवारों ने समय पर मिली इस मदद के लिए गहरा आभार जताया। राशन किट मिलने से न सिर्फ लोगों को भौतिक राहत मिली बल्कि उनके चेहरों पर मुस्कान और उम्मीद भी लौटी। इससे परिवारों को पूरे मान-सम्मान और खुशी के साथ ईद मनाने का मौका मिला।
यह कदम ईद के असली सार को दर्शाता है। यानी जकात, खैरात, दया-भाव और जरूरतमंदों के साथ चीजें बांटने जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना। इसके बदले में सेना ने स्थानीय लोगों से यह वादा लिया है कि वे टिकाऊ जीवन-शैली, साफ-सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण की सुरक्षा के जरिए केरन को साफ और हरा-भरा बनाए रखने में सहयोग देंगे। कार्यक्रम के दौरान जवानों ने गांव वालों के साथ खुलकर बातचीत की। वे उनके साथ त्योहार की खुशियों में शामिल हुए और आपसी जुड़ाव की भावना को मजबूत किया।
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इस सार्थक मेल-जोल से सेना और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास और सद्भावना का रिश्ता और मजबूत हुआ है। साथ ही शांति, आपसी तालमेल और एक-दूसरे की मदद करने के साझा संकल्प को भी बल मिला। इस तरह की पहल यह दिखाती हैं कि सेना सिर्फ सुरक्षा से जुड़े अपने फर्ज ही नहीं निभाती बल्कि वह समाज के कल्याण और उत्थान में भी अहम भूमिका निभाती है।
केरन में हुआ यह आयोजन इसकी याद दिलाता है कि त्योहार सिर्फ जश्न मनाने के लिए नहीं होते बल्कि वे एकता, दया-भाव और सामूहिक खुशी का भी प्रतीक होते हैं। यह कार्यक्रम खुशी और एकजुटता के माहौल में संपन्न हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे केरन सेक्टर में सेना ने स्थानीय गांव वासियों के साथ ईद का त्योहार मनाया। सेना ने लगभग 120 जरूरतमंद परिवारों के प्रति मदद का हाथ भी बढ़ाया। इन परिवारों को राशन वितरित किया गया।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि ईद पर चार पंचायत हलकों और 25 गांवों में रहने वाले करीब 120 परिवारों को जरूरी राशन की मदद दी गई। इस पहल का मकसद विधवाओं, अनाथों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक ईद की खुशियां पहुंचाना था। इस पहल का स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। परिवारों ने समय पर मिली इस मदद के लिए गहरा आभार जताया। राशन किट मिलने से न सिर्फ लोगों को भौतिक राहत मिली बल्कि उनके चेहरों पर मुस्कान और उम्मीद भी लौटी। इससे परिवारों को पूरे मान-सम्मान और खुशी के साथ ईद मनाने का मौका मिला।
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यह कदम ईद के असली सार को दर्शाता है। यानी जकात, खैरात, दया-भाव और जरूरतमंदों के साथ चीजें बांटने जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना। इसके बदले में सेना ने स्थानीय लोगों से यह वादा लिया है कि वे टिकाऊ जीवन-शैली, साफ-सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण की सुरक्षा के जरिए केरन को साफ और हरा-भरा बनाए रखने में सहयोग देंगे। कार्यक्रम के दौरान जवानों ने गांव वालों के साथ खुलकर बातचीत की। वे उनके साथ त्योहार की खुशियों में शामिल हुए और आपसी जुड़ाव की भावना को मजबूत किया।
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इस सार्थक मेल-जोल से सेना और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास और सद्भावना का रिश्ता और मजबूत हुआ है। साथ ही शांति, आपसी तालमेल और एक-दूसरे की मदद करने के साझा संकल्प को भी बल मिला। इस तरह की पहल यह दिखाती हैं कि सेना सिर्फ सुरक्षा से जुड़े अपने फर्ज ही नहीं निभाती बल्कि वह समाज के कल्याण और उत्थान में भी अहम भूमिका निभाती है।
केरन में हुआ यह आयोजन इसकी याद दिलाता है कि त्योहार सिर्फ जश्न मनाने के लिए नहीं होते बल्कि वे एकता, दया-भाव और सामूहिक खुशी का भी प्रतीक होते हैं। यह कार्यक्रम खुशी और एकजुटता के माहौल में संपन्न हुआ।