फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Srinagar, After 18 Years, Sonmarg Development Authority, Not Got Government Land

Srinagar News: 18 साल बाद भी सोनमर्ग विकास प्राधिकरण को नहीं मिली 7,674 कनाल सरकारी जमीन

विज्ञापन
Srinagar, After 18 Years, Sonmarg Development Authority, Not Got Government Land
- राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, स्थानीय हितधारकों ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की
विज्ञापन


गांदरबल। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) को 7,674 कनाल और 17 मरला सरकारी भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दिए जाने के 18 साल बाद भी राजस्व विभाग ने अभी तक यह जमीन प्राधिकरण को नहीं सौंपी है।
खूबसूरत पहाड़ी रिसॉर्ट सोनमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा देने और योजनाबद्ध विकास के उद्देश्य से लिए गए कैबिनेट के इस फैसले को लागू करने में हुई इस अत्यधिक देरी ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास की देखरेख और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विनियमित करने के लिए साल 2004 में सोनमर्ग विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई थी।
विज्ञापन

इसके बाद साल 2007 में सरकार ने राजस्व विभाग से सोनमर्ग में उपलब्ध सरकारी भूमि के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। विभाग ने खसरा नंबरों के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जिसमें प्राधिकरण को हस्तांतरित करने के लिए 7,674 कनाल और 17 मरला राज्य भूमि की पहचान की गई थी। कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी और इस जमीन को सोनमर्ग विकास प्राधिकरण को सौंपने का निर्देश दिया ताकि क्षेत्र में पर्यटन बुनियादी ढांचे, पर्यावरण के अनुकूल विकास और आर्थिक विकास को गति मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

लगभग दो दशक बीत जाने के बावजूद अभी तक इस जमीन का कोई औपचारिक सीमांकन पूरा नहीं हुआ है और न ही प्राधिकरण को इसका कानूनी कब्जा दिया गया है। सोनमर्ग विकास प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस जमीन के कुछ हिस्सों पर इमारतों और पार्किंग सुविधाओं सहित कुछ सार्वजनिक संपत्तियां विकसित की गई हैं, लेकिन राजस्व विभाग ने कभी भी आधिकारिक तौर पर यह जमीन प्राधिकरण के नाम हस्तांतरित नहीं की।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक पिछले साल इस मुद्दे पर तब दोबारा चर्चा हुई जब उपायुक्त गांदरबल ने राजस्व अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। इन निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त राजस्व आयुक्त (एसीआर) गांदरबल ने उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीम) कंगन की देखरेख में छह सदस्यीय समिति का गठन किया जिसमें गुंड के तहसीलदार को इस सरकारी भूमि की पहचान कर प्राधिकरण को सौंपने का जिम्मा दिया गया था। समिति ने सोनमर्ग के लिशपथरी में लगभग 3,300 कनाल सरकारी भूमि की पहचान तो की लेकिन वह जमीन भी औपचारिक रूप से सोनमर्ग विकास प्राधिकरण को स्थानांतरित नहीं की जा सकी।
इस लंबे समय से चली आ रही देरी ने स्थानीय निवासियों और जन प्रतिनिधियों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी है। हितधारकों ने सवाल उठाया है कि 2007 की रिपोर्ट में पहचानी गई 7,674 कनाल और 17 मरला सरकारी जमीन का आखिरकार क्या हुआ। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि क्या राजस्व विभाग ने उस समय सरकार को गलत जानकारी दी थी या फिर इस जमीन के कुछ हिस्सों को बाद में किसी अनियमित माध्यम से डायवर्ट या किसी और के नाम कर दिया गया है।

स्थानीय हितधारकों ने अब इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और सरकार से एक स्वतंत्र समिति गठित करने का आग्रह किया है ताकि 2007 में चिन्हित भूमि की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके, देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जा सके और बिना किसी और देरी के यह सरकारी जमीन सोनमर्ग विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित की जा सके, जो कश्मीर के इस प्रमुख पर्यटन स्थल के पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। एजेंसी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed