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पूर्वी लद्दाख में चीन की हलचल को देख भारतीय सेना ने एलएसी के करीब बढ़ाई सतर्कता

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Seeing the movement of China in East Ladakh, Indian Army increased vigilance close to LAC
श्रीनगर। पूर्वी लद्दाख में भारत की चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर करीब एक साल पूर्व पैदा हुआ तनाव आज भी बरकरार है। ऐसे में एलएसी के करीब सटे इलाकों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने भी अपने जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। श्रीनगर से लद्दाख की ओर सेना की मूवमेंट भी तेज हो र्गई है।
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इस बीच सूत्रों के अनुसार, भारत और चीन के बीच पैदा हुए तनाव के बाद आपसी सहमति से भले ही चीन ने गलवान घाटी और पैंगोंग-त्सो झील के उत्तरी किनारों से अपनी सेना को पीछे हटाने में रजामंदी जताई थी, लेकिन कुछ ऐसे इलाके भी थी जहां से उन्होंने पूरी तरह से पीछे हटने से इनकार किया था और उन इलाकों में लगातार तनाव बरकरार है। इन इलाकों में दिपसांग प्लेन्स, हॉट स्प्रिंग, गोगरा और देमचोक का इलाका शामिल है। एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताया कि इन इलाकों में चीनी पीएलए के जवानों की मौजूदगी कहीं न कहीं जरूर चिंता का विषय है क्योंकि चीन पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। वह कभी भी किसी भी हरकत को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में हमारी सेना को पूरी तरह से सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि चीन द्वारा एलएसी के करीब ग्रीष्मकालीन अभ्यास शुरू किया गया है और इन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हमने अपने जवानों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
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लद्दाख की ओर मूवमेंट में बढ़ोतरी
बॉर्डर रोड आर्गेनाईजेशन (बीआरओ) के एक अधिकारी के अनुसार हाल ही में जोजिला पास को खोला गया है और कुछ दिनों से उन्हें सेना की लद्दाख की ओर मूवमेंट में बढ़ोतरी देखने को मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि, उन्हें अभी कोई औपचारिक आदेश नहीं मिले हैं, लेकिन ऐसी खबर सामने आ रही है कि आने वाले कुछ दिनों में सेना की डबल अप/डाउन मूवमेंट के लिए हमें तैयारी करनी पड़ सकती है। बता दें कि इससे यह साफ होता है कि भारतीय सेना इस बार कोई ढिलाई नहीं बरतेगी और अगर कोई कार्रवाई चीन की ओर से होती है तो उसका मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
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-पिछले साल 15 जून को हुई थी गलवान में झड़प
पिछले वर्ष 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए टकराव के बाद से लगातार तनाव बरकरार था, लेकिन कुछ समझौतों के बाद तनाव में थोड़ी कमी आई थी।
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