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भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द खत्म करने की हो रही कोशिश
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अनंतनाग। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि देश बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर महात्मा गांधी के धर्मनिरपेक्ष भारत में शामिल हुआ था जिसकी स्थापना भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द पर हुई थी, परंतु अब इन्हें खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। महबूबा ने केंद्र सरकार के प्रमुख क्षेत्रों में अपनी संपत्ति का मौद्रिकरण करने के फैसले की भी आलोचना की और कहा कि पिछले 70 वर्षों में देश में जो कुछ भी बनाया गया है उसे अब बेचा जा रहा है।
महबूबा ने दक्षिण कश्मीर ते शोपियां जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा (गांधी) के भारत में शामिल हुआ था। धर्मनिरपेक्ष भारत जहां भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द था। यदि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं होता तो जम्मू-कश्मीर इसमें शामिल नहीं हुआ होता।
पीडीपी अध्यक्ष ने संपत्ति के मौद्रिकरण के केंद्र के फैसले पर कहा कि सरकार पिछले 70 वर्षों में, मुख्य रूप से कांग्रेस के शासन के दौरान बनाई गई सभी संपत्तियों को बेच रही है। कहा-आप इस सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं जो पेट्रोल पंपों, राजमार्गों, बिजली परियोजनाओं को बेच रही है?
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महबूबा ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह असहमति की आवाज को दबा रही है और जो भी इसके खिलाफ बोलता है उसे गिरफ्तार किया जा रहा है। जून माह में प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली में हुई जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बैठक के दौरान प्रधानमंत्री से कहा था कि लोगों का दमन और उत्पीड़न खत्म होना चाहि। महबूबा ने सरकार पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक बंदियों की गिरफ्तारी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।
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मुकदमा चलने का मतलब दोषी नहीं
महबूबा ने कहा, लोग अदालतों से बरी होने के 12 साल बाद रिहा हो रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि उन पर मुकदमा चल रहा था, इसका मतलब यह नहीं है कि वे दोषी थे। (भाजपा नेता) साध्वी प्रज्ञा सिंह क्या थीं? वह एक विचाराधीन थीं और फिर भी उन्हें सांसद बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के 1000 से अधिक लोग अभी भी देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं।
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महबूबा ने दक्षिण कश्मीर ते शोपियां जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा (गांधी) के भारत में शामिल हुआ था। धर्मनिरपेक्ष भारत जहां भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द था। यदि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं होता तो जम्मू-कश्मीर इसमें शामिल नहीं हुआ होता।
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पीडीपी अध्यक्ष ने संपत्ति के मौद्रिकरण के केंद्र के फैसले पर कहा कि सरकार पिछले 70 वर्षों में, मुख्य रूप से कांग्रेस के शासन के दौरान बनाई गई सभी संपत्तियों को बेच रही है। कहा-आप इस सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं जो पेट्रोल पंपों, राजमार्गों, बिजली परियोजनाओं को बेच रही है?
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महबूबा ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह असहमति की आवाज को दबा रही है और जो भी इसके खिलाफ बोलता है उसे गिरफ्तार किया जा रहा है। जून माह में प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली में हुई जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बैठक के दौरान प्रधानमंत्री से कहा था कि लोगों का दमन और उत्पीड़न खत्म होना चाहि। महबूबा ने सरकार पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक बंदियों की गिरफ्तारी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।
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मुकदमा चलने का मतलब दोषी नहीं
महबूबा ने कहा, लोग अदालतों से बरी होने के 12 साल बाद रिहा हो रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि उन पर मुकदमा चल रहा था, इसका मतलब यह नहीं है कि वे दोषी थे। (भाजपा नेता) साध्वी प्रज्ञा सिंह क्या थीं? वह एक विचाराधीन थीं और फिर भी उन्हें सांसद बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के 1000 से अधिक लोग अभी भी देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं।