खनन में बदलाव: विस्फोटक हुए आउटडेटेड! अब वाइब्रेशन तकनीक से निकलेगा चूना पत्थर, खदान में अपनाई गई नई तकनीक
श्रीनगर की चूना पत्थर खदान में सुरक्षा कारणों से विस्फोटकों के इस्तेमाल पर रोक लगने के बाद अब वाइब्रो रिपर तकनीक से बिना ब्लास्टिंग और ड्रिलिंग के खनन किया जाएगा। नई तकनीक से पर्यावरण और आसपास के घरों को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित, कम प्रदूषण वाला और अधिक प्रभावी तरीके से चूना पत्थर निकाला जा सकेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीनगर के पास स्थित चूना पत्थर खदान में सुरक्षा कारणों से विस्फोटकों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके लिए खनन का तरीका बदला गया है। अब नई तकनीक की मदद से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना और बिना किसी धमाके के चूना पत्थर निकाला जाएगा।
इससे पर्यावरण और आसपास के घरों को भी खतरा नहीं होगा। दावा है कि यह तकनीक सुरक्षित, कम प्रदूषण और तेज काम करने वाली है। दरअसल, खदान में चट्टानें तोड़ने के पारंपरिक तरीके नाकाम साबित हो रहे थे। उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा था।
इसके समाधान के लिए यह कदम उठाया गया है।एक स्थानीय सीमेंट कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि वोल्वो कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट ने कंपनी की खदान पर अपनी एक आधुनिक ईसी300 एक्स्क्वेटर मशीन लगाई है। इसमें एक खास तरह का वाइब्रो रिपर उपकरण लगाया गया है। यह तकनीक कंपन (वाइब्रेशन) के सिद्धांत पर काम करती है, जो बिना ड्रिलिंग या ब्लास्टिंग किए लगातार चूना पत्थर को तोड़कर बाहर निकालती है। पारंपरिक ब्रेकर मशीनों के उलट इस तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इससे निकलने वाली शॉक वेव्स (आघाती तरंगे) बहुत कम होती हैं। इससे खदान के आसपास के इलाकों में अनावश्यक खोदाई नहीं होती और जरूरत के मलबे को सटीकता से निकाला जा सकता है।
तीन से चार गुना ज्यादा उत्पादन करने की क्षमता
कंपनी के अधिकारी मोहम्मद यूसुफ का दावा है कि यह आधुनिक मशीन इसी श्रेणी की आम मशीनों के मुकाबले करीब तीन से चार गुना ज्यादा उत्पादन करने की क्षमता रखती है। इस तकनीक से आसपास के इलाकों में कंपन का असर बहुत कम होना। ईंधन की कम खपत और मजदूरों की सुरक्षा में सुधार होना। मशीन मुहैया कराने वाली कंपनी के अधिकारी डी कृष्णन ने कहा कि जिन खनन क्षेत्रों में विस्फोट करने पर पाबंदी है, वहां के संचालकों के सामने उत्पादन के स्तर को बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। यह नया सिस्टम पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को कम करते हुए एक बेहतर और कुशल विकल्प प्रदान करता है। यह 30 से 38 टन श्रेणी की बड़ी मशीन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर बड़ी खदानों और चट्टानों को संभालने के काम में किया जाता है।